PM Modi ने नोबेल पुरस्कार विजेता और बांग्लादेश के प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस से हाल ही में हुई एक बैठक में बांग्लादेश में हिंदुओं सहित सभी अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर चिंता व्यक्त की।
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उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और भारत के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, और इन संबंधों की बुनियाद आपसी सम्मान और विविधता की सुरक्षा पर टिकी है। प्रधानमंत्री ने यह भी ज़ोर दिया कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा या भेदभाव न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है।
PM Modi ने यूनुस से कहा – “बयानबाज़ी से बचें, समरसता को बढ़ावा दें”
इस मुद्दे पर यूनुस ने भी सहमति जताई और आश्वासन दिया कि वे सामाजिक समरसता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने जानकारी दी कि PM Modi ने स्पष्ट रूप से कहा कि माहौल को खराब करने वाली किसी भी बयानबाजी से बचा जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र में शांति और सौहार्द बना रहे। उन्होंने लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के निर्माण में भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया।
इसके साथ ही PM Modi ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर सख्त कानून लागू करने और विशेष रूप से रात में होने वाली अवैध घुसपैठ को रोकने के उपायों की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि भारत संबंधों को ‘जन-केंद्रित दृष्टिकोण’ से देखता है, और दोनों देशों के बीच दशकों से चल रहे सहयोग ने आम लोगों को ठोस लाभ पहुंचाया है।
इसी भावना के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने यूनुस को यह भी आश्वस्त किया कि भारत बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को व्यावहारिकता और रचनात्मकता के आधार पर और मजबूत करना चाहता है।
हसीना प्रत्यर्पण पर विदेश सचिव की चुप्पी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस की बैठक के बाद जब विदेश सचिव विनय क्वात्रा से यह पूछा गया कि क्या बैठक में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया गया, तो उन्होंने इस पर सीधा जवाब देने से परहेज़ किया।
क्वात्रा ने केवल इतना कहा कि इस संवेदनशील विषय पर फिलहाल टिप्पणी करना उचित नहीं होगा और यह स्पष्ट किया कि भारत को बांग्लादेश से एक आधिकारिक अनुरोध प्राप्त हुआ है। इस बीच, यूनुस की हालिया चीन यात्रा के दौरान दिए गए बयान नए विवादों का कारण बन गए हैं।
बीजिंग में उन्होंने चीन से आग्रह किया कि वह बांग्लादेश में अपना आर्थिक प्रभाव बढ़ाए। इससे भी अधिक विवादास्पद उनका वह बयान रहा जिसमें उन्होंने भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों को “भूमि से घिरे हुए” क्षेत्र बताते हुए बांग्लादेश को इस क्षेत्र का “समुद्र का एकमात्र संरक्षक” कहा। इन टिप्पणियों को रणनीतिक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है, जिससे भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
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