सेना के नाम पर धोखा! Delhi Police ने दबोचा फर्जीवाड़ा करने वाला गैंग

Delhi Police की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह भारतीय सेना और इंडियन एयर फोर्स के वरिष्ठ अधिकारियों का रूप धारण कर कारोबारियों को निशाना बनाता था और सरकारी सप्लाई के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करता था। Delhi Police के अनुसार, आरोपियों ने एक कारोबारी से पांच लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की।
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नकली एयर फोर्स ऑर्डर से शुरू हुआ पूरा खेल
मामले की जांच तब शुरू हुई जब इंटर-स्टेट सेल (ISC) क्राइम ब्रांच को एक शिकायत मिली। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात लोगों ने खुद को इंडियन एयर फोर्स का अधिकारी बताकर उससे संपर्क किया और एल्युमिनस लेटराइट (इंडस्ट्रियल ग्रेड 40-45%) की सप्लाई का ऑर्डर दिया।
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आरोपियों ने भरोसा जीतने के लिए एयर फोर्स द्वारा जारी किए गए फर्जी परचेज ऑर्डर और नकली सरकारी दस्तावेज भेजे। शिकायतकर्ता ने ऑर्डर को असली समझते हुए सामान एयर फोर्स स्टेशन तक पहुंचा दिया। इसके बाद ठगों ने “वेंडर रजिस्ट्रेशन” और “अकाउंट मैपिंग” जैसी प्रक्रियाओं का हवाला देकर उससे पैसे जमा कराने शुरू कर दिए।
जब शिकायतकर्ता को गड़बड़ी का शक हुआ, तब उसने पुलिस से संपर्क किया। इस धोखाधड़ी में उसे कुल 5,06,415 रुपये का नुकसान हुआ।
जांच में मेवात कनेक्शन आया सामने
Delhi Police ने धोखाधड़ी, जालसाजी और प्रतिरूपण से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी विश्लेषण के दौरान पता चला कि इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से जारी हुए थे, लेकिन उनका संचालन हरियाणा के नूंह (मेवात) क्षेत्र से किया जा रहा था।
इसके बाद इंस्पेक्टर कमल कुमार यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम में सब-इंस्पेक्टर आशीष शर्मा, गुलाब सिंह, एएसआई शैलेंद्र सिंह, जफरूद्दीन और अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।
Delhi Police ने 4 आरोपी गिरफ्तार किए
जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले सिम कार्ड धारकों मनीष और कौशल की पहचान की। दोनों को क्रमशः बुलंदशहर और अलीगढ़ से गिरफ्तार किया गया। आगे की पूछताछ और तकनीकी इनपुट के आधार पर सह-आरोपी बुरहान उर्फ आमिर और रिजवान अहमद को नूंह, मेवात से गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह अलग-अलग लोगों के नाम पर सिम कार्ड और बैंक अकाउंट खरीदता था। बाद में इन्हें साइबर ठगी करने वाले लोगों को सौंप दिया जाता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी एक सिम कार्ड करीब 1500 रुपये और बैंक अकाउंट लगभग 6000 रुपये में उपलब्ध कराते थे।
सेना और एयर फोर्स अधिकारी बनकर करते थे ठगी
गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उनका गिरोह खुद को सेना और एयर फोर्स का अधिकारी बताकर कारोबारियों को फंसाता था। पहले नकली सरकारी खरीद आदेश भेजे जाते थे, फिर सामान मंगवाया जाता था। इसके बाद पीड़ितों से अलग-अलग बहानों से पैसे वसूले जाते थे।
Delhi Police का कहना है कि नूंह और मेवात के कई दूरदराज इलाकों में ऐसे साइबर फ्रॉड गिरोह सक्रिय हैं। ये लोग अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी सिम कार्ड, बैंक खाते और नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हैं ताकि पुलिस की जांच से बच सकें।
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