15 साल बाद Bengal में बदली सत्ता, Suvendu Adhikari बने मुख्यमंत्री

West Bengal की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के बीच भाजपा विधायक दल के नेता Suvendu Adhikari ने राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली। 15 साल तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस सरकार के बाद भाजपा की यह जीत राज्य की राजनीति में बड़े परिवर्तन के रूप में देखी जा रही है।
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भव्य शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए बड़े नेता
कोलकाता में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, रक्षा मंत्री Rajnath Singh, भाजपा अध्यक्ष J. P. Nadda और केंद्रीय मंत्री Dharmendra Pradhan मौजूद रहे। इसके अलावा त्रिपुरा के मुख्यमंत्री Manik Saha, असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma, दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami भी समारोह में शामिल हुए।
Bengal में BJP की ऐतिहासिक जीत
2026 के West Bengal विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 सीटों में से 206 से अधिक सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं, 15 साल से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस को केवल 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा। चुनाव परिणामों को राज्य की राजनीति में “बड़ा सत्ता परिवर्तन” माना जा रहा है।
“पॉलिटिकल हिंसा TMC के DNA में है” : Shahzad Poonawalla का बड़ा हमला
भाजपा नेताओं ने सुवेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुने जाने और मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह जीत “विकास, सुशासन और बदलाव” के मुद्दे पर जनता के समर्थन का परिणाम है।
भवानीपुर और नंदीग्राम में बड़ी जीत
सुवेंदु अधिकारी ने इस चुनाव में दो अहम सीटों भवानीपुर और नंदीग्राम में जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत और मजबूत की। भवानीपुर सीट पर उन्होंने मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को 15 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अंतिम दौर की मतगणना के बाद अधिकारी ने निर्णायक बढ़त बनाए रखी।
वहीं, नंदीग्राम सीट पर भी सुवेंदु अधिकारी ने जीत हासिल की। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक उन्हें 1 लाख 27 हजार से अधिक वोट मिले। नंदीग्राम वही सीट है जिसने पिछले कुछ वर्षों में बंगाल की राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था।
रिकॉर्ड मतदान और बदला राजनीतिक समीकरण
West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 में रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया। दूसरे चरण में 91.66 प्रतिशत वोटिंग हुई, जबकि पहले चरण में 93.19 प्रतिशत मतदान हुआ था। कुल मिलाकर चुनाव में लगभग 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसे आजादी के बाद सबसे अधिक मतदान प्रतिशतों में से एक माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारी मतदान ने राज्य में बदलाव की इच्छा को स्पष्ट रूप से दिखाया। भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान कानून-व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा, भ्रष्टाचार और विकास को बड़ा मुद्दा बनाया था।
नई सरकार के सामने चुनौतियां
नई भाजपा सरकार के सामने अब कानून-व्यवस्था सुधारने, राजनीतिक तनाव कम करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी। चुनाव के बाद राज्य में कई जगहों पर राजनीतिक हिंसा की खबरें सामने आई हैं, जिस पर विपक्ष ने चिंता जताई है।
सुवेंदु अधिकारी ने शपथ लेने के बाद कहा कि उनकी सरकार “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र पर काम करेगी और West Bengal को विकास, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नई दिशा देगी।
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