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Sultanpur: मशीन से तैयार होगा गाय के गोबर से बना लट्ठ, बड़े पैमाने पर होगा इस्तेमाल।

सुलतानपुर (Sultanpur) में महिलाओं के एक स्वयं सहायता समूह ने विकास विभाग के सहयोग से ऐसी मशीन तैयार की है जो गोबर, कोयला और धान की डंठल के कतरन से लट्ठ तैयार करेगी।

UP: उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर (Sultanpur) में गो संरक्षण को लेकर काम करने वाले एक स्वयं सहायता समूह ने शव दाह की हिंदू परंपरा में एक महत्वपूर्ण और सार्थक दखल दिया है। समूह की महिलाओं ने गाय के गोबर से ऐसा लट्ठ तैयार किया है, जिसकी मदद से हिंदू रीति से शवों को मुखाग्नि दी जा सकेगी। बता दें कि हिंदू धर्म में गाय के मल (गोबर) को काफी पवित्र माना गया है। पूजा-पाठ से लेकर शवों को मुखाग्नि देने तक में इससे बने उपलों का इस्तेमाल होता रहा है। अब तक हाथ से पाथे गए उपलों से शवों को मुखाग्नि दी जाती थी।

सुलतानपुर (Sultanpur) में महिलाओं के एक स्वयं सहायता समूह ने विकास विभाग के सहयोग से ऐसी मशीन तैयार की है जो गोबर, कोयला और धान की डंठल के कतरन से लट्ठ तैयार करेगी। इसका बाजार में अलाव और तंदूर में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगा। शव के अंतिम संस्कार में परम पवित्र गोबर की यह लकड़ी भी इस्तेमाल की जाएगी। आधिकारिक तौर पर बताया गया है कि, इसमें विषाणु और जीवाणुओं को नष्ट करने की क्षमता तक दर्शायी गई है। 

गोबर-कोयला और पैरा के संयुक्त मिश्रण से बनाया जा रहा लट्ठ 

प्रधान पति हलियापुर अखंड प्रताप सिंह उर्फ गब्बर सिंह ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से गोबर की लकड़ी तैयार की जाती है। मशीन में गोबर कोयला और पैरा के संयुक्त मिश्रण से लट्ठ बनाया जाता है। इससे महिलाओं को रोजगार मिला हुआ है। उन्होंने बताया कि हमारे यहां 700 से अधिक गौशाला में गायें हैं। इनके गोबर का इस्तेमाल किया जा रहा है। सुल्तानपुर (Sultanpur)-अयोध्या (Ayodhya) जिले की सीमा पर स्थित हलियापुर ग्राम पंचायत की इस गौशाला में अब तक केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी समेत कई राज्यमंत्री आ चुके हैं। 

इस गौशाला की वे तारीफ भी कर चुके हैं। इनसे प्रेरित होकर महिलाओं ने रोजगार का ये रास्ता अख्तियार किया है। सीडीओ अतुल वत्स ने बताया कि हलियापुर गौशाला में संत रविदास स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ये पहल है। यहां करीब साढ़े 7 सौ गाय पंजीकृत रूप से रखी गई हैं।