Abhijeet Dipke ने Delhi पुलिस पर हिरासत में उत्पीड़न के आरोप लगाए

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य Abhijeet Dipke ने सोमवार को दिल्ली पुलिस पर “मानसिक प्रताड़ना” के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में हिरासत में लिए जाने के दौरान पुलिस ने उन्हें और उनके परिवार को परेशान किया।

हिरासत में अपने साथ हुए बर्ताव के खिलाफ आवाज़ उठाते हुए, Abhijeet Dipke ने पुलिस की कार्रवाई को मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की सोची-समझी कोशिश बताया।

आधी रात को दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए डाले गए दबाव के पलों को याद करते हुए, Abhijeet Dipke ने अपनी दादी के निधन के बारे में पुलिस के दावों को कबूलनामा हासिल करने के लिए गढ़ा गया “झूठ” करार दिया।

Abhijeet Dipke का पुलिस पर आरोप

यह सरासर झूठ है! वे बस नैतिक रूप से सही होने का दिखावा कर रहे हैं। वे सुबह 3:30 बजे गिरफ्तारी का कागज़ लेकर मेरे पास आए और कहा, ‘आपकी दादी का निधन हो गया है; हम नहीं चाहते कि आप यहां रहें, इसलिए इस गिरफ्तारी के कागज़ पर हस्ताक्षर करें।’

मैंने उनसे कहा कि मैं हस्ताक्षर नहीं करूंगा। फिर उन्होंने कहा कि मुझे हस्ताक्षर करना ही होगा और मुझे अपने माता-पिता को फोन करना चाहिए। मैंने उनसे पूछा, ‘मैं सुबह 3:30 बजे अपने माता-पिता को फोन क्यों करूं?’

उन्होंने मुझे पूरे दिन हिरासत में रखा; उन्होंने मुझे यह नहीं बताया कि मुझे कहां रखा गया था, मैं किस पुलिस स्टेशन में था, या देश के किस हिस्से में था। मुझे नहीं पता था, मेरे माता-पिता को नहीं पता था, और मेरे वकीलों को भी नहीं पता था।

उन्होंने पूरे दिन किसी को कुछ नहीं बताया। और सुबह 3:30 बजे, वे जानबूझकर चाहते थे कि मैं अपने माता-पिता को फोन करूं और उन्हें तनाव में डालूं। वे चाहते थे कि मैं उन्हें यह झटका दूं कि मैं लंबे समय तक जेल में रहूंगा।

दिल्ली पुलिस न केवल मुझे बल्कि मेरे परिवार को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी। क्या दिल्ली पुलिस ने मेरे परिवार को बताया कि मुझे कहां रखा गया था? क्या दिल्ली पुलिस ने मेरे माता-पिता को बताया कि मैं किस जेल या पुलिस स्टेशन में था? अगर उन्होंने नहीं बताया, तो क्यों नहीं बताया? क्या उनमें इंसानियत नहीं है?” दिपके ने पत्रकारों से कहा।

Abhijeet Dipke ने उन कागज़ों पर साइन करने से इनकार करने के बारे में भी बात की, जिनमें उन पर सार्वजनिक शांति भंग करने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया उन्हें बिना कानूनी सलाह के फंसाने की कोशिश थी।

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विरोध के आरोप पर Dipke का सवाल

Abhijeet Dipke ने कहा, “वे मुझसे इस कागज़ पर साइन करने के लिए कह रहे थे और दावा कर रहे थे कि इसमें लिखा है कि मैं विरोध-प्रदर्शन करके देश की शांति भंग कर रहा था। मैंने उनसे पूछा, ‘आपने मुझे विरोध करने की इजाज़त कब दी? आपने तो मुझे बस हवाई जहाज़ से उठाया है; मैं इस कागज़ पर साइन नहीं करूंगा।’

उन्होंने कहा कि मुझे इस पर साइन करना ही होगा। मैंने कहा, ‘आप मुझे इस तरह नहीं फंसा सकते। मैं एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति हूं; जब तक मेरा वकील नहीं आ जाता, मैं किसी भी कागज़ पर साइन नहीं करूंगा।'”

CJP आंदोलन के संस्थापक ने केंद्र सरकार की आलोचना और तेज़ कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक अधिकारों की कीमत पर कुछ खास अधिकारियों को बचाने के लिए सरकारी तंत्र का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।

हम लंबे समय से पुलिस से यही पूछ रहे हैं। वे कहते रहते हैं कि इजाज़त नहीं है। तो आज हमें बता दें कि आप विरोध-प्रदर्शन की इजाज़त कब देंगे। अगर आप आज नहीं बताएंगे, तो हम खुद तारीख़ तय कर लेंगे, और अगर दिल्ली पुलिस हमें गिरफ़्तार करना चाहती है, तो करने दे।

मैं पीछे नहीं हटने वाला। चाहे आप हमें 10 दिन, एक महीना या एक साल तक भी हिरासत में रखें, हम पीछे नहीं हटेंगे। अब हद हो गई है; पूरा देश तानाशाही की चपेट में है। सिर्फ़ एक ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए उन्होंने पत्रकारों को गिरफ़्तार किया है, छात्रों को हिरासत में लिया है और उनकी पिटाई कर रहे हैं।

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Gyanesh Kumar को बचाने का आरोप

उन्होंने विपक्षी सांसदों की पिटाई की है; कल सांसद जॉन ब्रिटास की बेरहमी से पिटाई की गई। एक ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए नरेंद्र मोदी और अमित शाह गुंडागर्दी पर उतर आए हैं।

अगर वे गुंडागर्दी करना चाहते हैं, तो करने दें, लेकिन हम महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर के रास्ते पर चलने वाले लोग हैं। उन्होंने देश की आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी थी, और हम तानाशाही को खत्म करने के लिए लड़ेंगे,” Abhijeet Dipke ने आगे कहा।

दिल्ली की एक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने CJP के तीन सदस्यों – Abhijeet Dipke, Sourav Das और Ashutosh Ranka – को रिहा करने का आदेश दिया। इन तीनों को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने एहतियातन हिरासत में लिया था।

उनके वकील के मुताबिक, रिहाई की शर्त के तौर पर इन तीनों नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वे अगले एक साल तक ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल न हों जिससे शांति और व्यवस्था भंग हो सकती है।

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