BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. Sambit Patra ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की रामलीला मैदान रैली पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि ‘वोट चोरी’ के नाम पर निकाली जा रही यह रैली असल में एसआईआर प्रक्रिया को बदनाम करने और घुसपैठियों को बचाने की राजनीति है।
संसद से सड़क तक ‘वोट चोरी’ की बहस
BJP प्रवक्ता Sambit Patra ने याद दिलाया कि एसआईआर और चुनावी सुधारों पर विपक्ष की मांग पर ही संसद में चर्चा हुई, जिसमें कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं ने अपने-अपने तर्क रखे और उसके बाद गृह मंत्री अमित शाह ने बिंदुवार जवाब दिया। उनके अनुसार, जब संवैधानिक मंच पर बात हो चुकी है, तो रामलीला मैदान की रैली लोकतांत्रिक विमर्श नहीं बल्कि राजनीतिक प्रदर्शन मात्र है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची परिष्करण का संवैधानिक अधिकार है और एसआईआर उसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
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राहुल गांधी और ‘फैब्रिकेटेड स्टोरी’ का आरोप
BJP प्रवक्ता Sambit Patra ने राहुल गांधी पर व्यक्तिगत और राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने एसआईआर और ईवीएम के साथ छेड़छाड़ को लेकर “पूरी तरह झूठी और गढ़ी हुई कहानियां” पेश कीं। पात्रा ने व्यंग्य करते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी केवल प्रतीकात्मक राजनीति के लिए खादी पहनकर आए और फैब्रिक, खादी व साड़ियों पर लंबा भाषण दिया, लेकिन चुनावी तथ्यों पर ठोस जवाब नहीं दे पाए।
ऐतिहासिक उदाहरणों से कांग्रेस पर वार
BJP प्रवक्ता ने “वोट चोरी” के असली उदाहरण बताते हुए जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी से जुड़े तीन प्रसंगों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के दौर में ही आंतरिक चुनावी हेरफेर, रायबरेली चुनाव में कथित करप्ट प्रैक्टिस और नागरिकता से पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज होने जैसे मामले सामने आए, जो कांग्रेस की राजनीतिक नैतिकता पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।
घुसपैठ, तुष्टिकरण और 45 दिन की चुनौती
BJP प्रवक्ता Sambit Patra ने आरोप लगाया कि कांग्रेस एसआईआर का विरोध इसलिए कर रही है क्योंकि इससे अवैध घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं, जो उसके “तुष्टिकरण की राजनीति” के लिए जरूरी वोट बैंक हैं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने संसद में स्पष्ट किया कि सीसीटीवी फुटेज 45 दिन तक सुरक्षित रहती है और इसी अवधि में कोई भी चुनाव को चुनौती दे सकता है। पात्रा ने राहुल गांधी से पूछा कि अगर बिहार चुनाव में “वोट चोरी” हुई है तो वे अभी भी शेष बचे समय में कोर्ट या चुनाव आयोग में एक भी औपचारिक शिकायत क्यों दर्ज नहीं कर रहे हैं।
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