सुप्रीम कोर्ट द्वारा Congress नेता Pawan Khera को अग्रिम जमानत दिए जाने के बाद सियासी माहौल गर्म हो गया है। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद Pramod Tiwari ने कहा कि “सच्चाई की जीत हुई है और न्याय हुआ है।” उन्होंने इस मामले को राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण बताते हुए भाजपा और असम सरकार पर निशाना साधा।
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Congress का ‘न्याय’ का दावा
प्रमोद तिवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह दिखाता है कि कानून और न्याय व्यवस्था अब भी निष्पक्ष है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अनावश्यक रूप से परेशान किया गया और उनके खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई। तिवारी के अनुसार, यह मामला विपक्षी नेताओं को दबाने की कोशिश का हिस्सा था।
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Himanta Biswa Sarma पर हमला
तिवारी ने असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अपने निजी मुद्दों को लेकर राज्य की मशीनरी का दुरुपयोग किया। तिवारी ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और उन्होंने सरमा से इस्तीफे की मांग भी की।
Congress बोली—न्याय व्यवस्था ने दिखाया दम
Congress के वरिष्ठ नेता Tariq Anwar ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पवन खेड़ा को कानूनी राहत मिलने से रोकने की कोशिश की गई, लेकिन वह सफल नहीं हुई। अनवर ने कहा कि भाजपा नेताओं की भाषा और व्यवहार राजनीतिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है और इस तरह के मामलों में कानून को निष्पक्ष रूप से काम करना चाहिए।
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वहीं, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के नेता Rafiqul Islam ने इस विवाद से दूरी बनाते हुए कहा कि मामला अदालत में है और उनकी पार्टी इस राजनीतिक टकराव में शामिल नहीं होना चाहती। हालांकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष के खिलाफ किया जाता है।
भाजपा का जवाब
भाजपा की ओर से Nalin Kohli ने इस पूरे मामले को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि राज्य को यह अधिकार है कि वह लगाए गए आरोपों की जांच करे और इसके लिए पूछताछ या कस्टडी की मांग कर सकता है। कोहली ने कहा कि पवन खेड़ा, किसी भी नागरिक की तरह, अदालत में जाकर राहत मांग सकते हैं और अदालत का फैसला अंतिम होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा के खिलाफ कथित मानहानि और जालसाजी से जुड़े आरोपों से शुरू हुआ था। इसी मामले में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने पहले पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को खेड़ा की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था और बाद में उन्हें अग्रिम जमानत दे दी। अदालत ने माना कि जांच के दौरान सहयोग और कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है, लेकिन तत्काल गिरफ्तारी जरूरी नहीं है।
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