Emergency की माफी अब तक नहीं: भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी का कांग्रेस पर हमला

भंडारी ने आरोप लगाया कि उस दौरान सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को बेरहमी से प्रताड़ित किया गया।

Emergency की 50वीं वर्षगांठ पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस और गांधी-वाड्रा परिवार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने आज तक 1975 में लगाए गए आपातकाल के लिए देश से औपचारिक माफी नहीं मांगी है।

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उन्होंने कहा कि अगर गांधी-वाड्रा परिवार में लोकतांत्रिक मूल्यों की कोई भी भावना शेष है, तो उन्हें देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। भंडारी ने आरोप लगाया कि इस परिवार ने संविधान की हत्या की, लोकतंत्र को कुचल दिया और नागरिकों के बुनियादी अधिकारों को सत्ता के लालच में बलि चढ़ा दिया।

उन्होंने याद दिलाया कि इस दौरान 1 लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया, 30 लाख से ज्यादा गरीबों की जबरन नसबंदी की गई, और न्यायपालिका को भी प्रभावित किया गया—यहां तक कि न्यायमूर्ति एच.आर. खन्ना को मुख्य न्यायाधीश नहीं बनने दिया गया।

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भंडारी ने कहा कि यह वह समय था जब 39वां संविधान संशोधन लाकर सभी शक्तियां केंद्र सरकार को सौंपने की कोशिश की गई। यह दिन भारत के लोकतंत्र पर सबसे बड़े प्रहार की याद दिलाता है, जिसे आज की पीढ़ी को कभी नहीं भूलना चाहिए।

भंडारी ने आरोप लगाया कि उस दौरान सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को बेरहमी से प्रताड़ित किया गया। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं एक संघ कार्यकर्ता के रूप में Emergency विरोधी साहित्य को देश के विभिन्न हिस्सों में पहुँचाने का कार्य कर रहे थे।

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उन्होंने कांग्रेस पर आज तक आपातकाल के लिए माफी न मांगने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि पार्टी का चरित्र आज भी लोकतंत्र विरोधी बना हुआ है। भाजपा नेताओं के अनुसार, जब-जब कांग्रेस सत्ता में आती है, तब-तब लोकतंत्र कमजोर होता है, और जब वह विपक्ष में रहती है, तब लोकतंत्र मजबूत होता है।

उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान कांग्रेस यह तय करती थी कि नागरिक क्या बोलेंगे, क्या खाएंगे, क्या सोचेंगे और क्या नहीं बोलेंगे। उन्होंने गांधी-वाड्रा परिवार से आग्रह किया कि यदि उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों की कोई भी भावना शेष है, तो उन्हें 50 साल पहले लगाए गए आपातकाल के लिए देश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

Emergency के बारे में

Emergency apology still not received: BJP spokesperson Pradeep Bhandari attacks Congress

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून 1975 एक ऐसा दिन था, जब लोकतंत्र के मूल मूल्यों पर सबसे गंभीर आघात हुआ। इस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत देश में ‘आंतरिक अशांति’ का हवाला देते हुए Emergency की घोषणा की।

यह आपातकाल 21 महीने तक चला और इस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया, विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया और न्यायपालिका पर भी दबाव बनाया गया। सरकार की आलोचना करना लगभग अपराध बन गया था।

इस दौर को भारतीय लोकतंत्र की सबसे काली रात कहा गया, जिसने यह सिखाया कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए केवल संवैधानिक प्रावधान ही नहीं, बल्कि जनता की जागरूकता और संस्थाओं की स्वतंत्रता भी आवश्यक है।

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