India ने Nepal के Lipulekh Pass दावों को किया खारिज

नेपाल के दावे ने भारत-नेपाल संबंधों में तनाव बढ़ाया है। भारत-चीन के बीच हाल की निकटता और भारत-अमेरिका संबंधों की चुनौतियाँ इस विवाद को और जटिल बना रही हैं। आने वाली ओली की भारत यात्रा और मोदी की चीन यात्रा क्षेत्रीय कूटनीति की दिशा तय करने में अहम होंगी।

नेपाल ने भारत और चीन से आग्रह किया कि Lipulekh Pass से कोई सीमा गतिविधि या व्यापार न करें। भारत ने बुधवार को नेपाल के इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया।

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भारत का आधिकारिक रुख

India rejects Nepal's Lipulekh Pass claims

विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल: “नेपाल का दावा न तो उचित है और न ही ऐतिहासिक तथ्यों/साक्ष्यों पर आधारित। एकतरफा क्षेत्रीय विस्तार अस्वीकार्य। भारत-चीन सीमा व्यापार Lipulekh Pass से 1954 से चला आ रहा है। कोविड और अन्य कारणों से व्यापार बाधित था, अब दोनों देश इसे पुनः शुरू करेंगे।

Lipulekh Pass पर नेपाल का दावा

2020 में नेपाल ने संवैधानिक संशोधन कर नया नक्शा जारी किया। इसमें लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपना हिस्सा बताया। नेपाल का बयान: यह क्षेत्र महाकाली नदी के पूर्व में आता है और नेपाल का अभिन्न हिस्सा है। भारत को सड़क निर्माण, विस्तार और सीमा व्यापार नहीं करना चाहिए। चीन को भी सूचित किया गया कि यह क्षेत्र नेपाल का है।

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भारत-नेपाल संबंधों में तनाव

यह विवाद भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की नेपाल यात्रा के कुछ दिनों बाद उठा। नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की भारत यात्रा 16 सितंबर को प्रस्तावित है। ओली ने पद संभालने के बाद पहले चीन की यात्रा की थी और सितंबर अंत में SCO शिखर सम्मेलन के लिए दोबारा चीन जाएंगे। भारत-नेपाल के पारंपरिक घनिष्ठ संबंधों में यह देरी और विवाद महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

India rejects Nepal's Lipulekh Pass claims

भारत-चीन संबंधों में बदलाव

हाल ही में भारत और चीन ने शिपकी ला, नाथू ला और लिपुलेख चौकियों से व्यापार पुनः शुरू करने पर सहमति दी। यह चौकियाँ कोविड-19 और गलवान झड़पों के बाद बंद थीं। चीनी विदेश मंत्री वांग यी की दिल्ली यात्रा में दोनों देशों ने 2005 सीमा समझौते के आधार पर संबंध मजबूत करने पर सहमति जताई। यह भारत-चीन कूटनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

भारत-अमेरिका समीकरण

अमेरिका ने भारत की रूसी तेल खरीद की आलोचना की। भारत पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा। द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर वार्ता रुकी हुई है और अगला दौर स्थगित हो सकता है।

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