SCO Summit में दिखी भारत-रूस की दोस्ती: मोदी–पुतिन एक ही कार से पहुंचे बैठक स्थल

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की शुरुआत 2001 में हुई थी और आज इसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कज़ाख़स्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और हाल ही में ईरान स्थायी सदस्य के रूप में शामिल हैं।

तियानजिन (चीन)। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान एक अनोखा और प्रतीकात्मक दृश्य देखने को मिला जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी द्विपक्षीय बैठक के लिए चीन के तियानजिन में एक ही कार से पहुंचे।

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दोनों नेताओं का यह संयुक्त सफर न केवल भारत–रूस की मजबूत होती दोस्ती और आपसी विश्वास का प्रतीक बना बल्कि कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय भी रहा। माना जा रहा है कि यह घटनाक्रम दोनों देशों के गहरे रिश्तों और भविष्य की व्यापक साझेदारी का संकेत है।

India-Russia friendship seen in SCO Summit: Modi-Putin reached the meeting venue in the same car

समिट के इतर होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में ऊर्जा सहयोग, रक्षा समझौते, व्यापारिक संबंध और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है। इससे पहले भी मोदी–पुतिन की मुलाकातों को “सच्ची दोस्ती” की मिसाल बताया जाता रहा है, और अब तियानजिन में उनका यह साझा सफर दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने वाला कदम माना जा रहा है।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के बारे में

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की शुरुआत 2001 में हुई थी और आज इसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कज़ाख़स्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और हाल ही में ईरान स्थायी सदस्य के रूप में शामिल हैं। इस संगठन का उद्देश्य आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद जैसी चुनौतियों से मिलकर निपटना, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को मजबूत करना तथा ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

India-Russia friendship seen in SCO Summit: Modi-Putin reached the meeting venue in the same car

हर वर्ष आयोजित होने वाले SCO शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष या शासन प्रमुख एकत्र होकर अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं। भारत के लिए यह मंच मध्य एशियाई देशों से संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका सशक्त करने का अवसर प्रदान करता है। हालिया शिखर सम्मेलन में ऊर्जा सहयोग, रक्षा समझौते, कनेक्टिविटी और वैश्विक विकास साझेदारी जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से चर्चा के केंद्र रहे।

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