भारत देगा Mongolia को निःशुल्क ई-वीज़ा, सीमा सुरक्षा बलों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी शुरू

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत–मंगोलिया के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आत्मीय और आध्यात्मिक बंधन पर आधारित हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत–Mongolia संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें घोषित कीं। उन्होंने कहा कि लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद और मंगोलिया के अरखांगई प्रांत के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों में नई ऊर्जा का संचार करेगा। भले ही भारत और मंगोलिया की सीमाएँ साझा नहीं हैं, लेकिन भारत ने हमेशा मंगोलिया को एक पड़ोसी के रूप में देखा है और जन-जन के रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी भावना के तहत मंगोलियाई नागरिकों को निःशुल्क ई-वीज़ा देने और मंगोलिया के युवा सांस्कृतिक राजदूतों की भारत यात्रा को प्रायोजित करने का निर्णय लिया गया है।

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भारत मंगोलिया का दृढ़ और विश्वसनीय विकास भागीदार बना रहेगा

India will provide free e-visa to Mongolia, capacity building program for border security forces also started

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत Mongolia के विकास में एक दृढ़ और विश्वसनीय भागीदार रहा है। 1.7 बिलियन डॉलर की ऋण सहायता से मंगोलिया में तेल रिफाइनरी परियोजना का निर्माण हो रहा है, जो मंगोलिया की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी। यह भारत की दुनिया में सबसे बड़ी विकास साझेदारी परियोजना है, जिसमें 2,500 से अधिक भारतीय विशेषज्ञ मंगोलियाई समकक्षों के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा, कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देते हुए अटल बिहारी वाजपेयी आईटी उत्कृष्टता केंद्र और भारत–मंगोलिया मैत्री विद्यालय जैसी संस्थाएं मंगोलियाई युवाओं को नए अवसर प्रदान कर रही हैं।

प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि भारत Mongolia के सीमा सुरक्षा बलों के लिए एक नया क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का वैश्विक दृष्टिकोण साझा मूल्यों पर आधारित है और वे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर घनिष्ठ साझेदार के रूप में कार्य कर रहे हैं। दोनों राष्ट्र एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करते हैं तथा वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को सशक्त बनाने के लिए मिलकर प्रयासरत हैं।

पीएम मोदी बोले — “भारत और Mongolia आत्मीय और आध्यात्मिक बंधन में जुड़े हैं”

India will provide free e-visa to Mongolia, capacity building program for border security forces also started

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत–Mongolia के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आत्मीय और आध्यात्मिक बंधन पर आधारित हैं। बौद्ध धर्म के माध्यम से सदियों से दोनों देश एक सूत्र में बंधे हैं, जिसके कारण उन्हें आध्यात्मिक भाई-बहन कहा जाता है। इस परंपरा को सुदृढ़ करने के लिए भारत अगले वर्ष भगवान बुद्ध के दो महान शिष्यों—सारिपुत्र और मौद्गल्यायन—के पवित्र अवशेष मंगोलिया भेजेगा।

साथ ही, गंडांतेगचिनलेन मठ में एक संस्कृत शिक्षक भेजा जाएगा, जो वहाँ बौद्ध ग्रंथों का गहन अध्ययन कर इस परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। इसके अतिरिक्त, दस लाख प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण की परियोजना को भी गति देने का निर्णय लिया गया है। नालंदा विश्वविद्यालय और गंडन मठ को जोड़कर दोनों देशों के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक रिश्तों को नई ऊर्जा देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

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