Jairam Ramesh का आरोप, ISRO के निजीकरण की आक्रामक योजना बना रही Modi सरकार

कांग्रेस सांसद Jairam Ramesh ने सोमवार को केंद्र सरकार पर भारत के स्पेस प्रोग्राम के लिए “आक्रामक निजीकरण एजेंडा” को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने लॉन्च व्हीकल बनाने में ISRO की भविष्य की भूमिका से जुड़ी हालिया खबरों का हवाला दिया।

X पर एक पोस्ट में रमेश ने आरोप लगाया कि ISRO ने दशकों की मेहनत से जो क्षमताएं विकसित की हैं, उन्हें अब निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है।

ISRO की भविष्य की भूमिका पर Jairam Ramesh ने जताई चिंता

कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में हमारे देश के स्पेस प्रोग्राम में ISRO की भविष्य की भूमिका को लेकर खबरें आई हैं। इससे वाजिब चिंताएं पैदा हुई हैं,

क्योंकि विक्रम साराभाई, सतीश धवन, ब्रह्म प्रकाश, यूआर राव, एपीजे अब्दुल कलाम और कई अन्य प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और टेक्नोलॉजिस्ट की दूरदर्शिता, समर्पण और नेतृत्व की बदौलत पिछले छह दशकों में ISRO ने बहुत व्यवस्थित और मेहनत से अपनी क्षमताएं और दक्षता विकसित की है।”

उन्होंने इस कदम की तुलना न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में प्राइवेटाइज़ेशन से की और आरोप लगाया कि रॉकेट बनाने और मैन्युफैक्चरिंग में ISRO की भूमिका को “बहुत कम” किया जा रहा है, जबकि सैटेलाइट से जुड़ी उसकी ज़्यादातर संपत्तियां प्राइवेट कंपनियों को सौंपी जा रही हैं।

रमेश ने कहा, “यह साफ़ है कि न्यूक्लियर एनर्जी की तरह ही, मोदी सरकार का स्पेस प्रोग्राम के लिए भी तेज़ी से प्राइवेटाइज़ेशन करने का एजेंडा है। यह पहल साफ़ तौर पर PM और उनके PMO की तरफ़ से हो रही है। रॉकेट बनाने और मैन्युफैक्चरिंग में ISRO की भूमिका को बहुत कम किया जा रहा है और सैटेलाइट से जुड़ी उसकी ज़्यादातर संपत्तियां पूरी तरह से प्राइवेट कंपनियों को सौंपी जा रही हैं।

तमिलनाडु में बन रहे दूसरे स्पेसपोर्ट को भी एक प्राइवेट कंपनी को सौंपा जाएगा, जिस पर सरकार लगभग 1000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। बदलते हालात को देखते हुए, आंध्र प्रदेश में ऐतिहासिक श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट का भविष्य क्या होगा, यह कोई नहीं कह सकता।”

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Jairam Ramesh बोले- स्पेस स्टार्टअप्स को समर्थन मिले

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद लंबे समय से ISRO की उपलब्धियों को दिखाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही स्पेस स्टार्टअप्स को सपोर्ट मिलना चाहिए, लेकिन ISRO का गला घोंटने या उसे कमज़ोर करने की कोई वजह नहीं है,

जबकि प्राइवेट सेक्टर के साथ उसकी पार्टनरशिप सालों से फायदेमंद रही है। उन्होंने कहा, “ISRO ने भारत का मान बढ़ाया है और प्रधानमंत्री खुद कई बार इसकी उपलब्धियों का श्रेय लेते रहे हैं। स्पेस स्टार्टअप्स को निश्चित रूप से बढ़ावा और सपोर्ट मिलना चाहिए।

लेकिन ISRO, जिसकी प्राइवेट सेक्टर के साथ लंबे समय से फायदेमंद पार्टनरशिप रही है, उसका गला क्यों घोंटा जा रहा है और उसे कमज़ोर क्यों किया जा रहा है? पिछले कुछ महीनों में ISRO के 100-120 अहम प्रोफेशनल्स नौकरी छोड़ चुके हैं,

शायद उन्हें आने वाले हालात का अंदाज़ा हो गया था।” उन्होंने आगे कहा, “यह ध्यान देने वाली बात है कि ISRO के एक जाने-माने पूर्व चेयरमैन, जो प्रधानमंत्री से प्रेरित होकर अक्टूबर 2018 में BJP में शामिल हुए थे,

उन्होंने भी ISRO के प्राइवेटाइजेशन के नए कदम पर गंभीर शंका जताई है।” उन्होंने ISRO के पूर्व चेयरमैन जी. माधवन नायर का ज़िक्र करते हुए पूछा, “बाकी पांच जीवित प्रतिष्ठित चेयरमैन इस अहम मुद्दे पर अपनी बात क्यों नहीं रखते?”

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