India-Russia संबंधों पर Jairam Ramesh का PM Modi पर तंज

कांग्रेस सांसद Jairam Ramesh ने शुक्रवार को कहा कि रूस के साथ भारत के मज़बूत रिश्तों की ऐतिहासिक जड़ें 1950 के दशक से जुड़ी हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ये रिश्ते कई सरकारों के कार्यकाल में बने हैं, न कि सिर्फ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के दौरान।

‘X’ पर एक पोस्ट में रमेश ने भारत के विकास में सोवियत संघ को एक “अमूल्य साझेदार” बताया और कहा कि उसने स्टील, बिजली, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु उद्योगों जैसे अहम क्षेत्रों में योगदान दिया। रमेश ने कहा, “1950 के दशक में शुरू हुए भारत के विकास के सफ़र में सोवियत संघ एक अमूल्य साझेदार रहा है।

इसने हमारे देश के स्टील, भारी इंजीनियरिंग, माइनिंग, बिजली, तेल और गैस, केमिकल, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु उद्योगों को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई।”

उन्होंने जुलाई 1955 में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सोवियत संघ की 16 दिन की यात्रा और उसी साल नवंबर-दिसंबर में सोवियत नेताओं निकोलाई बुल्गानिन और निकिता ख्रुश्चेव की भारत की 20 दिन की यात्रा को याद किया।

Nehru की USSR यात्रा का अहम योगदान

Jairam Ramesh ने कहा, “यह सब जुलाई 1955 में जवाहरलाल नेहरू की USSR की 16 दिन की यात्रा और नवंबर-दिसंबर 1955 में निकोलाई बुल्गानिन और निकिता ख्रुश्चेव की भारत की 20 दिन की वापसी यात्रा से संभव हो पाया था।”

Jairam Ramesh ने भारत-सोवियत शांति, मित्रता और सहयोग संधि का भी ज़िक्र किया, जिस पर दो साल से ज़्यादा समय तक बातचीत के बाद 9 अगस्त 1971 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे।

उन्होंने कहा, “भारत-सोवियत शांति, मित्रता और सहयोग संधि, जिसे तैयार होने में दो साल से ज़्यादा का समय लगा और जिस पर आखिरकार 9 अगस्त 1971 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए, उसका रणनीतिक रूप से बहुत महत्व था।”

Jairam Ramesh ने कहा कि दिसंबर 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद दोनों देशों के संबंधों में कुछ समय के लिए ठहराव आ गया था, लेकिन 1998 में तत्कालीन रूसी प्रधानमंत्री येवगेनी प्रिमाकोव और बाद में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत-रूस संबंधों को नई ऊर्जा के साथ फिर से शुरू किया।

उन्होंने आगे कहा, “दिसंबर 1991 में USSR के टूटने के बाद कुछ समय के लिए ठहराव आया था, लेकिन 1998 में येवगेनी प्रिमाकोव (रूस के पूर्व प्रधानमंत्री) और उसके तुरंत बाद खुद राष्ट्रपति पुतिन ने भारत-रूस के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा के साथ फिर से शुरू किया।” उन्होंने भारत-रूस रक्षा सहयोग में निरंतरता के उदाहरण के तौर पर ब्रह्मोस मिसाइल जॉइंट वेंचर का भी ज़िक्र किया।

उन्होंने कहा, “ब्रह्मोस मिसाइल जॉइंट वेंचर, जिसे तैयार होने में लगभग सात साल लगे, को उन्होंने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर अंतिम रूप दिया और बाद में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में इसका काफी विस्तार किया गया, जिसके तहत नई दिल्ली, हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम में कॉम्प्लेक्स स्थापित किए गए।”

Jairam Ramesh ने आगे कहा, “बात सीधी सी है: श्री मोदी चाहे खुद का कितना भी प्रचार करें, भारत और रूस के बीच मज़बूत संबंधों का एक इतिहास रहा है, जिसकी मज़बूत नींव 1950 से 1980 के दशक के दौरान रखी गई थी।”

कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने यह भी याद दिलाया कि पुतिन से पहले राष्ट्रपति रहे दिमित्री मेदवेदेव ने 22 दिसंबर, 2010 को IIT बॉम्बे का दौरा किया था। उन्होंने कहा कि यह जगह “1963 से 1975 तक मेरी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा रही है।”

PM Modi ने Prince Rahim Aga Khan V से की अहम मुलाकात

India-Russia रिश्तों की पुरानी नींव का जिक्र

उन्होंने कहा, “दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रपति पुतिन से पहले राष्ट्रपति रहे दिमित्री मेदवेदेव ने 22 दिसंबर, 2010 को IIT बॉम्बे का दौरा किया था और कुछ मिनट उन बुनियादों के उस प्रतीक को देखने में बिताए थे, जो लगभग आधी सदी पहले बनी थीं, लेकिन अब पूरी तरह भुला दी गई हैं।”

Jairam Ramesh ने कैंपस में PC सक्सेना लेक्चर थिएटर के ठीक बगल वाली उस जगह की एक तस्वीर भी शेयर की।उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब भारत और रूस अपने आपसी आर्थिक संबंधों को और मज़बूत कर रहे हैं।

इससे पहले, केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के पहले उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव से मुलाकात की।

दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की और निवेश के प्रवाह तथा आर्थिक संबंधों को बढ़ाने के लिए आपसी फ़ायदे वाला ढांचा तैयार करने के मकसद से द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर बातचीत को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले नई दिल्ली पहुंचे हैं और आज ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। भारत अपनी 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 12-13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है।

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