KC Venugopal का Amit Shah पर हमला, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर मांगा जवाब

लोकसभा सांसद KC Venugopal ने सोमवार को छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र पर विपक्ष के हमले को और तेज़ कर दिया।

उन्होंने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में आकर दिल्ली में पैलेट गन और बिहार में परीक्षा में गड़बड़ी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान AK-47 के कथित इस्तेमाल के बारे में सफाई दें।संसद में विपक्ष के लगातार विरोध-प्रदर्शन के बीच KC Venugopal ने बहस के दौरान गृह मंत्री की गैर-मौजूदगी पर सवाल उठाए।

KC Venugopal ने कहा, “किरेन रिजिजू हमारी पार्टी के नेता नहीं हैं। वह भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। कैसी सरकार? अभी भारत सरकार बिहार में छात्रों के खिलाफ AK-47 और दिल्ली में छात्रों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल कर रही है।

KC Venugopal ने Amit Shah से क्या जवाब मांगा?

यही सरकार वहां बैठी है। वह उसी सरकार के प्रतिनिधि हैं। उनकी परवाह कौन करता है? हमारी मांग बहुत साफ है: गृह मंत्री कहां हैं? वह कहां छिपे हैं? इसका जवाब मिलना चाहिए! उन्हें लोकसभा में आकर बताना होगा कि बिहार में AK-47 और दिल्ली में पैलेट गन का आदेश किसने दिया! उन्हें जवाब देना होगा!… लोग सोच रहे हैं कि इन सभी अत्याचारों के लिए वही अकेले जिम्मेदार हैं।”


कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी निहत्थे प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कथित तौर पर बल प्रयोग पर सवाल उठाए और तर्क दिया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।

तिवारी ने कहा, “मुख्य बात यह है: क्या निहत्थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन और AK-47 का इस्तेमाल करना सही है? इसका सीधा जवाब है कि यह बिल्कुल गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तय किया है।

हालांकि, जिस तरह से निहत्थे छात्रों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और बिहार से जो वीडियो सामने आए हैं जिनमें एक कॉन्स्टेबल AK-47 लिए हुए दिख रहा है, वह सरासर बर्बरता है। यह अमानवीय और ज्यादती भरा काम है।”

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तिवारी ने Exam Bill को लेकर क्या कहा?



तिवारी ने ‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ की आलोचना करते हुए इसे “बैंड-एड” जैसा (ऊपरी या कामचलाऊ) समाधान बताया।


उन्होंने कहा, “अगर सरकार गंभीर होती, तो वह भारत के शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक कानून लाती। यह बिल तो बस पुलिस की हिंसा के बाद लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए लाया गया है। इस बिल में कुछ भी खास नहीं है।”

यह टिप्पणी तब आई जब केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया। इस दौरान विपक्ष के सदस्यों ने ज़ोर-शोर से नारेबाज़ी की, जिसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

इस बिल का मकसद पेपर लीक के खिलाफ कानूनी ढांचे को मजबूत करना है। इसके लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट, तय समय-सीमा में जांच और सुनवाई, कड़ी सजा, स्पेशल टास्क फोर्स और स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर जैसे उपाय किए जाएंगे

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