Kiriteswari मंदिर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्थित एक प्राचीन शक्तिपीठ है, जहाँ देवी सती का मुकुट (किरीट) गिरा था। यह मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है और इसे मुक्तकंठा काली मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
Kiriteswari मंदिर की स्थापत्य कला पारंपरिक बंगाली शैली में निर्मित है और यहाँ देवी की मूर्ति के स्थान पर एक पवित्र पत्थर की पूजा की जाती है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा और काली पूजा जैसे त्योहारों के दौरान यहाँ विशेष अनुष्ठान होते हैं। इस मंदिर में देवी की आराधना से भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होने का विश्वास किया जाता है।
सामग्री की तालिका
किरीटेश्वरी मंदिर: शक्ति उपासना का प्राचीन केंद्र
Kiriteswari भारत की भूमि पर देवी शक्ति के कई पवित्र स्थल हैं, जिन्हें शक्तिपीठों के रूप में पूजा जाता है। पश्चिम बंगाल में स्थित Kiriteswari मंदिर भी इन्हीं शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर देवी सती के किरीट (मुकुट) के गिरने के स्थान पर बना है, इसलिए इसे Kiriteswari देवी मंदिर कहा जाता है। इस मंदिर का उल्लेख पुराणों और तांत्रिक ग्रंथों में मिलता है और इसे मुक्तकंठा काली मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
श्रद्धालु यहाँ माँ के दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं और विशेष रूप से नवरात्रि और दुर्गा पूजा के अवसर पर यहाँ भक्तों की भीड़ उमड़ती है।आइए, Kiriteswari पवित्र मंदिर के इतिहास, वास्तुकला, धार्मिक महत्ता, त्योहार और रोचक तथ्यों पर विस्तार से चर्चा करें।
1. किरीटेश्वरी मंदिर का इतिहास
Dakshineswar Kali: माँ काली का पावन धाम
1.1 शक्तिपीठ का पौराणिक महत्व
- Kiriteswari मंदिर उन 51 शक्तिपीठों में से एक है, जो देवी सती के अंगों के गिरने से बने थे।
- पौराणिक कथा के अनुसार, जब राजा दक्ष द्वारा किए गए यज्ञ में माता सती ने अपने प्राण त्याग दिए, तो भगवान शिव ने उनके शरीर को उठाकर तांडव नृत्य किया।
- इस दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया और वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।
- इस मंदिर में देवी सती का किरीट (मुकुट) गिरा था, जिससे इसे किरीटेश्वरी मंदिर कहा जाता है।
1.2 मंदिर का ऐतिहासिक निर्माण
- Kiriteswari मंदिर का प्राचीन निर्माण 16वीं शताब्दी में महाराजा धर्म नारायण ने करवाया था।
- यह मंदिर मुरारई, मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल) के जियागंज इलाके में स्थित है।
- कहा जाता है कि यह मंदिर कई बार नष्ट हुआ और फिर से पुनर्निर्माण किया गया।
- वर्तमान संरचना 18वीं शताब्दी में नवनिर्मित की गई थी।
2. मंदिर की वास्तुकला
2.1 बंगाली स्थापत्य शैली
- Kiriteswari मंदिर की वास्तुकला पारंपरिक बंगाली शैली में निर्मित है।
- इसका मुख्य शिखर (गर्भगृह) अष्टकोणीय आकार में बना हुआ है।
- मंदिर के ऊपर त्रिकोणीय गुंबदनुमा छत इसे विशिष्ट बनाती है।
- मंदिर में अद्भुत नक्काशी और देवी की भव्य मूर्ति स्थापित है।
2.2 मंदिर परिसर और अन्य संरचनाएँ
- Kiriteswari मंदिर परिसर में एक प्राचीन पीपल का वृक्ष है, जिसे भक्त विशेष रूप से पूजते हैं।
- पास में एक पवित्र तालाब स्थित है, जिसका जल धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग किया जाता है।
- मंदिर के पास एक भव्य नंदी की प्रतिमा भी स्थापित है, जो भगवान शिव की उपस्थिति का प्रतीक है।
3. किरीटेश्वरी मंदिर का धार्मिक महत्व
- Kiriteswari मंदिर सिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहाँ माता की पूजा से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
- यहाँ देवी सती को “किरटीश्वरी” या “मुक्तकंठा देवी” के रूप में पूजा जाता है।
- देवी की पूजा तांत्रिक साधना के लिए भी प्रसिद्ध है, क्योंकि यह स्थान शक्ति और तंत्र-साधना का प्रमुख केंद्र है।
- यहाँ माता की आराधना करने से संतान सुख, विवाह में सफलता और धन-संपत्ति की प्राप्ति मानी जाती है।
4. प्रमुख त्योहार और उत्सव
4.1 दुर्गा पूजा
- Kiriteswari मंदिर दुर्गा पूजा के दौरान विशेष रूप से भक्तों से भरा रहता है।
- इस दौरान विशेष हवन, आरती और भोग प्रसाद का आयोजन किया जाता है।
4.2 नवरात्रि महोत्सव
- नवरात्रि में माँ किरीटेश्वरी की विशेष आराधना और अनुष्ठान होते हैं।
- देवी के नौ रूपों की पूजा होती है और भक्त जागर (रात्रि जागरण) का आयोजन करते हैं।
4.3 अमावस्या और पूर्णिमा पूजन
- हर अमावस्या और पूर्णिमा के दिन यहाँ विशेष पूजा होती है।
- इस दिन शक्तिपीठ पर दीपदान किया जाता है, जिससे समस्त कष्ट दूर होते हैं।
4.4 काली पूजा
- K iriteswariमंदिर काली पूजा के लिए भी प्रसिद्ध है, क्योंकि यहाँ देवी शक्ति के उग्र रूप की उपासना की जाती है।
- इस दिन भक्त विशेष रूप से रक्त चंदन और नीम के पत्तों से माँ की पूजा करते हैं।
5. किरीटेश्वरी मंदिर जाने का सही समय और यात्रा मार्ग
Dilwara Temple: स्थापत्य कला और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम
5.1 यात्रा मार्ग
- निकटतम रेलवे स्टेशन: जियागंज रेलवे स्टेशन (8 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा: नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, कोलकाता (200 किमी)
- सड़क मार्ग: मुर्शिदाबाद और जियागंज से मंदिर तक टैक्सी और बस सेवा उपलब्ध है।
5.2 दर्शन का समय
- सुबह: 6:00 बजे से 12:00 बजे तक
- शाम: 4:00 बजे से 8:30 बजे तक
6. किरीटेश्वरी मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य
- देवी की कोई भौतिक मूर्ति नहीं – इस मंदिर में देवी किरीटेश्वरी की कोई प्रतिमा नहीं है, बल्कि एक पवित्र पत्थर को देवी का स्वरूप माना जाता है।
- शक्तिपीठों में विशेष स्थान – यह मंदिर उन ऐतिहासिक शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ माँ सती का मुकुट गिरा था।
- तांत्रिक साधकों के लिए विशेष स्थान – यह स्थान तांत्रिकों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।
- मंदिर का पुनर्निर्माण कई बार हुआ – किरीटेश्वरी मंदिर का कई बार पुनर्निर्माण किया गया, लेकिन इसके पवित्र स्थान को कभी नहीं बदला गया।
- मंदिर का रहस्यमयी वातावरण – यहाँ आने वाले भक्तों का मानना है कि वे किसी अलौकिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
7. निष्कर्ष:
Kiriteswari मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शक्ति की उपासना का प्रमुख केंद्र है। यहाँ आने वाले भक्तों को देवी माँ का आशीर्वाद, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यदि आप शक्तिपीठों की यात्रा पर हैं, तो किरीटेश्वरी देवी के दर्शन अवश्य करें और माँ किरीटेश्वरी का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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