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Ghaziabad: लोनी में एक घर में भीषण आग लगने से चार की मौत

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Ghaziabad: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में आज एक घर के अंदर भीषण आग लग गई। आग लगने की घटना रविवार (19 जनवरी) को लोनी की कंचन पार्क कॉलोनी में हुई। जलने और धुएं से दम घुटने से तीन बच्चों और एक महिला की मौत हो गई।

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घायल लोगों को Ghaziabad के अस्पताल में भर्ती कराया गया

घर में कुल आठ लोग थे। अन्य लोगों को बचा लिया गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस संबंध में अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है।

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पुलिस को संदेह है कि Saif पर हमला करने वाला बांग्लादेशी है, 5 महीने पहले मुंबई आया था

मुंबई: अभिनेता Saif Ali Khan के मुंबई स्थित घर में घुसकर अभिनेता पर छह बार चाकू से हमला करने वाला चोर बांग्लादेशी नागरिक हो सकता है, जो कुछ महीने पहले अवैध रूप से भारत में घुसा था, मुंबई पुलिस ने कहा है।

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आज सुबह मीडिया से बात करते हुए पुलिस उपायुक्त दीक्षित गेदाम ने कहा कि उन्होंने बुधवार देर रात अभिनेता के बांद्रा स्थित घर में चोरी के प्रयास के सिलसिले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि आरोपी की पहचान मोहम्मद सरीफुल इस्लाम शहजाद के रूप में हुई है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “जांच से पता चला है कि यह आरोपी बांग्लादेश का हो सकता है। उसके पास कोई भारतीय दस्तावेज नहीं है।

Cops Suspect Saif Attacker Is Bangladeshi

हमें संदेह है कि वह बांग्लादेश का है, हम जांच कर रहे हैं और उसके खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम की धाराएं भी दर्ज की गई हैं।” उन्होंने कहा कि आरोपी अभिनेता Saif Ali Khan के घर में डकैती करने के लिए घुसा था। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमने उसके पास से कुछ सामान बरामद किया है, जिससे पता चलता है कि वह बांग्लादेश से है। वह अवैध रूप से भारत आया था और उसने अपना नाम बदलकर बिजॉय दास रख लिया था। वह करीब चार महीने से मुंबई में रह रहा है और एक हाउसकीपिंग एजेंसी में काम कर रहा था।” श्री गेदम ने कहा कि आरोपी को ठाणे से गिरफ्तार किया गया है और अब उससे पूछताछ की जा रही है।

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घुसपैठिया अभिनेता Saif Ali Khan के घर के पीछे के फायर एग्जिट से घुसने में कामयाब हो गया था। उनकी नौकरानी ने उसे देखा और चिल्लाई। जब श्री खान ने उसका सामना किया, तो हमलावर ने उन पर छह बार चाकू से वार किया और भाग गया। अभिनेता को पास के लीलावती अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने कहा है कि वह ठीक हो रहा है। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य के आधार पर आरोपी को हिरासत में ले लिया है।

Saif पर हमला करने वाले आरोपी

Cops Suspect Saif Attacker Is Bangladeshi

आरोपी का नाम शरीफुल इस्लाम शहजाद है और वह बांग्लादेशी नागरिक है,” पुलिस के एक बयान में कहा गया है कि आरोपी पर भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने से संबंधित धाराओं के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। लोकप्रिय अभिनेता पर हुए हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है और शहर में कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष से लेकर सिनेमा जगत के कई प्रमुख लोगों ने देवेंद्र फडणवीस सरकार से सवाल किया है कि अगर मशहूर हस्तियों पर इस तरह से हमला किया जा सकता है तो आम लोग कितने सुरक्षित हैं। आलोचनाओं से घिरे मुख्यमंत्री ने कहा, “देश के सभी महानगरों में से मुंबई सबसे सुरक्षित है।

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यह सच है कि कभी-कभी कुछ घटनाएं होती हैं और उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए, लेकिन एक घटना के आधार पर यह कहना कि मुंबई असुरक्षित है, सही नहीं होगा। इससे मुंबई की छवि खराब होती है। लेकिन सरकार मुंबई को और भी सुरक्षित बनाने के लिए काम कर रही है।”

Sun Temple, ओडिशा: भारतीय वास्तुकला और सांस्कृतिक धरोहर का अद्भुत चमत्कार

Sun Temple, ओडिशा भारतीय संस्कृति और वास्तुकला का अनमोल धरोहर है। इसे कलिंग शैली में रथ के रूप में निर्मित किया गया है, जो सूर्य देव की दिव्यता और शक्ति का प्रतीक है। मंदिर के 12 पहिए वर्ष के 12 महीनों और 7 घोड़े सप्ताह के 7 दिनों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

Sun Temple की दीवारों पर देवी-देवताओं, नर्तकों, संगीतकारों और जीवन के विविध पहलुओं की अद्भुत नक्काशी की गई है। माना जाता है कि इसके पहियों को प्राचीन समय में धूप घड़ी के रूप में भी उपयोग किया जाता था।

इतिहास में यह मंदिर प्राकृतिक आपदाओं और आक्रमणों से क्षतिग्रस्त हुआ, लेकिन आज भी इसकी संरचना और महिमा पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करती है। कोणार्क नृत्य महोत्सव और इसकी विश्व धरोहर स्थल की मान्यता इसे भारतीय संस्कृति का गौरव बनाती है।

सूर्य मंदिर, ओडिशा: एक अद्भुत वास्तुशिल्पीय चमत्कार

Sun Temple, Odisha: Indian Architecture

Sun Temple (कोणार्क मंदिर) ओडिशा के पुरी जिले में चंद्रभागा नदी के किनारे स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर है। यह मंदिर अपनी अद्वितीय वास्तुकला, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक धरोहर के लिए जाना जाता है। यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है। इसे 13वीं सदी में गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने बनवाया था। यह मंदिर सूर्य देव को समर्पित है, जो भारतीय पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं में ऊर्जा और जीवन के स्रोत के रूप में पूजनीय हैं।

इतिहास

कोणार्क का Sun Temple 1250 ईस्वी में बनाया गया था। इसे राजा नरसिंहदेव प्रथम ने बनवाया, जो गंग वंश के शासक थे। इस मंदिर को बनाने का उद्देश्य सूर्य देव को सम्मानित करना और उनकी कृपा से राज्य की उन्नति सुनिश्चित करना था। प्राचीन ग्रंथों और किंवदंतियों के अनुसार, इस मंदिर को बनाने में 12 साल लगे और इसमें 1200 शिल्पकारों ने काम किया।

मंदिर का नाम ‘कोणार्क’ दो शब्दों से बना है: ‘कोण’ (कोना) और ‘अर्क’ (सूर्य)। इसका अर्थ है ‘सूर्य का कोणीय मंदिर’। यह मंदिर सूर्य देव की तीन अवस्थाओं – उदय, मध्याह्न और अस्त के प्रतीक के रूप में निर्मित है।

वास्तुकला

Sun Temple अपनी अद्वितीय वास्तुकला और सुंदर शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है। इसे रथ (रथ) के आकार में बनाया गया है, जिसमें 12 विशाल पहिए और सात घोड़े हैं।

1. रथ के प्रतीक

Sun Temple, Odisha: Indian Architecture

Sun Temple को एक विशाल रथ के रूप में डिजाइन किया गया है, जो सूर्य देव का प्रतीक है।

  • 12 पहिए: ये साल के 12 महीनों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • प्रत्येक पहिया: इनमें 8 प्रवक्ता (स्पोक्स) होते हैं, जो दिन के 8 पहरों का प्रतीक हैं।
  • घोड़े: सात घोड़े सप्ताह के सात दिनों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

2. शिल्पकला और नक्काशी

Sun Temple की दीवारों पर अद्भुत नक्काशी की गई है। इनमें देवी-देवताओं, नर्तकों, संगीतकारों, पशु-पक्षियों और जीवन के विभिन्न पहलुओं के दृश्य दिखाए गए हैं।

3. वास्तुशिल्पीय शैली

Sun Temple को ‘कलिंग शैली’ में बनाया गया है। इसकी मुख्य विशेषताएं हैं:

  • देउल (मुख्य मंदिर): Sun Temple का मुख्य भाग है, जिसमें सूर्य देव की मूर्ति स्थापित थी।
  • जगमोहन (प्रवेश मंडप): यह सभा के लिए उपयोग होने वाला स्थान है।
  • नाट्यमंडप: नृत्य और संगीत कार्यक्रमों के लिए बनाया गया स्थान।

धार्मिक महत्व

Sun Temple भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में सूर्य देव की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

  1. सूर्य उपासना: हिंदू धर्म में सूर्य को ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन का स्रोत माना जाता है।
  2. चमत्कारी प्रभाव: मान्यता है कि यहां सूर्य उपासना करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं ठीक होती हैं।
  3. मकर संक्रांति: इस दिन सूर्य पूजा का विशेष महत्व है।

मंदिर के विनाश और पुनरुद्धार

Sun Temple, Odisha: Indian Architecture

विनाश

16वीं सदी में, मुगलों के आक्रमण और प्राकृतिक आपदाओं के कारण मंदिर को भारी क्षति पहुंची। मुख्य गर्भगृह और कई हिस्से समय के साथ ढह गए।

पुनरुद्धार प्रयास

  • ब्रिटिश काल में Sun Temple की मरम्मत और संरक्षण के प्रयास शुरू हुए।
  • 1984 में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।

किंवदंतियां और रहस्य

चुंबकीय पत्थर

माना जाता है कि Sun Temple के शिखर पर एक विशाल चुंबकीय पत्थर रखा गया था, जो मंदिर की संरचना को संतुलन में रखता था।

धूप घड़ी

Sun Temple के पहियों का उपयोग समय बताने के लिए किया जाता था। ये पहिए सूर्य की छाया के आधार पर सटीक समय का संकेत देते थे।

आधुनिक युग में महत्व

पर्यटन स्थल

कोणार्क का Sun Temple एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। हर साल लाखों पर्यटक इसे देखने आते हैं।

कोणार्क नृत्य महोत्सव

हर साल यहां ‘कोणार्क नृत्य महोत्सव’ का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश के कलाकार शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत करते हैं।

भारतीय संस्कृति में स्थान

Sun Temple, Odisha: Indian Architecture

Sun Temple भारतीय डाक टिकट, मुद्राओं और कला में एक प्रमुख प्रतीक है।

Dilwara Temple: स्थापत्य कला और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम

निष्कर्ष

कोणार्क का Sun Temple भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति का अनमोल धरोहर है। यह न केवल भारतीय वास्तुकला की उत्कृष्टता को दर्शाता है, बल्कि यह हमारे प्राचीन वैज्ञानिक और ज्योतिषीय ज्ञान का भी प्रमाण है। इस मंदिर का दौरा हर भारतीय को अवश्य करना चाहिए, ताकि वे अपनी समृद्ध विरासत को समझ सकें और उससे प्रेरणा ले सकें।

Sun Temple, जिसे कोणार्क मंदिर भी कहा जाता है, ओडिशा के पुरी जिले में स्थित है। यह 13वीं सदी में गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम द्वारा बनवाया गया था और सूर्य देव को समर्पित है। इस मंदिर को रथ के आकार में डिजाइन किया गया है, जिसमें 12 विशाल पहिए और सात घोड़े हैं, जो समय और जीवन चक्र का प्रतीक हैं। अपनी अद्भुत शिल्पकला, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक धरोहर के कारण इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया है। मंदिर की दीवारों पर सुंदर नक्काशी और मूर्तियां इसे वास्तुकला का बेजोड़ नमूना बनाती हैं।

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ओडिशा का Jagannath Temple: भव्यता, चमत्कार और आस्था का प्रतीक

Jagannath Temple भारत के ओडिशा राज्य के पुरी शहर में स्थित एक प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित है। इसे ‘चार धाम’ तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है। Jagannath Temple का निर्माण 12वीं शताब्दी में गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंगदेव ने करवाया था। इसकी स्थापत्य कला, धार्मिक महत्त्व और रथ यात्रा जैसे पर्व इसे दुनिया भर में प्रसिद्ध बनाते हैं।

जगन्नाथ मंदिर, ओडिशा का परिचय

Odisha's Jagannath Temple: The Magnificence, the Marvel

जगन्नाथ मंदिर का इतिहास

Jagannath Temple का इतिहास हजारों साल पुराना है। प्राचीन पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने यहां स्वयं प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए थे। इसके अलावा, पुराणों में उल्लेख मिलता है कि राजा इन्द्रद्युम्न ने विष्णु की प्रेरणा से इस मंदिर का निर्माण किया।
वर्तमान मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था। गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंगदेव ने इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया। उनके बाद गजपति राजाओं ने मंदिर का विस्तार किया और इसे एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में स्थापित किया।

मंदिर की वास्तुकला

Jagannath Temple का स्थापत्य कला-कौशल अद्वितीय है। यह मंदिर उत्कल शैली की वास्तुकला में बना है।

  1. मंदिर के मुख्य भाग:
    • गरुड़ स्तंभ: Jagannath Temple के प्रवेश द्वार पर स्थित यह स्तंभ अत्यधिक पवित्र माना जाता है।
    • सिंहद्वार: मुख्य प्रवेश द्वार के ऊपर पत्थर के दो सिंहों की मूर्तियां हैं।
    • शिखर: मुख्य मंदिर का शिखर 214 फीट ऊंचा है, जिस पर भगवान विष्णु का ध्वज ‘नीलचक्र’ लहराता है।
    • गरभगृह: यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां स्थापित हैं।
  2. मूर्ति निर्माण की विशेषता:
    भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां काठ की बनी होती हैं। ये मूर्तियां हर 12-19 वर्षों में नवकलेवर उत्सव के दौरान बदली जाती हैं। इस प्रक्रिया में, मूर्तियों को विशेष नीम की लकड़ी से तैयार किया जाता है।

जगन्नाथ मंदिर के अनूठे तथ्य

  1. ध्वज की विशेषता:
    Jagannath Temple के शिखर पर लहराने वाला ध्वज हवा के विपरीत दिशा में फहरता है। यह वैज्ञानिक रूप से अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।
  2. नीलचक्र:
    Jagannath Temple के शिखर पर लगा नीलचक्र भगवान विष्णु का प्रतीक है। इसे देखने मात्र से भक्त पवित्र हो जाते हैं।
  3. सर्वोच्च शिखर:
    Jagannath Temple के शिखर पर से कोई भी पक्षी या विमान उड़ते हुए नहीं दिखते। इसे भगवान की शक्ति का चमत्कार माना जाता है।
  4. प्रसाद (महाप्रसाद):
    Jagannath Temple में प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाने वाले महाप्रसाद की मात्रा हर दिन अलग-अलग होती है, लेकिन यह कभी खत्म नहीं होता। यह प्रसाद मिट्टी के बर्तनों में पकाया जाता है।

रथ यात्रा: मंदिर का सबसे बड़ा पर्व

Odisha's Jagannath Temple: The Magnificence, the Marvel

Jagannath Temple का सबसे प्रसिद्ध त्योहार रथ यात्रा है। इसे गुंडिचा यात्रा या कार उत्सव भी कहा जाता है।

  1. तिथि और महत्व:
    यह आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आयोजित की जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को भव्य रथों पर सवार कर गुंडिचा मंदिर ले जाया जाता है।
  2. रथ निर्माण:
    • रथ लकड़ी से बने होते हैं।
    • भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम ‘नंदीघोष’ है, बलभद्र के रथ को ‘तालध्वज’ और सुभद्रा के रथ को ‘दर्पदलन’ कहते हैं।
  3. भक्तों का उत्साह:
    इस पर्व में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं और रथ को खींचकर पुण्य अर्जित करते हैं।

धार्मिक महत्व

Jagannath Temple को वैष्णव धर्म का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

  1. चार धाम यात्रा:
    यह बद्रीनाथ, द्वारका और रामेश्वरम के साथ चार धाम में शामिल है।
  2. मोक्ष प्राप्ति का स्थान:
    ऐसी मान्यता है कि यहां दर्शन करने से जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  3. सर्वधर्म समभाव:
    यह मंदिर हिंदू धर्म के विभिन्न संप्रदायों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है।

नवकलेवर उत्सव

नवकलेवर भगवान जगन्नाथ के मूर्तियों को बदलने की अनोखी प्रक्रिया है।

  • हर 12-19 वर्षों में एक बार यह उत्सव मनाया जाता है।
  • नई मूर्तियों को बनाते समय विशेष प्रकार की नीम की लकड़ी (दरु) का उपयोग किया जाता है।
  • इस प्रक्रिया में पुरानी मूर्तियों को एक गुप्त स्थान पर समाधि दी जाती है।
Odisha's Jagannath Temple: The Magnificence, the Marvel

मंदिर से जुड़े चमत्कार

  1. ध्वज और नीलचक्र का रहस्य:
    Jagannath Temple का ध्वज हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराता है, और नीलचक्र हर कोण से समान दिखाई देता है।
  2. ध्वनि विज्ञान:
    Jagannath Temple के मुख्य गुंबद की छाया दिन के किसी भी समय जमीन पर नहीं गिरती।
  3. भोजन का रहस्य:
    महाप्रसाद तैयार करते समय एक के ऊपर एक 7 मिट्टी के बर्तन रखे जाते हैं। आश्चर्यजनक रूप से सबसे ऊपर रखा बर्तन पहले पकता है।

आधुनिक प्रबंधन और प्रशासन

Jagannath Temple का प्रबंधन ओडिशा सरकार द्वारा गठित ‘श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन’ द्वारा किया जाता है। मंदिर की देखरेख के लिए गजपति महाराजा, पुजारी और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर कार्य करते हैं।

भविष्य के लिए योजनाएं

मंदिर प्रबंधन ने डिजिटल सुविधा, पर्यावरण संरक्षण और भक्तों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं बनाई हैं।

  • ऑनलाइन दर्शन और दान की सुविधा।
  • रथ यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम।

जगन्नाथ मंदिर के आसपास के दर्शनीय स्थल

Dilwara Temple: स्थापत्य कला और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम

  1. गुंडिचा मंदिर:
    यह स्थान रथ यात्रा का मुख्य पड़ाव है।
  2. स्वर्गद्वार:
    यह पुरी का प्रसिद्ध श्मशान स्थल है।
  3. पुरी समुद्र तट:
    मंदिर के पास स्थित यह समुद्र तट पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

समापन

Odisha's Jagannath Temple: The Magnificence, the Marvel

जगन्नाथ मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं का अद्भुत उदाहरण भी है। इसकी भव्यता, पवित्रता और चमत्कार हर भक्त को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। यहां की रथ यात्रा और नवकलेवर उत्सव जैसे पर्व इसे और भी विशेष बनाते हैं। भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं और वह ईश्वर की कृपा प्राप्त करता है।

जगन्नाथ मंदिर ओडिशा के पुरी में स्थित एक प्राचीन और पवित्र हिन्दू मंदिर है, जो भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को समर्पित है। यह मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला, धार्मिक महत्व और प्रसिद्ध रथ यात्रा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। 12वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर वैष्णव धर्म का प्रमुख केंद्र है और चार धाम यात्रा का हिस्सा है। इसकी अनूठी परंपराएं, चमत्कारिक विशेषताएं और महाप्रसाद की दिव्यता इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक बनाती हैं।

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Sambhal पुलिस ने फर्जी बीमा पॉलिसी गिरोह का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

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उत्तर प्रदेश के Sambhal जिले में रजपुरा थाना पुलिस ने पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार के निर्देशन में एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने फर्जी बीमा पॉलिसी बनाने वाले एक अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से निम्न वस्तुएं बरामद की गई हैं:

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Sambhal में फर्जी बीमा पॉलिसी बनाने वाले एक अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

Fake insurance policy maker exposed in Sambhal
  • 19 डेबिट और क्रेडिट कार्ड
  • तीन आईडी और एक पैन कार्ड
  • चार मोबाइल फोन
  • एक स्कॉर्पियो कार
  • ₹11,45,000 नकद

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यह गिरोह फर्जी बीमा पॉलिसी के जरिए लोगों को ठगने का काम करता था। पुलिस की इस कार्रवाई से एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है और जनता को राहत मिली है। मामले की जांच जारी है, और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।

Milk में हल्दी, काली मिर्च मिलाकर पीने से दूर होंगी ये 5 स्वास्थ्य समस्याएं

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Milk पीना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसमें कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। दूध पीने से न केवल शरीर को ऊर्जा मिलती है बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। यही कारण है कि डॉक्टर बच्चों और बुजुर्गों को रोजाना एक गिलास दूध पीने की सलाह देते हैं। क्या आप जानते हैं हल्दी और काली मिर्च वाला दूध पीने के फायदे?

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जी हां, आयुर्वेद में हल्दी और काली मिर्च वाला दूध पीने के कई अद्भुत फायदे बताए गए हैं। इसके सेवन से शरीर की कई समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है और इसके नियमित सेवन से सर्दी-खांसी से लेकर कई गंभीर समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। तो आइए जानते हैं दूध में हल्दी और काली मिर्च मिलाकर पीने से होने वाले फायदों के बारे में विस्तार से।

Milk में हल्दी, काली मिर्च मिलाकर पीने से दूर होंगी ये समस्याएं


These 5 health problems will be cured by drinking milk mixed with turmeric and black pepper

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं

Milk में हल्दी और काली मिर्च मिलाकर पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके नियमित सेवन से कई तरह के संक्रमण और बीमारियों से बचा जा सकता है।

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पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है

हल्दी और काली मिर्च वाला दूध पेट और पाचन तंत्र के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह पेट में पाचन एंजाइमों के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे भोजन जल्दी पचने में मदद मिलती है। इसके नियमित सेवन से सूजन, गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है।


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सर्दी-खांसी से राहत

दूध में हल्दी और काली मिर्च मिलाकर पीने से सर्दी-खांसी से जल्द राहत मिल सकती है। साथ ही, यह गले की खराश से भी राहत दिला सकता है। अगर आप बदलते मौसम में बार-बार होने वाली सर्दी-खांसी से परेशान हैं तो एक गिलास गर्म Milk में एक चुटकी हल्दी और काली मिर्च पाउडर मिलाकर पिएं।

दर्द और सूजन से राहत दिलाता है

शरीर में दर्द और सूजन से छुटकारा पाने के लिए आप दूध में हल्दी और काली मिर्च डालकर पी सकते हैं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इसके नियमित सेवन से जोड़ों के दर्द, गठिया और शरीर के अन्य दर्द से राहत मिल सकती है।

Dates: रात में दूध के साथ खजूर के फायदे

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मधुमेह में फायदेमंद

दूध में हल्दी और काली मिर्च मिलाकर पीने से डायबिटीज के मरीजों को काफी फायदा मिल सकता है। इसके सेवन से ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है. यह इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से मधुमेह के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

Champions Trophy के लिए भारतीय टीम की घोषणा, Rohit Sharma करेंगे कप्तानी

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बीसीसीआई ने आईसीसी Champions Trophy और इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला के लिए 15 सदस्यीय टीम की घोषणा की, मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर और कप्तान रोहित शर्मा ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की।

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रोहित शर्मा टीम का नेतृत्व करेंगे और शुबमन गिल उनके डिप्टी होंगे, जबकि जसप्रित बुमरा को फिटनेस के आधार पर चुना गया था क्योंकि अगरकर ने आईसीसी इवेंट के लिए 14 सदस्यीय टीम का चयन किया था, जिसमें हर्षित राणा भारत के टेस्ट के लिए कवर करने के लिए तैयार थे। इंग्लैंड श्रृंखला के लिए उप-कप्तान।

शेष टीम परिचित तर्ज पर थी, जिसमें यशस्वी जयसवाल को पहली बार एकदिवसीय टीम में शामिल किया गया था और कुलदीप यादव, जो अपने पुनर्वास के बीच में हैं, को भी 15-मजबूत टीम में शामिल किया गया था। मोहम्मद शमी, अर्शदीप सिंह और बुमराह तेज गेंदबाजी आक्रमण का जिम्मा संभालेंगे, जबकि मोहम्मद सिराज उल्लेखनीय रूप से गायब हैं।

बुमराह का चयन फिटनेस पर निर्भर

Indian team announced for Champions Trophy, Rohit Sharma will captain
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कप्तान रोहित शर्मा ने उल्लेख किया कि अगर बुमराह चूक जाते हैं, तो अर्शदीप को नई गेंद के साथ उस भूमिका में इस्तेमाल किया जाएगा और डेथ ओवरों में शमी शुरुआत में उनके साथ साझेदारी करेंगे और इसलिए, मोहम्मद सिराज की प्रभावशीलता थोड़ी कम हो जाती है। स्पिन विभाग में, रवींद्र जड़ेजा और अक्षर पटेल दोनों को चुना गया है, भले ही वे उसी स्थान के लिए लड़ रहे हों, जबकि वाशिंगटन सुंदर और कुलदीप अन्य विकल्प हैं।

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ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने के बाद हर्षित ने अभी तक भारत के लिए सफेद गेंद से क्रिकेट नहीं खेला है, लेकिन चूंकि वह टी20 सीरीज का भी हिस्सा हैं, इसलिए दिल्ली के लंबे तेज गेंदबाज को उच्चतम स्तर पर छोटे प्रारूपों का पहला अनुभव मिलने की संभावना है। जिसे देखते हुए उन्हें वनडे में भी मौका मिल सकता है

मध्य क्रम में केएल राहुल, विराट कोहली और श्रेयस अय्यर की तिकड़ी को बरकरार रखा गया है, जिसमें ऋषभ पंत को बैकअप विकेटकीपर और हार्दिक, जड़ेजा, अक्षर और सुंदर को ऑलराउंडर बनाया गया है। यह विश्व कप 2023 टीम के समान ही टीम है, लेकिन टीम अक्षर और जयसवाल जैसे खिलाड़ियों के लिए जगह कैसे बनाती है, यह दिलचस्प होगा।

Champions Trophy 2025 के लिए भारतीय टीम

Indian team announced for Champions Trophy, Rohit Sharma will captain
Champions Trophy के लिए भारतीय टीम की घोषणा, Rohit Sharma करेंगे कप्तानी

चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भारत की टीम: रोहित शर्मा (कप्तान), शुबमन गिल (उप-कप्तान), विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल (विकेटकीपर), हार्दिक पंड्या, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), अर्शदीप सिंह, मोहम्मद शमी, वॉशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल , यशस्वी जयसवाल, रवींद्र जड़ेजा, जसप्रित बुमरा (फिटनेस के आधार पर), कुलदीप यादव।

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इंग्लैंड वनडे के लिए भारत की टीम: रोहित शर्मा (कप्तान), शुबमन गिल (उप-कप्तान), विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल, हार्दिक पंड्या, ऋषभ पंत, मोहम्मद सिराज, अर्शदीप सिंह, मोहम्मद शमी, वाशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, यशस्वी जयसवाल , रवींद्र जड़ेजा, हर्षित राणा, कुलदीप यादव।

Shattila Ekadashi 2025: चिंतन और भक्ति का दिन

Shattila Ekadashi हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की भक्ति और चिंतन का प्रतीक है। इसे “षटतिला” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन तिल (तिलहन) का विशेष महत्व होता है, और तिल का उपयोग छह विभिन्न तरीकों से किया जाता है। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य पवित्रता, दान, और आध्यात्मिक उन्नति को बढ़ावा देना है।

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भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत षटतिला एकादशी शुक्रवार, 24 जनवरी, 2025 को मनाया जाएगा। एकादशी तिथि (ग्यारहवाँ चंद्र दिवस) 24 जनवरी को सुबह 5:55 बजे शुरू होगी और 25 जनवरी को सुबह 7:01 बजे समाप्त होगी।

उपवास तोड़ने का समय, जिसे पारणा के रूप में जाना जाता है, शनिवार, 25 जनवरी, 2025 को दोपहर 1:21 बजे से 3:23 बजे के बीच निर्धारित है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हरि वासरा अवधि उसी दिन दोपहर 1:07 बजे समाप्त होती है, और पारणा इस समय के बाद किया जाना चाहिए।

Shattila Ekadashi का महत्व:

Shattila Ekadashi: A Day of Reflection and Devotion

दान का पुण्य:
इस दिन गरीब और जरूरतमंदों को तिल, भोजन, वस्त्र, और धन का दान करना अत्यधिक शुभ माना जाता है। यह मान्यता है कि इससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।

आध्यात्मिक शुद्धिकरण:
षटतिला एकादशी को आत्मा की शुद्धि और भगवान विष्णु की कृपा पाने का दिन माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत रखने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और उसे मोक्ष प्राप्त होता है।

तिल का महत्व:
इस दिन तिल का उपयोग शरीर और आत्मा की शुद्धि के लिए किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, तिल का दान, सेवन, और उपयोग व्यक्ति के समस्त दोषों को दूर करता है।

Shattila Ekadashi के छः रूप (तिल का उपयोग):

Shattila Ekadashi में तिल का उपयोग छह प्रकार से करने का विधान है:

  1. तिल का स्नान: तिल युक्त जल से स्नान करने से शरीर पवित्र होता है।
  2. तिल का लेप: शरीर पर तिल का उबटन लगाने से दोष समाप्त होते हैं।
  3. तिल का सेवन: तिल से बने व्यंजनों का सेवन करने से आत्मा शुद्ध होती है।
  4. तिल का दान: तिल का दान गरीबों और जरूरतमंदों को करना अत्यधिक शुभ माना गया है।
  5. तिल का हवन: तिल से हवन करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
  6. तिल का जल: तिल को पानी में डालकर उसका पान करने से शारीरिक दोष दूर होते हैं।

Shattila Ekadashi व्रत विधि:

Shattila Ekadashi: A Day of Reflection and Devotion
  1. प्रातःकाल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।
  2. भगवान विष्णु की पूजा करें और उनके सामने घी का दीपक जलाएं।
  3. विष्णु सहस्त्रनाम और एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  4. दिनभर निराहार या फलाहार रहें।
  5. जरूरतमंदों को तिल, गुड़, वस्त्र, और अन्न का दान करें।
  6. रात्रि में जागरण करें और भगवान विष्णु के भजनों का गायन करें।
  7. द्वादशी तिथि के दिन व्रत का पारण करें।

पौराणिक कथा:

Shattila Ekadashi से जुड़ी एक कथा के अनुसार, एक समय एक ब्राह्मणी ने कठोर तप किया, लेकिन वह दूसरों को भोजन या वस्त्र का दान नहीं करती थी। भगवान विष्णु ने उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उससे पूछा कि वह दान क्यों नहीं करती। ब्राह्मणी ने अपनी स्थिति समझाई, तब भगवान विष्णु ने उसे तिल का दान करने की सलाह दी। इसके बाद, उसने तिल का दान शुरू किया और उसकी सारी समस्याएं दूर हो गईं। इस कथा से दान और तिल के महत्व को रेखांकित किया गया है।

Shattila Ekadashi का संदेश:

Shattila Ekadashi: A Day of Reflection and Devotion

यह दिन हमें सिखाता है कि केवल भक्ति और तप ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि दान और सेवा का भी जीवन में विशेष महत्व है। तिल का उपयोग और दान आत्मा और शरीर दोनों को शुद्ध करता है और हमारे जीवन में सकारात्मकता लाता है।

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“षटतिला एकादशी का व्रत व्यक्ति को पापमुक्त बनाकर मोक्ष की ओर ले जाता है। यह दिन भक्ति, सेवा, और पवित्रता का प्रतीक है।”

Tiruvannamalai temple में नंदी का मुख शिवलिंग की बजाय पवित्र पर्वत की ओर क्यों है?

Tiruvannamalai temple, जो तमिलनाडु में स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है, अपनी अद्वितीय विशेषताओं और गहराई से जुड़े आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर में नंदी की मूर्ति (भगवान शिव के वाहन) का मुख आम तौर पर मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग की ओर होने के बजाय पवित्र अन्नमलाई पर्वत की ओर है।

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Tiruvannamalai temple के पीछे की प्रमुख मान्यताएं और कारण:

Nandi face the sacred mountain at Tiruvannamalai?
Tiruvannamalai temple

अन्नमलाई पर्वत को भगवान शिव का रूप मानना:


तिरुवन्नामलाई में अन्नमलाई पर्वत को भगवान शिव का साक्षात स्वरूप माना जाता है। यह पर्वत स्वयं “अरुणाचल” या “ज्योतिर्लिंग” का प्रतीक है, जो शिव के अग्नि तत्व को दर्शाता है। चूंकि शिव स्वयं पर्वत के रूप में माने जाते हैं, इसलिए नंदी का मुख सीधे उस पर्वत की ओर है।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण:


नंदी भगवान शिव के परम भक्त और शाश्वत सेवक माने जाते हैं। शिवलिंग और पर्वत दोनों को शिव का प्रतीक मानने के कारण, नंदी का मुख अन्नमलाई पर्वत की ओर रखना भक्तों के लिए इस बात का प्रतीक है कि शिव हर रूप में पूजनीय हैं।

शिव और प्रकृति का संबंध:


शिव को प्रकृति और ब्रह्मांड की शक्ति का प्रतिनिधित्व करने वाला देवता माना जाता है। अन्नमलाई पर्वत प्रकृति का एक दिव्य प्रतीक है। नंदी का मुख पर्वत की ओर होने से यह दिखाता है कि भगवान शिव केवल गर्भगृह तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त हैं।

परंपरा और मान्यताएं:


स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, नंदी ने स्वयं पर्वत की ओर देखने की इच्छा व्यक्त की थी, क्योंकि यह पर्वत शिव का “सर्वव्यापी” रूप है। तिरुवन्नामलाई के ज्योतिर्लिंग के संबंध में जो कहानियां प्रचलित हैं, वे इस दिशा-निर्देशन को सही ठहराती हैं।

आध्यात्मिक महत्व:

Nandi face the sacred mountain at Tiruvannamalai?

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अन्नमलाई पर्वत को प्रदक्षिणा (गिरिवलम) करना, यानी इस पवित्र पर्वत की परिक्रमा करना, Tiruvannamalai temple की सबसे महत्वपूर्ण पूजा मानी जाती है। भक्त यह मानते हैं कि यह परिक्रमा शिव की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम तरीका है। नंदी का मुख पर्वत की ओर होने से यह भी भक्तों को इस पूजा की ओर प्रेरित करता है।

Dipika Chikhlia ने Dhartiputra Nandini के सह-कलाकार Aman Jaiswal को भावभीनी श्रद्धांजलि दी

दिग्गज अभिनेत्री Dipika Chikhlia, जो रामानंद सागर की रामायण में सीता के किरदार के लिए प्रसिद्ध हैं, ने हाल ही में अपने सह-कलाकार Aman Jaiswal को श्रद्धांजलि दी। अमन जयसवाल, जो दीपिका के साथ “धरतीपुत्र नंदिनी” सीरियल में नजर आए थे, का असामयिक निधन हो गया।

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Dipika Chikhlia का पोस्ट

Dipika Chikhlia paid tribute to Aman Jaiswal

दीपिका चिखलिया ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा,
“अमन जयसवाल के असामयिक निधन की खबर सुनकर बेहद दुखी हूं। धरतीपुत्र नंदिनी के दिनों की यादें ताजा हो गईं। एक शानदार सह-कलाकार और दोस्त को खोना बहुत दर्दनाक है। उनकी आत्मा को शांति मिले।”

इस पोस्ट के साथ दीपिका ने शो के दौरान की एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें दोनों कलाकार नजर आ रहे थे। उनके इस पोस्ट पर फैंस और सह-कलाकारों ने भी शोक जताते हुए अमन जयसवाल को श्रद्धांजलि दी।

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Dipika Chikhlia paid tribute to Aman Jaiswal

अमन जयसवाल टीवी इंडस्ट्री में अपनी सादगी और प्रतिभा के लिए जाने जाते थे। उनका अचानक जाना इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी क्षति है।

AAP का दावा, Arvind Kejriwal की कार पर BJP कार्यकर्ताओं ने किया हमला, पार्टी ने किया पलटवार

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अरविंद केजरीवाल की कार पर पत्थर फेंका गया, जिसका आरोप उनकी पार्टी ने भाजपा पर लगाया है। AAP नेता 5 फरवरी को होने वाले दिल्ली चुनाव के लिए शहर भर में प्रचार कर रहे थे। इस घटना के बाद सत्तारूढ़ पार्टी और भाजपा के बीच ताजा टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। 2013 से दिल्ली पर शासन कर रही आप ने अपने नेता पर हमले के कुछ ही मिनटों के भीतर एक्स पर पोस्ट किया, “हार के डर से भाजपा घबरा गई है और उसने अपने गुंडों से अरविंद केजरीवाल पर हमला करवा दिया है।”

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AAP ने एक्स पर पोस्ट किया

AAP ने आगे आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनौती देने वाले भाजपा के प्रवेश वर्मा ने अपने समर्थकों से पूर्व मुख्यमंत्री पर हमला करवाया ताकि वे प्रचार न कर सकें। आप ने कहा कि दिल्ली की जनता इसका मुंहतोड़ जवाब देगी। आप ने एक्स पर पोस्ट किया, “भाजपा उम्मीदवार प्रवेश वर्मा के गुंडों ने अरविंद केजरीवाल पर पत्थर फेंके ताकि वे प्रचार न कर सकें। भाजपा सुन लो, अरविंद केजरीवाल तुम्हारे कायराना हमले के कारण पीछे हटने वाले नहीं हैं। दिल्ली की जनता तुम्हें मुंहतोड़ जवाब देगी।”

AAP claims, BJP attacked Kejriwal's car

दिल्ली के चुनाव और अधिक विवादास्पद होते जा रहे हैं।

राजनीतिक हमलों और आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में दिल्ली के चुनाव और अधिक विवादास्पद होते जा रहे हैं। यह घटना मतदाताओं के बीच भावनात्मक लहर पैदा कर सकती है। दोनों दल अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए इस घटना का उपयोग कर रहे हैं।

हालांकि, चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों से इस मामले में निष्पक्ष जांच की उम्मीद की जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी भी प्रकार की हिंसा को रोका जा सके।

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Sanjay Roy को कोलकाता के RG Kar डॉक्टर से बलात्कार और हत्या का दोषी पाया गया

कोलकाता: कोलकाता की एक स्थानीय अदालत ने 33 वर्षीय पूर्व नागरिक पुलिस स्वयंसेवक Sanjay Roy को सरकारी RG Kar अस्पताल में एक प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ जघन्य बलात्कार और हत्या का दोषी पाया है। उसे सोमवार को सजा सुनाई जाएगी, जिससे पिछले साल पूरे देश को हिला देने वाली इस क्रूर घटना का अंत हो जाएगा।

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31 वर्षीय डॉक्टर, जो 8 अगस्त की रात को ड्यूटी पर थी, अगली सुबह मृत पाई गई, जिसके बाद बड़े पैमाने पर जांच और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जिससे बंगाल में थम-सा गया। स्थानीय मीडिया ने उसे 2012 के दिल्ली बलात्कार मामले की सुनवाई की तर्ज पर ‘अभया’ (निडर) के रूप में संदर्भित किया, जिसमें पीड़िता को ‘निर्भया’ नाम दिया गया था।

RG Kar मामले में कोलकाता कोर्ट का फैसला

Kolkata court found Roy guilty in RG Kar case
Sanjay Roy को कोलकाता के RG Kar डॉक्टर से बलात्कार और हत्या का दोषी पाया गया

160 पन्नों के फैसले में, सियालदह में अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायालय ने आज रॉय को भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत दोषी ठहराया, जो बलात्कार, हत्या और मौत का कारण बनती हैं।

न्यायाधीश अनिरबन दास ने आदेश सुनाते हुए कहा, “मैंने पुलिस और अस्पताल अधिकारियों की कुछ गतिविधियों की आलोचना की है, जो साक्ष्यों में सामने आई हैं। विभागाध्यक्ष, एमएसवीपी और प्रिंसिपल की गतिविधियों ने कुछ भ्रम पैदा किया और उनकी आलोचना की गई है।” फैसले के बाद, पीड़िता के पिता अदालत में रो पड़े और न्यायाधीश से कहा, “आपने मेरे द्वारा आप पर जताए गए भरोसे का सम्मान किया है।”

शनिवार दोपहर को कड़ी सुरक्षा के बीच भीड़ भरे कोर्ट रूम में लाए गए रॉय ने अपना दावा दोहराया कि उन्हें फंसाया जा रहा है, जबकि उनके वकीलों ने उन्हें शांत करने की कोशिश की। जब उन्हें बाहर ले जाया जा रहा था, तो उन्होंने दावा किया कि एक निश्चित “आईपीएस” को सब कुछ पता था। अदालत ने कहा कि वह सोमवार को उनकी याचिका पर सुनवाई करेगी, जब उन्हें दी जाने वाली सजा पर बहस होगी। दोषी के निर्दोष होने के दावे का उसके अपराध के शुरुआती कबूलनामे से खंडन होता है।

Sanjay Roy को कोलकाता पुलिस ने पीड़िता के मृत पाए जाने के एक दिन बाद गिरफ्तार किया था
Kolkata court found Roy guilty in  RG Kar case

उसे सीबीआई ने भी दोषी पाया, जिसने सबूत नष्ट होने की चिंताओं के बीच कोलकाता पुलिस से जांच अपने हाथ में ले ली थी। संजय रॉय को कोलकाता पुलिस ने पहली बार RG Kar अस्पताल के सेमिनार हॉल में पीड़िता के मृत पाए जाने के एक दिन बाद गिरफ्तार किया था। जब सीबीआई ने मामले को अपने हाथ में लिया, तो उन्होंने उसे सीबीआई को सौंप दिया। उसका मुकदमा बंद कमरे में और बंद दरवाजों के पीछे चलाया गया और कम से कम 50 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

जब हजारों निवासी अपराध का विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरे, तो भीड़ ने RG Kar अस्पताल के आपातकालीन विभाग में तोड़फोड़ की और सबूतों से छेड़छाड़ के दावे किए गए।

रॉय के अलावा, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल संदीप घोष और स्थानीय पुलिस स्टेशन के पूर्व अधिकारी अभिजीत मंडल को सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में दोनों को “डिफ़ॉल्ट ज़मानत” मिल गई क्योंकि सीबीआई ने अगले 90 दिनों के भीतर आरोपों का पीछा नहीं किया।

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पूरा आदेश अभी अपलोड किया जाना बाकी है, जिससे सबूतों को नष्ट करने के दावे पर कुछ प्रकाश पड़ने की उम्मीद है।

इस सजा ने उन हज़ारों डॉक्टरों के लिए भी उम्मीद जगाई है जो सुरक्षित कामकाजी माहौल और बेहतर बुनियादी ढाँचे की माँग को लेकर हड़ताल पर गए थे ताकि वे सुरक्षित महसूस कर सकें।

21 जनवरी से Ration card पर लागू होंगे 5 नए नियम

भारत सरकार ने Ration card धारकों के लिए 21 जनवरी 2025 से कुछ नए नियमों की घोषणा की है, जिनका उद्देश्य राशन वितरण व्यवस्था को और भी पारदर्शी, सटीक और प्रभावी बनाना है। ये नियम राशन कार्ड धारकों के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएंगे, जो समाज के विभिन्न वर्गों के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इस लेख में हम इन 5 नए नियमों पर विस्तृत चर्चा करेंगे, जो राशन कार्ड धारकों पर लागू होंगे।

1. आधार कार्ड लिंकिंग अनिवार्य

5 new rules will be applicable on Ration card from 21st January

भारत सरकार ने Ration card के साथ आधार कार्ड को लिंक करने की अनिवार्यता लागू कर दी है। 21 जनवरी 2025 से राशन कार्ड धारकों के लिए अपने आधार कार्ड को राशन कार्ड से जोड़ना जरूरी होगा। इसका उद्देश्य राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को सुनिश्चित करना है।

आधार कार्ड लिंकिंग से यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी व्यक्ति एक से अधिक Ration card नहीं रखेगा, जिससे घोटाले और धोखाधड़ी की संभावना को कम किया जा सके। इससे लाभार्थियों की पहचान सटीक रूप से हो सकेगी और गलत तरीके से राशन का वितरण रोका जा सकेगा। इसके अलावा, यह उपाय उन लोगों की मदद करेगा जिनके पास कोई भी वैध पहचान प्रमाण नहीं है, क्योंकि अब आधार कार्ड एक सार्वभौमिक पहचान के रूप में कार्य करेगा।

आधार कार्ड को Ration card से लिंक करने की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी और इसे सरल बनाने के लिए सरकार विभिन्न स्तरों पर सहायता प्रदान करेगी। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन स्थानों पर प्रभावी होगी, जहां राशन वितरण की प्रणाली में खामियां और भ्रष्टाचार पाई जाती हैं।

2. Ration card धारकों के डेटा की नियमित अद्यतन

Ration card धारकों के डेटा को समय-समय पर अद्यतन (अपडेट) करना अब अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य यह है कि यदि किसी परिवार में कोई सदस्य जुड़ता है या परिवार का कोई सदस्य मृत्यु हो जाता है, तो उसका डेटा सही समय पर सिस्टम में अपडेट किया जाए।

इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि राशन वितरण के समय किसी भी परिवार के पास केवल उतना ही राशन पहुंचे, जितने सदस्य उसकी सूची में हैं। परिवार के सदस्य की मृत्यु होने पर या नए सदस्य के जुड़ने पर Ration card में बदलाव किया जाएगा। यह नियम यह सुनिश्चित करेगा कि फर्जी राशन कार्डों का उपयोग रोका जा सके और केवल योग्य व्यक्ति को ही राशन मिले।

सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि हर साल राशन कार्ड का सत्यापन किया जाएगा और जिन परिवारों का डेटा अपडेट नहीं होगा, उनके राशन वितरण को रोक दिया जाएगा। इससे लाभार्थियों के रिकॉर्ड को अद्यतन रखने में मदद मिलेगी और सिस्टम में किसी भी तरह के अनियमितता की संभावना कम होगी।

3. ई-Ration card प्रणाली

5 new rules will be applicable on Ration card from 21st January

सरकार अब ई-Ration card प्रणाली को बढ़ावा दे रही है। 21 जनवरी 2025 से, राशन कार्ड के बजाय डिजिटल यानी ई-राशन कार्ड का इस्तेमाल किया जाएगा। यह बदलाव स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग को देखते हुए किया गया है, जिससे यह प्रणाली राशन कार्ड धारकों के लिए अधिक सुविधाजनक और प्रभावी होगी।

ई-राशन कार्ड प्रणाली के तहत, कार्डधारक अपने राशन कार्ड को ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें सरकारी पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा, जहां पर वे अपना डेटा अपडेट भी कर सकते हैं और डिजिटल राशन कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। इसके माध्यम से, कार्डधारक न केवल अपनी राशन की स्थिति जान सकेंगे, बल्कि वे किसी भी समय अपना कार्ड प्रस्तुत कर सकते हैं, बिना किसी भौतिक दस्तावेज की आवश्यकता के।

यह प्रणाली पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है, जिससे राशन वितरण में कोई भी अनियमितता या भ्रष्टाचार कम किया जा सके। इसके अतिरिक्त, यह सुविधा स्मार्टफोन न रखने वाले लोगों के लिए भी अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि हर नागरिक इसका लाभ उठा सके।

4. Ration card पोर्टेबिलिटी

5 new rules will be applicable on Ration card from 21st January

Ration card पोर्टेबिलिटी का मतलब है कि राशन कार्ड धारक अब देश के किसी भी हिस्से में अपना राशन ले सकेंगे, चाहे वह कहीं भी स्थानांतरित हो। यह नियम खासकर प्रवासी मजदूरों और छात्रों के लिए फायदेमंद होगा, जो अपने मूल स्थान से दूर काम करने या पढ़ाई करने के लिए जाते हैं।

अब तक, राशन कार्ड का लाभ केवल उस राज्य या जिले तक सीमित था, जहां से वह जारी हुआ था। लेकिन पोर्टेबिलिटी के तहत, एक व्यक्ति को अब किसी अन्य राज्य में भी अपने राशन कार्ड का लाभ प्राप्त करने का अधिकार होगा। इसके लिए उन्हें अपने राशन कार्ड को राज्य स्तर पर पोर्टेबल बनवाना होगा, ताकि वे दूसरे राज्य में भी राशन पा सकें।

यह बदलाव विशेष रूप से उन श्रमिकों के लिए लाभकारी होगा, जो अन्य राज्यों में काम करने के लिए जाते हैं। यह कदम देश के एकीकरण और समान वितरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा, जिससे किसी भी व्यक्ति को राशन के लिए भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

5. फर्जी राशन कार्डों पर कड़ी कार्रवाई

फर्जी Ration card का निर्माण और उनका इस्तेमाल एक गंभीर समस्या है, जो सरकारी राशन वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार और अनियमितता को बढ़ावा देता है। अब सरकार ने फर्जी राशन कार्डों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। 21 जनवरी 2025 से, सरकार हर राशन कार्ड का सत्यापन करेगी और किसी भी प्रकार के फर्जी राशन कार्ड को निष्क्रिय कर दिया जाएगा।

सत्यापन की प्रक्रिया में आधार कार्ड से लिंकिंग, परिवार की जानकारी का अपडेट, और कार्डधारक के दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इसके अलावा, किसी भी प्रकार के धोखाधड़ी में लिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि केवल वास्तविक और योग्य लाभार्थियों को ही राशन का वितरण किया जाए और कोई भी व्यक्ति धोखाधड़ी करके लाभ न उठा सके।

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निष्कर्ष

21 जनवरी 2025 से लागू होने वाले इन पांच नए नियमों से Ration card प्रणाली में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। यह कदम सरकार द्वारा राशन वितरण की पारदर्शिता, निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं। आधार कार्ड लिंकिंग, राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी, फर्जी राशन कार्डों पर कार्रवाई और ई-राशन कार्ड प्रणाली जैसे नियम, राशन वितरण की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और दक्ष बनाने में मदद करेंगे। हालांकि, इन बदलावों को लागू करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा और समय-समय पर सहायता प्रदान की जाएगी ताकि सभी लाभार्थी इसका फायदा उठा सकें।

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CSIR UGC NET 2024: जून सत्र के लिए प्रमाणपत्र जारी

CSIR UGC NET 2024 भारत में शिक्षा प्रणाली में उच्चतम स्तर पर शोध और विकास के क्षेत्र में काम करने वाले शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों की पहचान को प्रमाणित करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित एक प्रमुख परीक्षा है। CSIR UGC NET परीक्षा का उद्देश्य उन उम्मीदवारों को पहचानना है जो विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में अपने शोध कार्य को आगे बढ़ाने के लिए योग्य हैं। यह परीक्षा भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए भी आयोजित की जाती है।

CSIR UGC NET 2024: जून सत्र का महत्व

CSIR UGC NET 2024 का जून सत्र न केवल उन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है जो विज्ञान के क्षेत्रों में अपना करियर बनाना चाहते हैं, बल्कि यह उन लोगों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है जो शोध कार्य में रुचि रखते हैं और जिन्हें PhD के लिए छात्रवृत्ति की आवश्यकता है। जून सत्र में CSIR UGC NET परीक्षा के परिणामों के आधार पर उम्मीदवारों को जेआरएफ (Junior Research Fellowship) और असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए चयनित किया जाता है। जून सत्र का परिणाम उन उम्मीदवारों के लिए प्रमाणपत्र जारी करने के रूप में आता है, जो सफलतापूर्वक इस परीक्षा में उत्तीर्ण होते हैं। ये प्रमाणपत्र उम्मीदवारों के लिए आगे के शैक्षिक और व्यावसायिक अवसरों के द्वार खोलते हैं।

प्रमाणपत्र जारी होने की प्रक्रिया

प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण कदम है जो परीक्षा परिणाम की घोषणा के बाद शुरू होती है। CSIR UGC NET परीक्षा के परिणाम के आधार पर उम्मीदवारों को जेआरएफ और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए योग्यता प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। उम्मीदवारों को ये प्रमाणपत्र मुख्यतः निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए प्रदान किए जाते हैं:

जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए पात्रता: जिन उम्मीदवारों को JRF के लिए योग्य माना जाता है, उन्हें प्रमाणपत्र दिया जाता है, जिससे वे भविष्य में PhD कार्यक्रमों के लिए आवेदन कर सकते हैं और शोध कार्य में शामिल हो सकते हैं।

असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए चयन: असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए योग्य उम्मीदवारों को यह प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है, जिससे वे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्य कर सकते हैं।

वैज्ञानिक और शोध संस्थाओं में करियर के अवसर: CSIR UGC NET के माध्यम से पात्रता प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को वैज्ञानिक संस्थानों में भी शोध कार्य करने के अवसर मिलते हैं।

प्रमाणपत्र की प्रक्रिया परीक्षा के परिणामों की घोषणा के बाद शुरू होती है और यह आमतौर पर ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध होता है। उम्मीदवारों को संबंधित प्रमाणपत्र को डाउनलोड करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होता है, जहां उन्हें अपना रोल नंबर और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करना होता है।

प्रमाणपत्र के प्रकार

CSIR UGC NET 2024 Certificate issued for June session

CSIR UGC NET के परिणामों के आधार पर दो प्रकार के प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं:

  • JRF (Junior Research Fellowship) प्रमाणपत्र: यह प्रमाणपत्र उन उम्मीदवारों को प्रदान किया जाता है जो JRF के लिए चयनित होते हैं। इस प्रमाणपत्र के आधार पर, उम्मीदवार को भारतीय विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों में PhD कार्यक्रम में प्रवेश प्राप्त करने का अधिकार होता है। JRF उम्मीदवारों को एक मासिक छात्रवृत्ति भी दी जाती है, जो उनके शोध कार्य को सहारा देने के लिए होती है।
  • असिस्टेंट प्रोफेसर प्रमाणपत्र: यह प्रमाणपत्र उन उम्मीदवारों को प्रदान किया जाता है जो असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए योग्य होते हैं। इस प्रमाणपत्र को प्राप्त करने के बाद, उम्मीदवार भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त हो सकते हैं।

प्रमाणपत्र के महत्व

CSIR UGC NET का प्रमाणपत्र उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनके शैक्षिक और व्यावसायिक करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रमाणपत्र का महत्व निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:

  • शोध कार्य में अवसर: जिन उम्मीदवारों को JRF प्रमाणपत्र मिलता है, उन्हें उच्च शिक्षा और शोध कार्य के लिए छात्रवृत्ति दी जाती है। यह प्रमाणपत्र उनके शोध क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने में मदद करता है और उन्हें अकादमिक कार्यों में योगदान देने के अवसर प्रदान करता है।
  • शैक्षिक और व्यावसायिक वृद्धि: असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति पाने के लिए यह प्रमाणपत्र अनिवार्य है। इसके जरिए उम्मीदवारों को विश्वविद्यालयों और शैक्षिक संस्थाओं में शिक्षण कार्य करने का मौका मिलता है।
  • रोजगार के अवसर: CSIR UGC NET प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद उम्मीदवारों के लिए विभिन्न सरकारी और निजी संस्थानों में रोजगार के कई अवसर उत्पन्न होते हैं। उदाहरण के लिए, भारतीय विज्ञान संस्थानों, अनुसंधान केंद्रों और विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्य करने के अवसर मिलते हैं।
  • संपूर्ण पहचान और सम्मान: CSIR UGC NET के प्रमाणपत्र को प्राप्त करना न केवल एक शैक्षिक सफलता है, बल्कि यह उम्मीदवार की कठिन मेहनत और समर्पण का प्रतीक भी है। यह प्रमाणपत्र उम्मीदवार को समाज में सम्मानित स्थान प्रदान करता है और उनके शैक्षिक करियर में एक मील का पत्थर साबित होता है।

प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया

CSIR UGC NET 2024 Certificate issued for June session

CSIR UGC NET प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए उम्मीदवार को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। इन दस्तावेजों में निम्नलिखित शामिल हैं

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  • परीक्षा परिणाम: सबसे पहले, उम्मीदवार को CSIR UGC NET परीक्षा का परिणाम जानना होता है। यदि उम्मीदवार परीक्षा में सफल होता है, तो उन्हें परीक्षा परिणाम की घोषणा के बाद प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करना होता है।
  • आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण: उम्मीदवार को प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए CSIR UGC NET की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण करना होता है।
  • आवश्यक जानकारी भरना: उम्मीदवार को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, परीक्षा का रोल नंबर और अन्य आवश्यक जानकारी भरनी होती है।
  • प्रमाणपत्र डाउनलोड करना: एक बार जब प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो उम्मीदवार अपने प्रमाणपत्र को वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं।

निष्कर्ष

CSIR UGC NET 2024 का जून सत्र उन उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है जो अपने शैक्षिक और शोध करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं। परीक्षा परिणाम के बाद प्रमाणपत्र का वितरण उन्हें नए शैक्षिक और व्यावसायिक अवसरों के द्वार खोलता है। यह प्रमाणपत्र न केवल उम्मीदवार की मेहनत और सफलता का प्रतीक होता है, बल्कि यह उन्हें उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में बेहतर अवसर प्रदान करता है। इसके अलावा, यह प्रमाणपत्र असिस्टेंट प्रोफेसर और JRF के लिए चयनित उम्मीदवारों को उनके लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता करता है।

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सुबह पानी में Turmeric मिलाकर पिएं, मिलेंगे ये 7 फायदे

Turmeric, एक चमकीला पीला-नारंगी रंग का मसाला, Curcuma longa पौधे की जड़ से प्राप्त होता है, और इसके स्वास्थ्य लाभों को लंबे समय से माना जाता है। हल्दी का सेवन करने का एक सरल और प्रभावी तरीका है इसे पानी में मिलाकर पीना। सुबह के समय Turmeric पानी पीने से विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं। इस लेख में, हम सात प्रमुख लाभों के बारे में विस्तार से जानेंगे, जो आप हल्दी पानी पीने से प्राप्त कर सकते हैं।

1.सूजनरोधी गुण

Mix turmeric in water in the morning and drink these 7 benefits

सूजन एक प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है, जो शरीर को संक्रमण और चोट से लड़ने में मदद करती है। हालांकि, जब यह पुरानी हो जाती है, तो यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है, जैसे गठिया, हृदय रोग और मधुमेह। Turmeric में एक शक्तिशाली सक्रिय तत्व होता है, जिसे करक्यूमिन (curcumin) कहा जाता है, जो अपनी सूजनरोधी विशेषताओं के लिए जाना जाता है।

सुबह खाली पेट Turmeric पानी पीने से आपके शरीर में पुरानी सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है। यह विशेष रूप से गठिया जैसी समस्याओं के लिए फायदेमंद हो सकता है, जहां सूजन जोड़ों के दर्द और अकड़न का कारण बनती है। नियमित रूप से हल्दी पानी पीने से समय के साथ सूजन कम हो सकती है और मूवमेंट में सुधार हो सकता है।

2.पाचन में सुधार

  • Turmeric पाचन तंत्र के लिए कई प्रकार से फायदेमंद है। यह यकृत में पित्त (bile) का उत्पादन बढ़ाती है, जो वसा को अधिक प्रभावी तरीके से पचाने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त, हल्दी में कार्मिनेटिव गुण होते हैं, जो गैस, सूजन और पाचन में असहजता को कम करने में मदद कर सकते हैं।

सुबह खाली पेट हल्दी पानी पीने से पाचन तंत्र सक्रिय होता है और पूरे दिन में पाचन को बेहतर बनाए रखता है। यह आंतों से पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाने में मदद कर सकता है और पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में सहायक हो सकता है। यह विशेष रूप से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

3.प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना

Turmeric की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने वाली विशेषताएं प्रसिद्ध हैं। हल्दी में करक्यूमिन शरीर की सुरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है, सफेद रक्त कोशिकाओं (white blood cells) की गतिविधि को उत्तेजित करता है और एंटीऑक्सीडेंट का उत्पादन बढ़ाता है। ये एंटीऑक्सीडेंट शरीर में हानिकारक फ्री रेडिकल्स को नष्ट करने में मदद करते हैं, जो बीमारियों और उम्र बढ़ने में योगदान करते हैं।

नियमित रूप से हल्दी पानी पीने से आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत हो सकती है, जिससे आपका शरीर संक्रमणों और बीमारियों से लड़ने में सक्षम होता है। खासकर सर्दी और फ्लू के मौसम में, हल्दी पानी आपके शरीर को इन बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है।

4.त्वचा की सेहत में सुधार

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Turmeric को पारंपरिक रूप से त्वचा की देखभाल में उपयोग किया जाता है, क्योंकि इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-माइक्रोबियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण इसे त्वचा संबंधी समस्याओं, जैसे मुंहासे, एक्जिमा और सोरायसिस, के इलाज में मदद करते हैं।

सुबह हल्दी पानी पीने से शरीर के अंदर से विषाक्त पदार्थों का उत्सर्जन होता है, जिससे आपकी त्वचा पर निखार आ सकता है और यह साफ-सुथरी हो सकती है। नियमित रूप से हल्दी का सेवन करने से त्वचा की लोच में सुधार हो सकता है, लालिमा कम हो सकती है और उम्र बढ़ने के संकेतों को रोका जा सकता है। इसके अतिरिक्त, हल्दी के सूजनरोधी गुण मुंहासों और अन्य त्वचा समस्याओं को शांत करने में मदद कर सकते हैं।

5.मस्तिष्क स्वास्थ्य में सुधार

Turmeric का सक्रिय घटक करक्यूमिन मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता है। यह रक्त-मस्तिष्क बाधा (blood-brain barrier) को पार कर सकता है और मस्तिष्क के कार्य को प्रभावित कर सकता है। शोध से पता चला है कि करक्यूमिन मस्तिष्क-निर्मित न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर (BDNF) के स्तर को बढ़ाता है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं की वृद्धि और रख-रखाव में मदद करता है।

सुबह हल्दी पानी पीने से मस्तिष्क कार्य में सुधार हो सकता है, याददाश्त बेहतर हो सकती है और मस्तिष्क संबंधित बीमारियों, जैसे अल्जाइमर और पार्किंसन्स, से बचाव हो सकता है। हल्दी के सूजनरोधी गुण मस्तिष्क में सूजन को कम करने में मदद करते हैं, जो कई न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का मुख्य कारण होता है।

6.वजन घटाने में सहायता

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हल्दी वजन घटाने में भी सहायक हो सकती है। करक्यूमिन वसा कोशिकाओं के उत्पादन को नियंत्रित करने और वसा को जलाने में मदद कर सकता है। इसके अतिरिक्त, यह इंसुलिन संवेदनशीलता को सुधारने और सूजन को कम करने में मदद करता है, जो वजन घटाने में महत्वपूर्ण कारक हैं। कुछ अध्ययन यह भी बताते हैं कि हल्दी मेटाबोलिज्म को बढ़ा सकती है और पेट के आसपास वसा को जमा होने से रोक सकती है।

सुबह हल्दी पानी पीने से आपका मेटाबोलिज्म तेज हो सकता है, जिससे स्वस्थ वजन बनाए रखना आसान हो सकता है। यह वजन घटाने के प्रयासों में सहायक हो सकता है, खासकर जब इसे संतुलित आहार और व्यायाम के साथ मिलाया जाए। हल्दी रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकती है, जिससे दिनभर में भूख और अधिक खाने की इच्छा कम हो सकती है।

7.शरीर को Detoxify करना

Turmeric को शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करने वाले एक शक्तिशाली तत्व के रूप में जाना जाता है। यकृत शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों को निकालने का काम करता है, और हल्दी यकृत की इस प्रक्रिया को बेहतर बना सकती है। यह पित्त का उत्पादन बढ़ाती है और वसा को तोड़ने में मदद करती है, जिससे शरीर के भीतर जमा अवशेषों को हटाने में मदद मिलती है।

सुबह Turmeric पानी पीने से शरीर की धीरे-धीरे सफाई हो सकती है, जिससे ऊर्जा स्तर में वृद्धि, त्वचा की सुंदरता में सुधार और समग्र रूप से अच्छा महसूस हो सकता है। इसके अतिरिक्त, हल्दी के एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद करते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

Turmeric पानी बनाने का तरीका

हल्दी पानी बनाना बहुत सरल है और इसे कुछ आसान कदमों में तैयार किया जा सकता है:

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  1. सामग्री:

1/2 चम्मच हल्दी पाउडर

1 कप गुनगुना पानी

Optional: एक चुटकी काली मिर्च (करक्यूमिन के अवशोषण को बढ़ाने के लिए)

Optional: नींबू का रस या शहद स्वाद के लिए

  1. विधि:

हल्दी पाउडर को एक कप गुनगुने पानी में डालें।

अच्छे से हिलाकर हल्दी को पानी में घोल लें।

अगर चाहें, तो इसमें एक चुटकी काली मिर्च डाल सकते हैं, क्योंकि काली मिर्च में पिपेरिन होता है, जो करक्यूमिन के अवशोषण को 2,000% तक बढ़ा सकता है।

स्वाद के लिए नींबू का रस या शहद भी डाल सकते हैं।

इस मिश्रण को सुबह खाली पेट पिएं, ताकि इसके सभी लाभ मिल सकें।

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निष्कर्ष

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सुबह Turmeric पानी पीने से आपके स्वास्थ्य में कई प्रकार के लाभ हो सकते हैं, जैसे सूजन में कमी, पाचन में सुधार, प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा, त्वचा की सेहत में सुधार, मस्तिष्क स्वास्थ्य में वृद्धि और वजन घटाने में सहायता। हल्दी एक प्राकृतिक, प्रभावी और सरल उपाय है, जिसे आप अपने दैनिक आहार में शामिल कर सकते हैं।

हालांकि, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि Turmeric केवल एक सहायक उपाय है और स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। यदि आपके पास कोई स्वास्थ्य समस्या है या आप दवाइयाँ ले रहे हैं, तो हल्दी पानी पीने से पहले एक डॉक्टर से परामर्श करना बेहतर होगा। लेकिन सामान्य रूप से, हल्दी पानी एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए।

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Arvind Kejriwal: दिल्ली चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद अरविंद केजरीवाल

Arvind Kejriwal दिल्ली विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा हमेशा भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना होती है। जब चुनावी तारीखों का ऐलान होता है, तो यह न सिर्फ राजनीतिक दलों के लिए रणनीति बनाने का मौका होता है, बल्कि नागरिकों के लिए भी यह संकेत होता है कि उन्हें आगामी चुनावों के लिए तैयार होना है। दिल्ली के मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और उनकी पार्टी आम आदमी पार्टी (AAP) इस राजनीति के केंद्र में रहे हैं, और चुनाव की तारीखों का ऐलान उनके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है। इस लेख में हम दिल्ली चुनावों की तारीखों की घोषणा के संदर्भ में अरविंद केजरीवाल, आम आदमी पार्टी (AAP), और इसके व्यापक राजनीतिक प्रभावों पर चर्चा करेंगे।

Arvind Kejriwal और आम आदमी पार्टी (AAP) का इतिहास

Arvind Kejriwal after the announcement of Delhi election dates

Arvind Kejriwal भारतीय राजनीति में एक प्रमुख नेता के रूप में उभरे हैं। उनका राजनीतिक जीवन मुख्यतः 2011 में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन “भारत आंदोलन” से जुड़ा हुआ है, जिसका नेतृत्व समाजसेवी अन्ना हजारे ने किया था। इसके बाद, 2012 में केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थापना की, जो भ्रष्टाचार को समाप्त करने, पारदर्शिता बढ़ाने और शासन में सुधार की दिशा में काम करने का वादा करती थी।

Arvind Kejriwal ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में 2013 में शानदार प्रदर्शन किया था, हालांकि उनका कार्यकाल बहुत लंबा नहीं रहा। उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन 2015 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने जबरदस्त जीत हासिल की, और केजरीवाल ने फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2020 में हुए चुनावों में भी आम आदमी पार्टी ने बहुमत हासिल किया और केजरीवाल ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

केजरीवाल का शासन मुख्यतः शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी जैसी स्थानीय समस्याओं पर केंद्रित रहा है। उनके नेतृत्व में दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिक जैसे स्वास्थ्य मॉडल और स्कूलों में सुधार किए गए हैं, जो उनके समर्थकों के बीच बहुत सराहे गए हैं।

चुनावी तारीखों की घोषणा का महत्व

जब चुनाव आयोग दिल्ली विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा करता है, तो यह न केवल राजनीतिक दलों के लिए एक नई रणनीति बनाने का समय होता है, बल्कि यह उस राज्य के मतदाताओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत होता है कि वे चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए तैयार हो जाएं। चुनाव की तारीखों का ऐलान एक नई राजनीतिक शुरुआत को इंगीत करता है, जहां राजनीतिक दल अपना प्रचार-प्रसार तेज़ कर देते हैं, और मतदाता आगामी चुनावों के लिए अपने मनोबल को तैयार करते हैं।

Arvind Kejriwal के लिए चुनावी तारीखों का ऐलान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनके नेतृत्व और उनके द्वारा किए गए सुधारों के मूल्यांकन का समय होता है। दिल्ली में अतीत में हुए चुनावों में उनके नेतृत्व को जनता ने काफी समर्थन दिया था, और यह आगामी चुनाव इस बात का आकलन करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा कि जनता उनके कार्यों से कितनी संतुष्ट है।

दिल्ली का राजनीतिक परिपेक्ष्य

Arvind Kejriwal after the announcement of Delhi election dates

दिल्ली एक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) है, जिसका मतलब है कि दिल्ली सरकार को स्थानीय प्रशासन के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है, लेकिन कई मामलों में केंद्रीय सरकार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पुलिस, भूमि अधिग्रहण और सार्वजनिक व्यवस्था जैसे मामलों में केंद्र सरकार का नियंत्रण रहता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के बीच यह जटिल संबंध अक्सर राजनीतिक विवादों का कारण बनते हैं।

Arvind Kejriwal और उनकी पार्टी आम आदमी पार्टी (AAP) अक्सर केंद्रीय सरकार के साथ टकराती रही है, विशेष रूप से पुलिस के नियंत्रण और दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) के अधिकारों को लेकर। केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच सत्ता संघर्ष दिल्ली की राजनीति में अहम भूमिका निभाता है और यह आगामी चुनावों के लिए भी एक प्रमुख मुद्दा हो सकता है।

Arvind Kejriwal का चुनावी अभियान

चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ, अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत होती है। केजरीवाल का नेतृत्व शैली स्पष्ट रूप से स्थानीय समस्याओं और जनकल्याण की ओर केंद्रित रही है। उन्होंने दिल्ली के शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सेवाओं में सुधार करने पर जोर दिया है। उनके मोहल्ला क्लिनिक, मुफ्त बिजली और जल आपूर्ति के फैसले उनके समर्थकों में काफी लोकप्रिय हैं।

हालाँकि, उन्हें अपनी राजनीतिक यात्रा में विपक्ष से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस दोनों ही दिल्ली विधानसभा चुनावों में उन्हें चुनौती देते हैं। BJP के नेता अक्सर केजरीवाल को केंद्र सरकार के खिलाफ अपरोक्ष रूप से संघर्ष करने के आरोप लगाते हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी भी अपनी खोई हुई ताकत को वापस पाने के लिए पूरी ताकत से काम कर रही है।

चुनावी तिथि का महत्व AAP के भविष्य के लिए

Arvind Kejriwal after the announcement of Delhi election dates

दिल्ली विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान आम आदमी पार्टी (AAP) और Arvind Kejriwal के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। यदि AAP आगामी चुनावों में जीत हासिल करती है, तो यह न केवल केजरीवाल के नेतृत्व को मजबूती देगा बल्कि पार्टी को अन्य राज्यों में भी अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिलेगा। AAP ने हाल के वर्षों में पंजाब, गोवा और गुजरात जैसे राज्यों में अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश की है। दिल्ली में अगर पार्टी जीतती है, तो यह इन राज्यों में पार्टी की संभावनाओं को बढ़ावा दे सकता है।

यह भी पढ़ें: Arvind Kejriwal के हटने से AAP को बड़ा झटका, MCD में बदलाव!

केजरीवाल के नेतृत्व में, AAP ने लगातार शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को प्राथमिकता दी है, जो दिल्ली के मतदाताओं के बीच एक बड़ी सफलता रही है। अगर पार्टी चुनावी परिणामों में सफलता प्राप्त करती है, तो यह उनके शासन मॉडल को पूरे देश में लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।

निष्कर्ष

दिल्ली विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक माहौल गर्म हो जाता है। Arvind Kejriwal और आम आदमी पार्टी के लिए यह चुनाव सिर्फ दिल्ली की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देशभर में उनके प्रभाव को बढ़ाने का एक अवसर हो सकता है। इस चुनाव के परिणाम से यह तय होगा कि केजरीवाल के शासन के तहत दिल्ली की जनता कितनी संतुष्ट है और क्या उनकी नीतियां बाकी देश में भी लागू हो सकती हैं या नहीं।

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पर्यटन मंत्रालय ने Maha Kumbh 2025 को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में बढ़ावा देने के लिए प्रमुख पहलों की शुरुआत की

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भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने आगामी Maha Kumbh 2025 को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। ये पहलें न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से हैं, बल्कि देश में पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

यह भी पढ़ें: Maha Kumbh 2025: आस्था, संस्कृति और एकता का महोत्सव

Maha Kumbh 2025 के प्रमुख पहलें:

Major initiatives of Maha Kumbh 2025

अंतरराष्ट्रीय प्रचार अभियान:

महाकुंभ 2025 को वैश्विक स्तर पर प्रचारित करने के लिए डिजिटल और पारंपरिक माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मेलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के जरिए इस आयोजन की जानकारी दी जा रही है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास:

प्रयागराज और इसके आसपास के क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जैसे:

बेहतर सड़क और रेल नेटवर्क।

आवासीय सुविधाओं में सुधार, विशेष रूप से पर्यटकों के लिए।

गंगा नदी के किनारे पर्यावरण-संवेदनशील परियोजनाएं।

स्मार्ट सिटी पहल के तहत तकनीकी विकास:

महाकुंभ स्थल पर स्मार्ट तकनीकों का उपयोग, जैसे कि:

भीड़ प्रबंधन के लिए AI आधारित समाधान।

लाइव लोकेशन ट्रैकिंग और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता।

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पैकेज:

विदेशों से आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष टूर पैकेज तैयार किए गए हैं, जिसमें:

महाकुंभ का अनुभव।

भारत की सांस्कृतिक धरोहर, जैसे वाराणसी, अयोध्या, और खजुराहो जैसे प्रमुख स्थलों का दौरा।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन:

महाकुंभ के दौरान वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए:

योग, ध्यान और भारतीय संगीत के विशेष सत्र।

भारतीय हस्तशिल्प और व्यंजनों की प्रदर्शनी।

Maha Kumbh 2025 महत्व:

Major initiatives of Maha Kumbh 2025

महाकुंभ 2025 को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने से न केवल भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह विदेशी मुद्रा अर्जित करने, स्थानीय रोजगार सृजन और भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार में भी मदद करेगा।

संभावित प्रभाव:

इस पहल से प्रयागराज और अन्य संबंधित क्षेत्रों में दीर्घकालिक विकास होगा और भारत की सॉफ्ट पावर को और अधिक मजबूती मिलेगी।

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S Jaishankar 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे

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नई दिल्ली: विदेश मंत्री S Jaishankar 20 जनवरी को वाशिंगटन डीसी में अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे, केंद्र की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है।

यह भी पढ़ें: S Jaishankar: चीन के साथ सीमा मुद्दों के सफल समाधान के बाद LAC पर गश्त फिर से शुरू होगी

बयान में कहा गया है, “ट्रंप-वेंस उद्घाटन समिति के निमंत्रण पर विदेश मंत्री (ईएएम) डॉ. एस. जयशंकर संयुक्त राज्य अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे।”

S Jaishankar आने वाले ट्रंप प्रशासन के प्रतिनिधियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से भी मिलेंगे

अमेरिका की अपनी यात्रा के दौरान, श्री जयशंकर आने वाले ट्रंप प्रशासन के प्रतिनिधियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से भी मिलेंगे। कैपिटल बिल्डिंग के सामने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा संचालित समारोह में ट्रंप शपथ लेंगे।

S Jaishankar will attend Trump's swearing-in ceremony

पद की शपथ लेने के बाद ट्रंप अपना उद्घाटन भाषण देंगे। निवर्तमान राष्ट्रपति जो बिडेन इस कार्यक्रम में शामिल होंगे और सत्ता हस्तांतरण के साक्षी बनेंगे। 2020 के राष्ट्रपति चुनावों में पराजित हुए ट्रंप बिडेन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए थे। ट्रम्प ने कथित तौर पर कई विश्व नेताओं को उद्घाटन समारोह में आमंत्रित किया है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कथित तौर पर इस कार्यक्रम में शामिल होने पर सहमति जताई है।

हंगरी के विक्टर ओरबान ने कहा है कि वह इसमें शामिल होने पर विचार करेंगे। 78 वर्षीय ट्रम्प ने जनवरी 2017 से जनवरी 2021 तक अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया।

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Dakshineswar Kali Temple: एक आध्यात्मिक और ऐतिहासिक धरोहर

दक्षिणेश्वर काली मंदिर (Dakshineswar Kali Temple) भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में कोलकाता के समीप स्थित एक प्रसिद्ध और भव्य धार्मिक स्थल है। यह मंदिर मां काली को समर्पित है और अपनी अद्भुत वास्तुकला, ऐतिहासिक महत्व और आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है। यह मंदिर भक्तों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर: पश्चिम बंगाल का एक प्रमुख तीर्थ स्थल

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इतिहास और निर्माण

Dakshineswar Kali Temple का निर्माण 19वीं शताब्दी के मध्य में हुआ था। इस मंदिर का निर्माण रानी रासमणि (Rani Rashmoni) ने करवाया था, जो एक प्रसिद्ध जमींदार और समाजसेवी थीं।

  • निर्माण वर्ष: Dakshineswar Kali Temple का निर्माण 1847 में शुरू हुआ और 1855 में यह पूर्ण हुआ।
  • निर्माण का उद्देश्य: रानी रासमणि को मां काली के दर्शन का सपना आया, जिसके बाद उन्होंने मंदिर का निर्माण करवाने का निश्चय किया।
  • स्थापना: Dakshineswar Kali Temple का उद्घाटन 31 मई 1855 को हुआ। इस अवसर पर महान संत रामकृष्ण परमहंस को यहां का मुख्य पुजारी नियुक्त किया गया।

स्थान और परिवेश

Dakshineswar Kali Temple गंगा नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित है। दक्षिणेश्वर मंदिर का वातावरण अत्यंत शांत और दिव्य है। गंगा नदी का प्रवाह मंदिर को और भी पवित्र और मनमोहक बनाता है। यह स्थान आध्यात्मिक साधना और ध्यान के लिए आदर्श है।

मंदिर की वास्तुकला

Dakshineswar Kali Temple की वास्तुकला बंगाल की पारंपरिक शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

Dakshineswar Kali Temple: A Spiritual
  • मुख्य मंदिर: यह 9 गुंबदों वाला मंदिर है, जो 100 फीट ऊंचा है।
  • आकृति: Dakshineswar Kali Temple की संरचना त्रिकोणीय है और सफेद तथा हल्के पीले रंग से सजी हुई है।
  • गर्भगृह: Dakshineswar Kali Temple के गर्भगृह में मां काली की मूर्ति स्थापित है, जिन्हें भव्य तरीके से सजाया जाता है।
  • मूर्ति: मां काली को यहां “भवतरिणी” के रूप में पूजा जाता है। मूर्ति के नीचे भगवान शिव शयन मुद्रा में हैं।
  • अन्य मंदिर: मुख्य मंदिर के चारों ओर 12 शिव मंदिर और राधा-कृष्ण का एक मंदिर भी स्थित है। ये सभी मंदिर गंगा नदी के किनारे एक पंक्ति में बने हैं।

धार्मिक महत्व

Dakshineswar Kali Temple का हिंदू धर्म में बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है।

  • मां काली की पूजा: यहां मां काली को “भव सागर” (जन्म और मृत्यु के चक्र) से मुक्ति दिलाने वाली देवी माना जाता है।
  • रामकृष्ण परमहंस का जुड़ाव: महान संत रामकृष्ण परमहंस ने इस मंदिर में कई वर्षों तक पूजा-अर्चना की। उनके ध्यान और साधना ने इस स्थान को और भी पवित्र बना दिया।
  • विवेकानंद: स्वामी विवेकानंद ने भी यहां साधना की थी। यह स्थान उनके जीवन और शिक्षाओं का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

मुख्य त्यौहार और आयोजन

  1. काली पूजा: यह मंदिर काली पूजा के दौरान भव्य तरीके से सजाया जाता है। दीपों और फूलों की सजावट इसे अद्भुत बनाती है।
  2. दुर्गा पूजा: दुर्गा पूजा का त्योहार यहां बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
  3. रामनवमी और कृष्ण जन्माष्टमी: ये त्यौहार भी यहां बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाए जाते हैं।

दक्षिणेश्वर और बेलूर मठ का संबंध

Dakshineswar Kali Temple: A Spiritual

Dakshineswar Kali Temple का संबंध बेलूर मठ से भी है, जो स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है। यह गंगा के दूसरी ओर स्थित है। दोनों स्थानों को एक साथ देखने के लिए यहां आने वाले भक्त नाव यात्रा का आनंद भी लेते हैं।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर में क्या करें?

Dilwara Temple: स्थापत्य कला और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम

  1. मां काली के दर्शन करें: Dakshineswar Kali Temple के गर्भगृह में प्रवेश कर मां काली की पूजा करें।
  2. शिव मंदिरों में जल चढ़ाएं: यहां स्थित 12 शिव मंदिरों में पूजा करना शुभ माना जाता है।
  3. गंगा आरती में भाग लें: शाम के समय होने वाली गंगा आरती एक अद्भुत अनुभव है।
  4. ध्यान और साधना: Dakshineswar Kali Temple का शांत वातावरण ध्यान और साधना के लिए उपयुक्त है।
  5. स्मृति चिन्ह खरीदें: मंदिर के पास स्थित दुकानों से धार्मिक वस्त्र और स्मृति चिन्ह खरीद सकते हैं।

कैसे पहुंचे?

  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो दक्षिणेश्वर से लगभग 15 किलोमीटर दूर है।
  • रेल मार्ग: दक्षिणेश्वर रेलवे स्टेशन नजदीकी रेलवे स्टेशन है।
  • सड़क मार्ग: कोलकाता शहर से टैक्सी या बस द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

भ्रमण का सही समय

Dakshineswar Kali Temple की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच होता है। इस समय मौसम सुहावना रहता है और प्रमुख त्यौहार भी इसी अवधि में आते हैं।

महत्वपूर्ण जानकारी

Dakshineswar Kali Temple: A Spiritual
  • मंदिर का समय: सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक।
  • प्रवेश शुल्क: मंदिर में प्रवेश नि:शुल्क है।
  • फोटोग्राफी: मंदिर परिसर के अंदर फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है।

दक्षिणेश्वर मंदिर का आध्यात्मिक प्रभाव

Dakshineswar Kali Temple केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं है, बल्कि यह अध्यात्म और मानसिक शांति का प्रतीक भी है। यहां आने वाले भक्त मां काली की कृपा से आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।

निष्कर्ष

Dakshineswar Kali Temple भारतीय संस्कृति, वास्तुकला और आध्यात्मिकता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह स्थान उन लोगों के लिए आदर्श है जो धार्मिक अनुभव के साथ-साथ एक शांतिपूर्ण वातावरण की तलाश में हैं। अगर आप पश्चिम बंगाल या कोलकाता की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो दक्षिणेश्वर काली मंदिर को अपनी यात्रा सूची में अवश्य शामिल करें।

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Sambhal: पुलिस ने सड़क सुरक्षा अभियान के तहत चलाया जागरूकता और सख्ती का अभियान

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Sambhal (उत्तर प्रदेश) में पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार के निर्देशन में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा अभियान के तहत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। क्षेत्राधिकारी यातायात डॉ. गणेश गुप्ता, पी.टी.ओ. योगेश यादव और प्रभारी यातायात प्रमोद मान ने इस्लामनगर चौराहे पर अभियान चलाया, जहां बाइक सवार व्यक्तियों को हेलमेट वितरित किए गए। साथ ही, जो वाहन चालक सीटबेल्ट या हेलमेट का प्रयोग कर रहे थे, उन्हें गुलाब का फूल देकर प्रोत्साहित किया गया।

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मुख्य गतिविधियां और कार्रवाई:

Sambhal police launched a strict campaign

इस्लामनगर चौराहा:

बाइक सवारों को हेलमेट वितरित कर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।

नियमों का पालन करने वाले वाहन चालकों को गुलाब का फूल देकर सराहना की गई।

सम्भल तिराहा बहजोई:

शराब पीकर वाहन चलाने वालों की ब्रेथ एनालाइजर से जांच की गई।

मोटर वाहन अधिनियम (एम.वी. एक्ट) के तहत चालान की कार्रवाई की गई।

चंदौसी कोतवाली क्षेत्र:

Sambhal police launched a strict campaign

यातायात पुलिस ने ट्रैक्टर ट्रॉली और अन्य वाहनों पर रिफ्लेक्टर टेप लगाए।

सड़क किनारे खड़े वाहनों के खिलाफ नो-पार्किंग चालान किए गए।

आम जनता को यातायात नियमों के पालन के महत्व पर जागरूक किया गया और अपील की गई कि वे नियमों का पालन करें।

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Sambhal में जागरूकता और सख्ती का उद्देश्य:

इस अभियान का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को रोकना, यातायात नियमों के पालन को बढ़ावा देना और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना है। पुलिस प्रशासन द्वारा यह कदम स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों के बीच सकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।

खलील मलिक की ख़ास रिपोर्ट, सम्भल