Mallikarjun Kharge ने SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल, केंद्र और EC पर साधा निशाना

कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) को लेकर तीखा हमला बोला।

उन्होंने इस प्रक्रिया को “फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर” और नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की मनमानी कोशिश बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक कड़े शब्दों वाले पोस्ट में कांग्रेस प्रमुख ने कहा, “बिहार से SIR के तौर पर जो शुरू हुआ था, वह अब दिल्ली तक पहुँच गया है।

SIR पर Kharge ने BJP को घेरा

शायद अब सत्ता में बैठे लोगों को समझ आ रहा होगा कि कांग्रेस पार्टी क्यों पहले दिन से ही इस पूरी प्रक्रिया को दोषपूर्ण बताती रही है! SIR सिर्फ़ वोट चोरी और लोकतंत्र को खत्म करने के लिए BJP का एक हथियार नहीं है—यह एक ऐसी दोषपूर्ण प्रक्रिया है जो ‘फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर’ बन गई है और अब उन्हीं लोगों को फँसा रही है!!”

भेजे जा रहे नोटिस की संख्या पर ज़ोर देते हुए Mallikarjun Kharge ने बताया कि इससे वरिष्ठ राजनेता और सम्मानित हस्तियाँ भी प्रभावित हुई हैं। “बीजेपी के कई बड़े नेताओं—जिनमें बीजेपी के सबसे वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी जी, मौजूदा विदेश मंत्री, दिल्ली के उपराज्यपाल, राज्यसभा सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और अन्य शामिल हैं—को अब नोटिस भेजे गए हैं।

हालात ऐसे हैं कि भारत रत्न से सम्मानित एक वैज्ञानिक और नौसेना के पूर्व प्रमुख को भी पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं,” Mallikarjun Kharge ने कहा। खड़गे ने पश्चिम बंगाल का भी ज़िक्र किया और दावा किया कि ज़मीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर गलत तरीके से नाम हटाए जा रहे हैं।

बंगाल में, जिन लोगों के नाम वोटिंग से रोकने के लिए हटाए गए थे, उनमें से अब तक तय किए गए मामलों में 93% लोगों ने अपनी अपील जीत ली है—यानी 1,13,943 लोगों को वोटर लिस्ट में फिर से शामिल किया जाएगा! वाह! किस आधार पर उनसे वोट देने का अधिकार छीना गया था?” उन्होंने पूछा।

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Mallikarjun Kharge का EC सूची पर सवाल

यह सवाल उठाते हुए कि क्या वोटिंग के अधिकार में संवैधानिक समानता से समझौता किया जा रहा है, खड़गे ने आगे कहा, “इसके अलावा, चुनाव आयोग ने आज एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की जिसमें ‘VIP/चिह्नित मतदाता’ (VIP/marked electors) का ज़िक्र किया गया है।

क्या अब भारत के सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) में मतदाताओं की कोई विशेष श्रेणी है—VIP मतदाता और आम मतदाता? क्या यह ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के संवैधानिक सिद्धांत का उल्लंघन नहीं है?

क्या VIP वोट अब ज़्यादा कीमती हो गया है?”वोटर लिस्ट से नाम हटाने के डेटा का हवाला देते हुए Mallikarjun Kharge ने आगे आरोप लगाया, “SIR के पहले तीन चरणों में, 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 13.8 करोड़ वोटरों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए—यानी कुल 94.78 करोड़ वोटरों में से लगभग 14.61%। किसके कहने पर कौन हाथ पर हाथ धरे बैठा है?”

Mallikarjun Kharge ने कहा, “VIPs के लिए प्रेस रिलीज़, और करोड़ों आम वोटरों के लिए चुप्पी!” इस बीच, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने रविवार को साफ़ किया कि वोटर लिस्ट के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) के दौरान कुछ वोटरों को भेजे गए नोटिस का मतलब यह नहीं है कि उनके नाम हटा दिए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि वोटर को अपनी बात रखने का मौका दिए बिना और उचित, तर्कपूर्ण और अपील करने योग्य आदेश पारित किए बिना किसी का नाम नहीं हटाया जा सकता।

यह स्पष्टीकरण तब आया है जब प्रिंट और सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें आ रही थीं कि राष्ट्रीय राजधानी में SIR प्रक्रिया के दौरान VIPs और चिह्नित वोटरों को नोटिस भेजे जा रहे हैं।

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