Pinarayi Vijayan ने CEC पर निशाना साधा, SIR को रोकने की मांग की

केरल के मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की।

X पर एक पोस्ट में विजयन ने कहा कि वोटर लिस्ट, नाम हटाने और SIR के संबंध में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से किए गए कामों से जुड़ी बातों ने भारत के चुनाव आयोग के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Pinarayi Vijayan ने SIR को लेकर चुनाव आयोग को घेरा

विजयन ने कहा, “वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने और #SIR के संबंध में दो चुनाव आयुक्तों के कामों को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है, उससे ECI के कामकाज पर गंभीर सवाल उठते हैं।”

उन्होंने कहा, “वोट देने का अधिकार भारत के लोगों का है। इसे BJP और संघ परिवार के राजनीतिक हितों को साधने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।” विजयन की यह टिप्पणी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न) प्रक्रिया को लेकर बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच आई है।

यह विवाद ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें पता चला कि दो मौजूदा चुनाव आयुक्तों – सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी – ने प्रक्रियाओं, डेटाबेस में बदलाव और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को लेकर 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इस बात को खारिज कर दिया है कि इन आपत्तियों से आयोग के भीतर किसी तरह की गड़बड़ी या संस्थागत असहमति का संकेत मिलता है।

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Pinarayi Vijayan के आरोपों को ECI ने किया खारिज

आयोग का कहना है कि अलग-अलग राय, सुझाव और आंतरिक जांच-पड़ताल एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था के सामान्य कामकाज का हिस्सा हैं, और साथ ही यह भी कहा कि SIR से जुड़े फैसलों समेत सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।

ECI ने अपने ECINet प्लेटफ़ॉर्म के कामकाज का बचाव करते हुए कहा है कि यह ‘रिप्रेज़ेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट्स, 1950 और 1951’ के तहत बनाया गया एक डिसेंट्रलाइज़्ड (विकेंद्रीकृत) सिस्टम है, जिसमें तय चुनाव अधिकारी सुरक्षित क्रेडेंशियल्स के ज़रिए कानूनी काम करते हैं।

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