Pongal पर PM Modi का संदेश: “Tamil संस्कृति मानवता की धरोहर”
PM Modi ने आज राजधानी दिल्ली में आयोजित Pongal उत्सव में भाग लिया और देश-विदेश के तमिल समुदाय को इस पावन पर्व की शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पोंगल अब केवल एक क्षेत्रीय पर्व नहीं रहा, बल्कि यह एक वैश्विक उत्सव बन चुका है, जिसे दुनिया भर में तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, “आज Pongal एक ग्लोबल फेस्टिवल बन चुका है। दुनिया भर में तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति प्रेमी इसे उत्साह से मनाते हैं, जिसमें मैं भी शामिल हूं।” उन्होंने इस विशेष अवसर को सभी के साथ मनाने को अपने लिए सौभाग्य बताया।
“Pongal प्रकृति, परिवार और समाज में संतुलन का संदेश देता है”

पीएम मोदी ने Pongal के सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पर्व तमिल जीवन में सुखद अनुभूति का प्रतीक है, जो अन्नदाता किसान की मेहनत, धरती मां और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है।
उन्होंने कहा कि Pongal केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन का संदेश देता है, जो आज के दौर में और भी प्रासंगिक हो गया है।
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देशभर में त्योहारों की उमंग: लोहड़ी, मकर संक्रांति और माघ बिहू का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने देशभर में इस समय मनाए जा रहे विभिन्न पर्वों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोहड़ी, मकर संक्रांति और माघ बिहू जैसे त्योहार पूरे देश में उमंग और उल्लास का वातावरण बना रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने भारत और विश्व के सभी तमिल भाई-बहनों को पोंगल और अन्य पर्वों की शुभकामनाएं दीं।

तमिल संस्कृति की वैश्विक पहचान पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारी तमिल संस्कृति पूरे भारत की साझा विरासत है, बल्कि पूरी मानवता की धरोहर।” उन्होंने तमिल सभ्यता को दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक बताते हुए कहा कि यह संस्कृति सदियों को जोड़ने वाली कड़ी है और भारत की सांस्कृतिक एकता का मजबूत आधार है।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने किसानों की भूमिका को भी विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसान राष्ट्र निर्माण के मजबूत साथी हैं और उनके अथक प्रयासों से आत्मनिर्भर भारत अभियान को लगातार मजबूती मिल रही है।
प्रधानमंत्री ने दोहराया कि केंद्र सरकार किसानों को सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और कृषि क्षेत्र को आधुनिक व टिकाऊ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
सरकार का लक्ष्य: “थाली भरी रहे, जेब भरी रहे और धरती सुरक्षित रहे”

प्रधानमंत्री ने सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा, “हमारी थाली भरी रहे, जेब भरी रहे और धरती सुरक्षित रहे।”
उन्होंने संकेत दिया कि कृषि उत्पादन, किसानों की आय और पर्यावरण संरक्षण—इन तीनों के बीच संतुलन बनाना सरकार की नीति का मूल आधार है।
एकता, संस्कृति और समृद्धि का संदेश
पीएम मोदी का यह संबोधन केवल एक त्योहार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता, किसानों की भूमिका और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का व्यापक संदेश दिया।
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