PM Modi ने भारत-श्रीलंका संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक अहम कदम के तहत कहा कि गुजरात के अरावली क्षेत्र में पाए गए प्राचीन बौद्ध अवशेषों को दर्शनार्थ श्रीलंका भेजा जा रहा है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों की गहराई का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कदम न सिर्फ श्रीलंका के बौद्ध समुदाय के प्रति भारत की सद्भावना को दर्शाता है, बल्कि साझा विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
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इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और श्रीलंका के बीच मछुआरों के मुद्दे पर भी चर्चा की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने इस संवेदनशील विषय को मानवीय दृष्टिकोण से हल करने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि मछुआरों को जल्द रिहा करना चाहिए और उनकी जब्त नावें लौटाई जानी चाहिए, जिससे उनके आजीविका के साधन प्रभावित न हों।
PM Modi ने तिरुवल्लुवर के उद्धरण से दर्शाया भारत-श्रीलंका संबंध
PM Modi ने भारत-श्रीलंका संबंधों की गहराई और आत्मीयता को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते केवल रणनीतिक या भौगोलिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बंधनों पर आधारित हैं। अपने संबोधन में उन्होंने तमिल संत तिरुवल्लुवर का उद्धरण देते हुए कहा, “दुश्मन के खिलाफ सच्चे मित्र की ढाल और उसकी मित्रता से बड़ी सुरक्षा और क्या हो सकती है?” – यह पंक्तियाँ भारत और श्रीलंका के आपसी संबंधों की भावना को बखूबी दर्शाती हैं।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने बताया कि द्विपक्षीय सुलह और सहयोग पर भी चर्चा हुई है, जिससे पारस्परिक विश्वास और सहयोग को और मजबूती मिलेगी। यह वार्ता भारत-श्रीलंका के संबंधों में सांस्कृतिक, मानवीय और कूटनीतिक दृष्टिकोण से संतुलन बनाए रखने का संकेत देती है।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना, और अब वे खुद राष्ट्रपति के पहले विदेशी मेहमान हैं। यह आपसी सम्मान और विश्वास का प्रतीक है।
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