PM Modi ने इंडिया एनर्जी वीक के उद्घाटन अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों को संबोधित किया। गोवा में आयोजित इस वैश्विक कार्यक्रम में करीब सवा सौ देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी को उन्होंने भारत के लिए गर्व का विषय बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी प्रतिनिधि एक सुरक्षित, टिकाऊ और भरोसेमंद ऊर्जा भविष्य पर चर्चा करने के लिए भारत आए हैं, जो आज के वैश्विक परिदृश्य में सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।
India Energy Week बना ग्लोबल प्लेटफॉर्म: PM Modi
अपने संबोधन में PM Modi ने कहा कि इंडिया एनर्जी वीक बहुत कम समय में ऊर्जा क्षेत्र में संवाद और ठोस कार्रवाई के लिए एक प्रभावशाली वैश्विक मंच बनकर उभरा है। यह आयोजन न केवल नीतिगत चर्चाओं तक सीमित है, बल्कि निवेश, तकनीक और नवाचार के लिए भी नए रास्ते खोल रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब केवल ऊर्जा उपभोक्ता नहीं, बल्कि समाधान देने वाला देश बन रहा है।
भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग और वैश्विक भूमिका
PM Modi ने कहा कि दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की ऊर्जा मांग लगातार बढ़ रही है। औद्योगिक विकास, शहरीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के कारण ऊर्जा उत्पादों की आवश्यकता में तेज़ इज़ाफा हुआ है। इसके साथ ही भारत ने अपनी रिफाइनिंग और सप्लाई क्षमताओं को मजबूत करते हुए खुद को वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन में एक अहम खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है।
पेट्रोलियम एक्सपोर्ट में भारत की ताकत
PM Modi ने बताया कि भारत आज पेट्रोलियम उत्पादों के शीर्ष निर्यातकों में शामिल है और 150 से अधिक देशों को ईंधन की आपूर्ति कर रहा है। यह भारत की तकनीकी क्षमता, कुशल मानव संसाधन और मजबूत रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति अब आत्मनिर्भरता के साथ-साथ वैश्विक जिम्मेदारी को भी दर्शाती है।
भारत–यूरोपीय यूनियन की ‘मदर ऑफ ऑल डील’
PM Modi ने अपने संबोधन में भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते का भी जिक्र किया, जिसे उन्होंने ‘मदर ऑफ ऑल डील’ कहा। उनके अनुसार, यह समझौता वैश्विक जीडीपी के करीब 25 प्रतिशत और दुनिया के कुल व्यापार के लगभग एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। यह डील ऊर्जा, निवेश और व्यापार के क्षेत्र में भारत के लिए बड़े अवसर लेकर आई है।
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रिफाइनिंग कैपेसिटी और निवेश के अवसर
PM Modi ने बताया कि भारत की मौजूदा रिफाइनिंग क्षमता 260 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जिसे आने वाले वर्षों में 300 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि भारत का ऊर्जा क्षेत्र स्थिर नीति, स्पष्ट विज़न और दीर्घकालिक अवसरों से भरा हुआ है। पीएम मोदी ने कहा कि यह समय भारत के ऊर्जा सेक्टर में निवेश के लिए सबसे उपयुक्त है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने दोहराया कि भारत वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में साझेदारी, नवाचार और सतत विकास के सिद्धांतों के साथ आगे बढ़ रहा है।
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