Delhi Race Course जमीन विवाद: Saurabh Bharadwaj का BJP सरकार पर हमला, गरीबों के मकान तोड़ने का आरोप

दिल्ली के रेस कोर्स क्षेत्र को लेकर सियासत तेज हो गई है। Saurabh Bharadwaj ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि वह यहां रह रहे गरीब परिवारों को उजाड़ने की तैयारी कर रही है। AAP के दिल्ली प्रदेश संयोजक Saurabh Bharadwaj ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि भाजपा सरकार की नजर अब रेस कोर्स की जमीन पर है और वह यहां बसे लोगों के मकान छीनना चाहती है।
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर गरीबों को हटाने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने वर्षों से इस क्षेत्र में रहकर अपनी आजीविका और जीवन बसाया है, उन्हें अचानक बेघर करने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, यह कदम सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
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“वादा कर मुकर गई भाजपा सरकार”: Saurabh Bharadwaj
AAP नेता ने भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रवेश वर्मा का नाम लेते हुए कहा कि एक वर्ष पहले उन्होंने यहां के लोगों से वादा किया था कि किसी का मकान नहीं टूटने देंगे। भारद्वाज का दावा है कि उस समय प्रवेश वर्मा ने सार्वजनिक रूप से लोगों को भरोसा दिलाया था कि उनके घर सुरक्षित रहेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब जब प्रवेश वर्मा सरकार में मंत्री पद पर हैं, तो वे इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। भारद्वाज ने कहा कि मंत्री क्षेत्र में आने से भी बच रहे हैं और लोगों के सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं।
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AAP ने की गरीबों के पुनर्वास की मांग
AAP ने मांग की है कि यदि सरकार किसी भी प्रकार का विकास कार्य करना चाहती है, तो पहले वहां रहने वाले परिवारों के पुनर्वास की स्पष्ट और लिखित योजना सामने रखे। पार्टी का कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के किसी भी परिवार को हटाना अमानवीय होगा।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली की राजनीति में यह मुद्दा केवल जमीन का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य का है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बड़े प्रोजेक्ट्स के नाम पर कमजोर वर्गों को हाशिये पर धकेल रही है।
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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
इस मुद्दे पर भाजपा की ओर से अभी विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में बयानबाजी तेज हो गई है। AAP का कहना है कि वह इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी और जरूरत पड़ी तो आंदोलन भी करेगी।
वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में जमीन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दे हमेशा संवेदनशील रहे हैं। रेस कोर्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में किसी भी कार्रवाई का असर व्यापक राजनीतिक बहस को जन्म दे सकता है।
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