चुनाव खत्म होते ही बेल! Saurabh Bharadwaj ने ED की कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल

दिल्ली और पश्चिम बंगाल की राजनीति के बीच एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। Saurabh Bharadwaj ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यवाही पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे “लोकतंत्र का मज़ाक” बताते हुए कहा कि एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक मकसद से किया जा रहा है।
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चुनाव के तुरंत बाद बेल पर सवाल
Saurabh Bharadwaj ने आरोप लगाया कि I-PAC से जुड़े मामले में जिस तरह से कार्रवाई की गई और फिर पश्चिम बंगाल चुनाव खत्म होते ही आरोपी को बेल मिल गई, वह कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर PMLA जैसे मामलों में इतनी जल्दी बेल मिलना आसान नहीं होता, लेकिन इस केस में ED ने बेल का विरोध ही नहीं किया। उनके मुताबिक, यह पूरी प्रक्रिया संदिग्ध लगती है और इसकी टाइमिंग राजनीतिक दखल की ओर इशारा करती है।
ED की भूमिका पर उठे सवाल
AAP नेता Saurabh Bharadwaj ने कहा कि अगर ED चाहती तो बेल का विरोध कर सकती थी, जिससे प्रक्रिया लंबी होती। उन्होंने दावा किया कि एजेंसी ने जानबूझकर विरोध नहीं किया, जिससे आरोपी को जल्द राहत मिल गई। Saurabh Bharadwaj ने BJP और RSS समर्थकों से भी अपील की कि वे इस मामले पर गंभीरता से विचार करें और समझें कि क्या एजेंसियों का इस्तेमाल निष्पक्ष तरीके से हो रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने ED पर लगाया ‘लोकतंत्र का मज़ाक’ बनाने का आरोप
Saurabh Bharadwaj ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों का इस्तेमाल विपक्षी दलों पर दबाव बनाने के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है और यह जनता के विश्वास को कमजोर करती है।
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I-PAC पर कार्रवाई और प्रभाव
AAP नेता Saurabh Bharadwaj के अनुसार, I-PAC, जो पश्चिम बंगाल चुनाव में Mamata Banerjee की पार्टी के साथ काम कर रही थी, को चुनाव से ठीक पहले कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि I-PAC के दफ्तरों पर छापे मारे गए, उसके अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया और कर्मचारियों से पूछताछ की गई। उनके मुताबिक, इस कार्रवाई का सीधा असर संगठन के चुनावी कामकाज पर पड़ा और कई कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजना पड़ा।
इस मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने I-PAC के को-फाउंडर विनेश कुमार चंदेल को नियमित जमानत दे दी। अदालत ने यह ध्यान में रखा कि ED ने जमानत का विरोध नहीं किया और आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है। अदालत ने उन्हें 2 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती बॉन्ड पर राहत दी। साथ ही शर्त रखी गई कि वह बिना अनुमति देश नहीं छोड़ेंगे और जांच में सहयोग करते रहेंगे।
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