‘Congress महिला विरोधी नहीं’—Shashi Tharoor ने Rijiju के दावे को बताया गलत

दिल्ली की सियासत में एक बार फिर बयानबाज़ी ने नया मोड़ ले लिया है। कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि थरूर ने अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस को “महिला विरोधी” मानने की बात स्वीकार की थी। थरूर ने साफ कहा कि इस तरह की व्याख्या गलत है और उनकी बातचीत को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है।
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‘मजाक को मुद्दा बनाया गया’: Shashi Tharoor
मीडिया से बातचीत में थरूर ने स्पष्ट किया कि उनकी और रिजिजू के बीच हुई बातचीत हल्के-फुल्के अंदाज़ में थी। उन्होंने कहा कि संसद सत्र खत्म होने के बाद दोनों के बीच मजाक चल रहा था और उसी दौरान यह बात हुई थी। थरूर ने कहा, “कोई भी मुझे महिला विरोधी नहीं मानेगा, और यही बात मेरी पार्टी पर भी लागू होती है।” उनके अनुसार, इस बातचीत को गंभीर राजनीतिक बयान के रूप में पेश करना गलत है।
महिला आरक्षण पर Congress का रुख
थरूर ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस का महिला आरक्षण को लेकर रुख हमेशा स्पष्ट और सकारात्मक रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि 2013 में कांग्रेस सरकार के दौरान राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ था। इसके अलावा, हाल के वर्षों में भी जब केंद्र सरकार ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाया, तब कांग्रेस ने उसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पार्टी महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के पक्ष में हमेशा खड़ी रही है।
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Shashi Tharoor ने डिलिमिटेशन पर असहमति जताई
थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस का विरोध महिला आरक्षण से नहीं, बल्कि उसे डिलिमिटेशन प्रक्रिया से जोड़ने के तरीके से है। उन्होंने कहा कि सरकार महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सीटों के पुनर्गठन (डिलिमिटेशन) को अनावश्यक रूप से जोड़ रही है। उनके मुताबिक, इससे प्रक्रिया में देरी हो सकती है और असली मुद्दा पीछे छूट सकता है। उन्होंने कहा कि अगर महिला आरक्षण को अलग से लाया जाए, तो कांग्रेस उसका पूरा समर्थन करेगी।
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रिजिजू का दावा और विवाद
यह विवाद तब बढ़ा जब किरन रिजिजू ने एक इंटरव्यू क्लिप साझा करते हुए दावा किया कि थरूर ने बातचीत के दौरान उनकी बात से सहमति जताई थी। रिजिजू के अनुसार, उन्होंने थरूर से कहा था कि भले ही उन्हें कोई महिला विरोधी न माने, लेकिन उनकी पार्टी को ऐसा माना जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पर थरूर ने किसी तरह की आपत्ति नहीं जताई, जिसे उन्होंने सहमति के रूप में लिया।
यह पूरा विवाद उस संवैधानिक संशोधन विधेयक के संदर्भ में सामने आया है, जिसे संसद के विशेष सत्र के दौरान पेश किया गया था। इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर महिला आरक्षण लागू करना था। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसे डिलिमिटेशन से जोड़ने का विरोध किया, जिसके चलते बिल लोकसभा में पास नहीं हो सका।
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