Sonam Wangchuk अस्पताल से छुट्टी के बाद जाएंगे राजघाट, फिर लौटेंगे लद्दाख

एक्टिविस्ट Sonam Wangchuk ने सोमवार को कहा कि उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल रही है और लद्दाख लौटने से पहले वे महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने राजघाट जाएंगे।
X पर एक पोस्ट में Sonam Wangchuk ने कहा कि वे सबसे पहले राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे। उन्होंने याद दिलाया कि स्विट्जरलैंड से लौटने के बाद जंतर-मंतर पर अपना अनशन शुरू करने से पहले भी उन्होंने ऐसा ही किया था।
उन्होंने कहा, “आखिरकार वह दिन आ ही गया जब मुझे इस अस्पताल से छुट्टी मिल रही है। आज, यहां से निकलने और लद्दाख स्थित अपने घर लौटने से पहले, मैं बापू (महात्मा गांधी) को श्रद्धांजलि देने राजघाट जाऊंगा।”
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Sonam Wangchuk ने राजघाट जाने का फैसला क्यों किया?
अपने अभियान की शुरुआत को याद करते हुए Sonam Wangchuk ने कहा, “आपको शायद याद होगा कि इसी तरह, जब मैं स्विट्जरलैंड से लौटा था, तो अनशन शुरू करने से पहले हमने राजघाट पर श्रद्धांजलि दी थी और फिर जंतर-मंतर गए थे। आज हम फिर वैसा ही करेंगे और उसके बाद लद्दाख स्थित अपने घर के लिए रवाना हो जाएंगे।”
वहाँ से निकलने से पहले, वांगचुक ने इस मुहिम को समर्थन देने के लिए देश भर के लोगों का शुक्रिया अदा किया।उन्होंने कहा, “जाने से पहले, मैं आप सभी का दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ।
देश भर से, पास और दूर से, हर उम्र के लोग एक मुहिम या आंदोलन चलाने के लिए हमारे साथ जुड़े और हम इसमें कामयाब भी रहे। और आगे भी ऐसा ही चलता रहेगा; मुझे उम्मीद है कि मैं आप सभी से जुड़ा रहूँगा। सलाम, नमस्कार और जुले, जय हिंद।”
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CJI की टिप्पणी के बाद विरोध-प्रदर्शन का क्या हुआ?
37 दिनों तक चले विरोध-प्रदर्शन का समापन शनिवार दोपहर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के साथ हुआ। CJI सूर्यकांत की टिप्पणियों के बाद एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया अकाउंट के तौर पर शुरू हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने अपनी मांगों पर सरकार से आश्वासन मिलने के बाद जंतर-मंतर से अपना विरोध-प्रदर्शन वापस ले लिया।
NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफ़ा दे दिया।
आमतौर पर शांत रहने वाले जंतर-मंतर विरोध स्थल पर तब हलचल मच गई
, जब युवा और छात्र CJP के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए क्रिएटिव बैनर और ‘जेन-ज़ी’ (Gen Z) स्लैंग के साथ पहुँचे। एक हफ़्ते से ज़्यादा समय तक चले इस विरोध प्रदर्शन को तब नई गति मिली, जब लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक इसमें शामिल हुए और अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल के ज़रिए इस आंदोलन का चेहरा बन गए।
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