Jalandhar कोर्ट का बड़ा फैसला: BJP नेता Kapil Mishra द्वारा साझा किया गया वीडियो फर्जी

जालंधर की एक अदालत ने श्री गुरु तेग बहादुर जी से जुड़े एक वायरल वीडियो को लेकर अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली BJP सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा साझा किया गया यह वीडियो फर्जी है और इससे भ्रामक जानकारी फैलाई गई। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उक्त वीडियो तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

मामला क्या है

यह विवाद उस वीडियो से जुड़ा है, जिसे कपिल मिश्रा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर शेयर किया था। आरोप है कि इस वीडियो में श्री गुरु तेग बहादुर जी से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया और इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची। याचिका में कहा गया कि यह सामग्री भ्रामक है और समाज में तनाव पैदा कर सकती है। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष तकनीकी और तथ्यात्मक साक्ष्य रखे गए, जिनके आधार पर वीडियो को फर्जी बताया गया।

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कोर्ट का सख्त रुख: हटाने का आदेश

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक मंचों पर गलत और भ्रामक सामग्री का प्रसार न केवल कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचाता है। इसी आधार पर कोर्ट ने सभी सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दिया कि वे इस वीडियो को तुरंत हटाएं और आगे इसके प्रसार पर रोक लगाएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों पर गलत जानकारी फैलाना अत्यंत संवेदनशील और गंभीर विषय है।

BJP नेताओं द्वारा शेयर किए जाने का आरोप

याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना है कि कपिल मिश्रा द्वारा वीडियो साझा किए जाने के बाद भाजपा के कुछ अन्य नेताओं ने भी इसे आगे बढ़ाया, जिससे यह तेजी से वायरल हुआ। अदालत में यह दलील दी गई कि जब प्रभावशाली राजनीतिक चेहरे ऐसी सामग्री साझा करते हैं, तो उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है और गलत सूचना बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचती है। इसी कारण इस मामले को सामान्य नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक प्रभाव वाला माना गया।

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राजनीतिक प्रतिक्रिया और विपक्ष का हमला

कोर्ट के आदेश के बाद विपक्षी दलों ने कपिल मिश्रा और भाजपा पर तीखा हमला बोला। विपक्ष का कहना है कि इस तरह के वीडियो साझा कर धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश की गई। उन्होंने मांग की कि जब अदालत ने इसे फर्जी करार दे दिया है, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जानी चाहिए। विपक्षी नेताओं ने इसे “गैर-जिम्मेदार राजनीति” का उदाहरण बताया।

कोर्ट के निर्देश के बाद अब सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे आदेश का पालन करते हुए वीडियो को अपने प्लेटफॉर्म्स से हटाएं। हाल के वर्षों में फर्जी वीडियो और भ्रामक सूचनाओं को लेकर प्लेटफॉर्म्स की भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। यह आदेश संकेत देता है कि न्यायिक निर्देशों के पालन में किसी भी तरह की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

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