Sambhal में हज़रत मुफ़्ती अजमल शाह क़ादरी का 64वाँ उर्स धूमधाम से मनाया गया

बनारस से आए मुख्य वक्ता मुफ़्ती आसिफ़ मिस्बाही ने मुफ़्ती अजमल शाह की विद्वता और उनके फ़तावा अजमलिया की विश्वसनीयता की प्रशंसा की।

यूपी के जनपद Sambhal में मरकज़ी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उल उलूम के संस्थापक हज़रत मुफ़्ती अजमल शाह क़ादरी का 64वाँ उर्स बड़े धूमधाम से मनाया गया। क़ुल शरीफ़ की तक़रीब में हज़ारों अकीदतमंदों की भीड़ जमा हुई। कार्यक्रम की शुरुआत क़ुरआन पाक की तिलावत से क़ारी सलमान ने की, लुक़मान अजमली ने हम्द पेश किया और उज़ैर अजमली व उसामा अजमली ने नाते पाक पेश किए। सैफ़ुल्लाह सुल्तानी और मुफ़्ती ए आज़म क़ारी अलाउद्दीन अजमली ने मनक़बत का नज़राना पेश किया।

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The 64th Urs of Hazrat Mufti Ajmal Shah Qadri was celebrated with great pomp in Sambhal.

ख़्वाजा कलीम अशरफ़ सम्भली ने कहा कि मुफ़्ती अजमल शाह पूरे हिन्दुस्तान के बड़े आलिम और बड़े मुफ़्ती थे। उन्होंने सदरुल अफाज़िल हज़रत सय्यद नईमुद्दीन मुरादाबादी के शागिर्द होने और अपने उस्ताद से गहरा लगाव होने का जिक्र किया। मुफ़्ती आलम नूरी ने कहा कि मरकज़ी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उल उलूम हमेशा एक मरकज़ रहा है और रहेगा, और किसी के प्रयासों से इसे खत्म नहीं किया जा सकता।

बनारस से आए मुख्य वक्ता मुफ़्ती आसिफ़ मिस्बाही ने मुफ़्ती अजमल शाह की विद्वता और उनके फ़तावा अजमलिया की विश्वसनीयता की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि शाह साहब को कभी दुनियावी लाभ का लालच नहीं रहा और हैदराबाद के निज़ाम द्वारा दिए गए भौतिक प्रलोभन को उन्होंने ठुकरा दिया। उन्होंने मदीना शरीफ़ में अरबी भाषा में मुनाज़िरा जीतने का उदाहरण भी साझा किया।

सलातो सलाम के बाद क़ारी तनज़ीम अशरफ़ अजमली ने मुल्क और क़ौम की सलामती के लिए दुआ करायी। पूरे प्रोग्राम की व्यवस्था क़ारी वसी अशरफ़ और तक़ी अशरफ़ एडवोकेट ने संभाली। मोहल्ला खग्गू सराय के सरफ़राज़ अजमली, सुब्हान अजमली और अन्य लोगों ने उर्स में आए लोगों को लंगर खिलाया। क़ादरी नौशाही टीम और सरताज साहब की ओर से चादर पेश की गई।

The 64th Urs of Hazrat Mufti Ajmal Shah Qadri was celebrated with great pomp in Sambhal.

कार्यक्रम में सांसद Sambhal ज़ियाउर रहमान बर्क़, चेयरपर्सन पति चौधरी मुशीर, मुफ़्ती निसार रिज़वी, मुफ़्ती ग़ुलाम ग़ौस अज़हरी, सय्यद शामी मियाँ, सय्यद आमिर मियाँ, सय्यद माजिद मियाँ, सय्यद कलीम अशरफ़, मुफ़्ती महबूब वास्ती, मौलाना ज़हीरुल इस्लाम, मौलाना क़ारी राशिद रिज़वी, मौलाना नूर आलम, मौलाना अहसान, मौलाना अब्दुल हफ़ीज़, मौलाना नईम, मौलाना शरीफ़, मौलाना अनीस, क़ारी शुऐब अशरफ़ी ज़ियाई, क़ारी यूसुफ़ रज़ा, क़ारी अब्दुल वकील, क़ारी जमशेद, क़ारी अहसान, क़ारी यज़दानी, क़ारी आमिर, क़ारी मज़हर, क़ारी ग़ुलाम मुदस्सिर, क़ारी मुज्तबा हसन, क़ारी मुस्तफ़ा हसन, मौलाना शमशाद, क़ारी हनीफ़, क़ारी मुअज़्ज़म सहित मुरादाबाद मंडल, राजस्थान, बिहार और बंगाल से भी कई लोग मौजूद रहे।

मदरसा कमेटी से हाजी ज़फ़ीर अहमद, सय्यद अब्दुल क़दीर, फ़रीद एडवोकेट और हाजी नदीम ने आगंतुकों का धन्यवाद किया।

Sambhal से खलील मलिक कि ख़ास रिपोर्ट

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