‘आपकी हमदर्दी महिलाओं के लिए नहीं’—Yogi Adityanath का विपक्ष पर तीखा हमला

उत्तर प्रदेश विधानसभा में महिला आरक्षण को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनकी “हमदर्दी असल में महिलाओं के लिए नहीं है।” उन्होंने कहा कि विपक्ष एक ओर महिला सशक्तिकरण की बात करता है, वहीं दूसरी ओर संसद और विधानसभा में ऐसे कदमों का विरोध करता है।

Yogi Adityanath ने विपक्ष की नीयत पर उठाए सवाल

विधानसभा को संबोधित करते हुए Yogi Adityanath ने कहा कि यदि विपक्ष आज 33% महिला आरक्षण की वकालत कर रहा है, तो संसद में इसका विरोध क्यों किया गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष का व्यवहार ऐसा है कि “गिरगिट भी शरमा जाए।” उनके अनुसार, महिला आरक्षण पर विपक्ष का रुख अवसरवादी रहा है और यह उनकी सोच को उजागर करता है।

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‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र

मुख्यमंत्री ने 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे दलों ने इस प्रक्रिया के दौरान बाधाएं खड़ी कीं और उनका व्यवहार “महिला विरोधी मानसिकता” को दर्शाता है।

सरकारी योजनाओं पर भी घेरा

Yogi Adityanath ने विपक्ष पर यह भी आरोप लगाया कि वह जन-कल्याणकारी योजनाओं का पहले विरोध करता है और बाद में उनका श्रेय लेने की कोशिश करता है। उन्होंने 2014 में जनधन योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि विपक्ष ने उस समय इसका मजाक उड़ाया था, लेकिन आज वही योजनाएं गरीबों के जीवन में बदलाव ला रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पहली बार सीधे लाभार्थियों के खातों में पैसा पहुंचाने की व्यवस्था लागू की।

अपने भाषण में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने 1995 के चर्चित गेस्ट हाउस कांड और राजू पाल हत्याकांड जैसे मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि विपक्ष महिलाओं और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील नहीं रहा है। योगी ने आरोप लगाया कि विपक्ष समाज को जाति के आधार पर बांटता है, लेकिन वास्तविक मुद्दों पर खड़ा नहीं होता।

विपक्ष की प्रतिक्रिया की पृष्ठभूमि

यह बयान ऐसे समय आया है जब महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज है। विपक्षी दल लगातार सरकार से इस कानून को जल्द लागू करने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि उसने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ठोस कदम उठाए हैं। इसी मुद्दे पर विधानसभा में भी तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

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