NEET Paper Leak पर Congress ने केंद्र को घेरा, Sukhdeo Bhagat बोले- ‘जवाब देने से बच रही सरकार’

Congress सांसद सुखदेव भगत ने बुधवार को पेपर लीक संकट से निपटने के सरकार के तरीके को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से औपचारिक माफ़ी की मांग की।

उन्होंने आरोप लगाया कि शीर्ष नेतृत्व की ओर से जवाबदेही की पूरी तरह कमी रही है।भगत ने कहा, “प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को छात्रों से अपने कार्यों के लिए माफ़ी मांगनी चाहिए, खासकर जिस तरह से स्थिति को संभाला गया…

धर्मेंद्र प्रधान के रुख पर Congress का सवाल, ‘पेपर लीक मामले में दिखा विरोधाभास’

अगर आप धर्मेंद्र प्रधान जी से जुड़े पूरे पेपर लीक मामले को देखें, तो उनमें एक तरह का गर्व दिखाई दिया, मानो उन्होंने कोई असाधारण काम किया हो। यह एक बड़ा विरोधाभास है।

आज भी, प्रधानमंत्री और कैबिनेट सहित पूरी सरकार ज़िम्मेदारी लेने में विफल रही है। इसके बजाय, वे जवाबदेही से बच रहे हैं और वास्तव में, सदन में आने से भी बच रहे हैं।”

ये टिप्पणियां भारी अशांति के दौर के बाद आई हैं, जब NEET पेपर लीक संकट को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा। इन प्रदर्शनों के बाद, सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए नया कानून पेश किया कि ऐसी अनियमितताएं दोबारा न हों।

‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को बुधवार को लोकसभा ने मंज़ूरी दी थी और शुक्रवार को राज्यसभा ने भी इसे पास कर दिया, जबकि वोटिंग के दौरान विपक्ष के सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया।

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Paper Leak Law पर Congress ने उठाए सवाल, जल्दबाज़ी में संशोधन का आरोप

इस कानून को लेकर तीखा राजनीतिक मतभेद पैदा हो गया है। विपक्षी दलों ने केंद्र पर आरोप लगाया है कि उसने जल्दबाज़ी में ये संशोधन किए हैं और बार-बार होने वाले पेपर लीक की असल वजहों को दूर करने में नाकाम रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह बिल असल में सिस्टम में सुधार लाने के बजाय छात्रों के बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को शांत करने के लिए लाया गया था।

हालांकि, केंद्र ने इन संशोधनों का बचाव करते हुए कहा है कि ये 2024 के कानून को लागू करने के बाद मिले अनुभवों से सीखने की सरकार की इच्छा को दिखाते हैं।

सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों का मकसद परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने और असली उम्मीदवारों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी ढांचे को और मज़बूत करना है।

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