SIR पर Akhilesh Yadav का बड़ा हमला: वोटरों को परेशान करने की साजिश

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर भारतीय जनता पार्टी और चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। Akhilesh Yadav ने कहा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा बड़ा सवाल बनाएगी।
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SIR पर सियासी घमासान तेज
सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान Akhilesh Yadav ने कहा कि समाजवादी पार्टी लगातार लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा चुनाव में जनता ने भाजपा को चुनौती दी थी और अब आगामी चुनावों में भी विपक्ष जनता के मुद्दों को लेकर मैदान में उतरेगा।
Akhilesh Yadav ने कहा, “समाजवादी पार्टी एक संघर्ष कर रही है। हमने हाल ही में लोकसभा चुनाव में भी उन्हें हराया है और अब हम इन सभी मुद्दों को जनता के बीच ले जाएंगे। SIR जैसी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध को कमजोर करने और मतदाताओं को लगातार परेशान करने के लिए किया जा रहा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया ने आम नागरिकों के सामने पहचान और नागरिकता से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अखिलेश ने कहा कि कई प्रतिष्ठित और जाने-माने लोगों को भी अपनी नागरिकता और मतदाता पहचान से जुड़े सवालों का सामना करना पड़ा है।
Akhilesh Yadav का आरोप- SIR से वोटरों को किया जा रहा है परेशान
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि कई ऐसे लोगों के नाम भी मतदाता सूची से गायब पाए गए, जो लंबे समय से मतदान प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैंने सुना है कि कई जाने-माने लोगों को भी अपनी नागरिकता के बारे में सवालों का सामना करना पड़ा है, सिर्फ इसलिए कि उनके नाम SIR के दौरान सूची से बाहर पाए गए। यह दिखाता है कि हम किस तरह की प्रशासनिक जटिलताओं में फंसते जा रहे हैं।”
Akhilesh Yadav ने दावा किया कि यह केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता का अधिकार सर्वोपरि होना चाहिए और ऐसी कोई भी प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए जिससे लोगों में भ्रम या भय का माहौल बने।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा
Akhilesh Yadav का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी और विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक आगामी चुनावों में SIR के मुद्दे को प्रमुख चुनावी मुद्दे के रूप में उठाने की रणनीति बना रहे हैं।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं। समाजवादी पार्टी पहले ही दावा कर चुकी है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
चुनाव आयोग का पक्ष
इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने इस साल जनवरी में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के पहले चरण के पूरा होने के बाद आंकड़े जारी किए थे। उनके अनुसार, राज्य में लगभग 12 करोड़ 55 लाख से अधिक मतदाताओं ने अपने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए थे।
निर्वाचन विभाग के मुताबिक, समीक्षा प्रक्रिया के दौरान 46.23 लाख मृत मतदाता, 2.17 करोड़ ऐसे मतदाता जो स्थानांतरित हो चुके थे या उपलब्ध नहीं थे, तथा 25.47 लाख डुप्लीकेट एंट्री वाले मतदाताओं की पहचान की गई। इस प्रक्रिया के बाद कुल मिलाकर लगभग 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किए गए।
चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने के लिए की गई है। हालांकि, विपक्षी दल इस पूरी कवायद की पारदर्शिता और इसके राजनीतिक प्रभावों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
सियासी लड़ाई का नया मोर्चा
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े चुनावी और वैचारिक मुद्दे का रूप लेता दिखाई दे रहा है। एक ओर विपक्ष इसे मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश बता रहा है, तो दूसरी ओर चुनाव आयोग इसे नियमित और आवश्यक प्रक्रिया करार दे रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक गर्माने की संभावना है।
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