Bhuvaneshwari Jayanti 2024: महत्व, पूजा विधि एवं नियम

हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल द्वादशी के दिन Bhuvaneshwari Jayanti मनाई जाती है। देवी भुवनेश्वरी दस महाविद्याओं में से चौथी महाविद्या हैं।देवी भुवनेश्वरी को भुवनेश्वर रुद्र की शक्ति कहा जाता है। देवी भुवनेश्वरी अपने भक्तों को निर्भयता सहित कई प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं।

गृहस्थ लोग संतान प्राप्ति की कामना से देवी भुवनेश्वरी की पूजा करते हैं। देवी पुराण में मिले वर्णन के अनुसार मूल प्रकृति ही देवी भुवनेश्वरी के रूप में विद्यमान है।

देवी भुवनेश्वरी को वामा, ज्येष्ठा और रौद्री आदि नामों से भी संबोधित किया जाता है। देवी स्वयं शताक्षी और शाकंभरी देवी के रूप में विद्यमान हैं। देवी भुवनेश्वरी संपूर्ण सृष्टि की अधिष्ठात्री देवी हैं, वे स्वयं संपूर्ण सृष्टि के रूप में विद्यमान हैं।देवी भुवनेश्वरी आदि शक्ति के रूप में भी लोकप्रिय हैं।

देवी भुवनेश्वरी अपने भक्तों को संतान, धन, ज्ञान और सौभाग्य का सुख प्रदान करती हैं। देवी भुवनेश्वरी मणि द्वीप में निवास करती हैं।महानिर्वाण तंत्र में वर्णित है कि सभी महान विद्वान देवी भुवनेश्वरी की सेवा में तत्पर रहते हैं और सात करोड़ मंत्र देवी माँ की पूजा में लीन रहते हैं।

Bhuvaneshwari Jayanti की प्रमुख विशेषताएँ और प्रतीक:

कमल: भुवनेश्वरी को अक्सर कमल पर बैठे हुए दर्शाया जाता है, जो पवित्रता और सृजन का प्रतीक है।

त्रिशूल: वह एक त्रिशूल (त्रिशूल) धारण करती हैं, जो उनकी दिव्य शक्ति और तीनों लोकों: स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल को नियंत्रित करने की क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है।

डमरू: वह डमरू (ढोल) बजाती हैं, जिसके बारे में माना जाता है कि वह सृजन की ध्वनि पैदा करता है।

नीला रंग: भुवनेश्वरी को अक्सर नीले रंग में दर्शाया जाता है, जो ज्ञान, बुद्धि और अनंत का प्रतीक है।

भुवनेश्वरी का महत्व

ब्रह्मांडीय शक्ति: भुवनेश्वरी को ब्रह्मांडीय शक्ति और ऊर्जा का अंतिम स्रोत माना जाता है।

आध्यात्मिक ज्ञान: माना जाता है कि भुवनेश्वरी की पूजा करने से आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है।

आशीर्वाद और सुरक्षा: भक्त शांति, समृद्धि और बुराई से सुरक्षा के लिए भुवनेश्वरी का आशीर्वाद मांगते हैं।

Bhuvaneshwari Jayanti 2024 महत्व, पूजा विधि एवं नियम

Bhuvaneshwari Jayanti 2024 महत्व, पूजा विधि एवं नियम

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Bhuvaneshwari Jayanti की तिथि और समय

द्वादशी तिथि प्रारंभ – 14 सितंबर, 2024 को शाम 08:41 बजे
द्वादशी तिथि समाप्त – 15 सितंबर, 2024 को शाम 06:12 बजे

Bhuvaneshwari Jayanti का महत्व

ब्रह्मांड की देवी: भुवनेश्वरी को ब्रह्मांड की देवी माना जाता है और माना जाता है कि उनमें दुनिया को बनाने, बनाए रखने और नष्ट करने की शक्ति है।

आध्यात्मिक ज्ञान: माना जाता है कि भुवनेश्वरी की पूजा करने से आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है।

आशीर्वाद और सुरक्षा: भक्त शांति, समृद्धि और बुराई से सुरक्षा के लिए भुवनेश्वरी का आशीर्वाद मांगते हैं।

पूजा: भुवनेश्वरी जयंती पर, भक्त देवी भुवनेश्वरी की पूजा करते हैं, फूल, फल और अन्य प्रसाद चढ़ाते हैं।

उपवास: कुछ भक्त इस दिन आंशिक या पूर्ण उपवास रखना चुन सकते हैं।

मंत्र: देवी भुवनेश्वरी के सम्मान में विशिष्ट मंत्र और प्रार्थनाएँ की जाती हैं।

Bhuvaneshwari Jayanti 2024 महत्व, पूजा विधि एवं नियम

Bhuvaneshwari Jayanti पूजा विधि

Bhuvaneshwari Jayanti हिंदू चंद्र महीने चैत्र के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला एक हिंदू त्योहार है। यह महाविद्याओं (दस महान देवियों) में से एक देवी भुवनेश्वरी की पूजा के लिए समर्पित है।

पूजा विधि (अनुष्ठान):

तैयारी: स्नान करके और साफ कपड़े पहनकर अपने शरीर और मन को साफ करें।अपने पूजा स्थल को फूल, धूप और दीप से सजाएँ।एक साफ वेदी पर देवी भुवनेश्वरी की एक छवि या मूर्ति रखें।

आह्वान: एक दीप और धूप जलाएँ। देवी भुवनेश्वरी का आह्वान करने के लिए निम्नलिखित मंत्र का जाप करें:”ओम नमः भगवते भुवनेश्वरीये नमः”

प्रसाद: देवी भुवनेश्वरी को फूल, फल, मिठाई और धूप चढ़ाएँ। आप नीले फूलों से बनी माला भी चढ़ा सकते हैं, क्योंकि नीला रंग भुवनेश्वरी से जुड़ा हुआ है।

आरती: देवी भुवनेश्वरी की आरती करें (दीपक लहराते हुए), आरती गीत या मंत्रों का जाप करें।

प्रार्थना: देवी भुवनेश्वरी की पूजा करें, उनसे शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान के लिए आशीर्वाद मांगें।

वितरण: पूजा के बाद, अपने आस-पास के लोगों को प्रसाद (पवित्र भोजन) वितरित करें

Bhuvaneshwari Jayanti 2024 महत्व, पूजा विधि एवं नियम

Bhuvaneshwari Jayanti को मनाने का तरीका और महत्व इस प्रकार है 

Bhuvaneshwari Jayanti मनाने के लाभ

आध्यात्मिक ज्ञान: माना जाता है कि भुवनेश्वरी की पूजा करने से आध्यात्मिक ज्ञान और मुक्ति मिलती है।

आशीर्वाद और सुरक्षा: भक्त शांति, समृद्धि और बुराई से सुरक्षा के लिए भुवनेश्वरी का आशीर्वाद मांगते हैं।

सकारात्मक ऊर्जा: ऐसा माना जाता है कि भुवनेश्वरी जयंती मनाने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सद्भाव आ सकता है।

Bhuvaneshwari Jayanti 2024 महत्व, पूजा विधि एवं नियम

Bhuvaneshwari Jayanti देवी की कथा

देवी भागवत में पाए गए वर्णन के अनुसार, एक बार दुर्गम नामक राक्षस ने अपने अत्याचारों से सभी देवी-देवताओं को परेशान कर दिया था।दुर्गम दैत्य के कुकृत्य से व्यथित होकर देवताओं और ब्राह्मणों ने हिमालय पर्वत पर देवी भुवनेश्वरी की आराधना की। देवताओं और ब्राह्मणों की आराधना से प्रसन्न होकर देवी स्वयं बाण, कमल पुष्प, शाक, मूल आदि लेकर वहां प्रकट हुईं। देवी मां ने अपने नेत्रों से जल की हजारों धाराएं प्रकट कीं, जिससे पृथ्वी पर सभी प्राणी तृप्त हो गए।

देवी मां के नेत्रों से बहते आंसुओं के कारण सभी नदियां और समुद्र अपार जल से भर गए और सभी पेड़-पौधे, जड़ी-बूटियां और औषधियां सिंचित हो गईं। देवी भुवनेश्वरी ने दुर्गमासुर से युद्ध कर उसे परास्त किया और देवताओं के समक्ष आए भीषण संकट का समाधान किया। दुर्गमासुर का वध करने के कारण देवी भुवनेश्वरी देवी दुर्गा के नाम से प्रसिद्ध हुईं।

निष्कर्ष

हिंदू चंद्र मास चैत्र के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। यह महाविद्याओं (दस महान देवियों) में से एक देवी भुवनेश्वरी की पूजा के लिए समर्पित है।

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