महाराष्ट्र के CM Fadnavis ने रविवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के ‘सत्ता परिवर्तन’ वाले बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत में सरकारें चुनावों के जरिए तय होती हैं और सरकार बदलने की किसी भी कोशिश को संविधान के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।
ठाकरे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए CM Fadnavis ने कहा, “सबसे पहले तो, उद्धव ठाकरे अपनी खुद की पार्टी शिवसेना में ही सत्ता परिवर्तन को नहीं रोक पाए, तो पता नहीं वह किस दूसरे सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं।
जिस पल उनकी पार्टी ने हिंदुत्व और ‘हिंदू हृदय सम्राट’ बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को छोड़ा, पार्टी के भीतर ऐसी उथल-पुथल मची कि जो लोग बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों पर चलना चाहते थे, उन्होंने ही असली शिवसेना बनाई।”
उन्होंने आगे कहा, “सबसे अहम बात यह है कि मैंने बिल्कुल साफ कर दिया है: भारत के संविधान के खिलाफ लड़ना बंद करें। इस देश में फैसले संसद में और संविधान के अनुसार लिए जाएंगे, न कि सड़कों पर। लोकतंत्र में सरकारें चुनावों के जरिए तय होती हैं।”
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CM Fadnavis का चुनावी संदेश
CM Fadnavis ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में है और फिर से चुनकर आएगी। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग सरकार बदलना चाहते हैं, उन्हें चुनाव लड़ना चाहिए और जनता का समर्थन हासिल करना चाहिए।
CM Fadnavis ने कहा, “आज नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता में है और यह फिर से चुनकर आएगी। लेकिन अगर आप सरकार बदलना चाहते हैं, तो आपको चुनाव लड़ना होगा, लोगों का दिल जीतना होगा और चुनावी जीत हासिल करनी होगी।
जो लोग नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान की तरह भारत में भी संविधान को दरकिनार करके सरकार बदलने का सपना देख रहे हैं, वे अपने इरादों में कभी कामयाब नहीं होंगे।”
महाराष्ट्र के CM Fadnavis ने आगे कहा, “भारत का शासन डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के नेतृत्व में तैयार किए गए संविधान के अनुसार चलता है। इस संविधान की ताकत इतनी है कि यह ऐसी सभी कोशिशों को नाकाम कर देगा।”
इससे पहले शनिवार को, मुंबई में एक पुरस्कार समारोह में शामिल हुए उद्धव ठाकरे ने सरकार बदलने वाली टिप्पणी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर लोगों को चुनाव और विरोध-प्रदर्शन के जरिए अपनी राय रखने का अधिकार नहीं दिया गया, तो उनके पास सरकार बदलने की कोशिश करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा।
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Thackeray का सरकार को जवाब
ठाकरे ने कहा, “अगर आप हमसे चुनाव और विरोध-प्रदर्शन के ज़रिए अपनी राय रखने का अधिकार छीन लेते हैं, तो फिर हम इस सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए ही खड़े हो रहे हैं।”
उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों के दौरान विपक्ष के नेताओं और छात्र कार्यकर्ताओं द्वारा ‘सत्ता परिवर्तन’ (regime change) की बात करने को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। यह विरोध-प्रदर्शन मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर किया जा रहा है।
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा और कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने दिल्ली में सम्मेलनों और प्रेस वार्ता के दौरान, इन विरोध-प्रदर्शनों के संदर्भ में ‘सत्ता परिवर्तन’ (regime change) शब्द का इस्तेमाल किया है या इस पर चर्चा की है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर भारत में बांग्लादेश जैसी राजनीतिक उथल-पुथल दोहराने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिंह ने कहा, “देश के युवाओं को अराजक राजनीति का मोहरा बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। बांग्लादेश की तर्ज़ पर ‘सत्ता परिवर्तन’ (regime change) की कोशिश की जा रही है।”
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