CM Fadnavis ने INDIA गठबंधन के Supreme Court मार्च की आलोचना की

महाराष्ट्र के CM Fadnavis और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के उस विरोध मार्च की आलोचना की जो सुप्रीम कोर्ट तक निकाला गया था।

यह मार्च तब निकाला गया जब भारत के मुख्य न्यायाधीश ने उनसे मिलने का अनुरोध ठुकरा दिया था। CM Fadnavis ने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और न्यायपालिका में जनता का भरोसा कम करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

CM Fadnavis का विपक्ष पर आरोप

महाराष्ट्र के CM Fadnavis ने आरोप लगाया कि विपक्ष न्यायिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कम करने की कोशिश कर रहा है।
फडणवीस ने कहा, “संविधान में ऐसा कहाँ लिखा है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश को विरोध मार्च करने वालों से मिलना ही होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है, वह सही है: अगर आपको कोई शिकायत है, तो आपको कोर्ट जाना चाहिए और कानूनी तरीके से लड़ना चाहिए। विपक्ष ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उन्हें संविधान में कोई भरोसा नहीं है और वे संविधान-विरोधी हैं।”

CM Fadnavis ने आगे आरोप लगाया कि CJI के अपने संवैधानिक कर्तव्यों का कानूनी रूप से पालन करने और यह कहने के बाद कि वे विरोध मार्च करने वालों से नहीं मिल सकते, विपक्ष ने उन्हें गालियां दीं।

महाराष्ट्र के CM Fadnavis ने कहा, “यह भारत की न्यायिक संस्थाओं को बदनाम करने और जनता का भरोसा कम करने की एक साजिश है।”
इस बीच, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने X पर एक पोस्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनकी पार्टी पर भारत के लोकतंत्र की नींव पर हमला करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि वे चुनावी नतीजों पर चुनिंदा तरीके से सवाल उठाते हैं। सरमा ने X पर लिखा, “उनका दोहरा रवैया साफ दिखता है। जब पीएम मोदी प्रधानमंत्री चुने जाते हैं, तो राहुल गांधी इसे हेरफेर कहते हैं, लेकिन संसद के लिए उनका अपना चुनाव और उसके बाद विपक्ष के नेता के तौर पर उनका चुना जाना सवाल से परे है।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस ने असम में चुनावी नतीजों को खारिज कर दिया जबकि केरल में उनका स्वागत किया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी लोकतंत्र को तभी सही मानती है जब उससे कांग्रेस की जीत हो।

CJI द्वारा बैठक के अनुरोध को ठुकराए जाने के बाद INDIA गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का जिक्र करते हुए सरमा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश की सर्वोच्च अदालत पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे।

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उन्होंने कहा, “संवैधानिक संस्थाओं को किसी पार्टी की चुनावी निराशाओं के लिए जवाबदेह नहीं बनाया जा सकता।” सरमा ने यह भी घोषणा की कि असम में बीजेपी अगले दिन से 31 अक्टूबर तक हर ज़िला मुख्यालय पर शांतिपूर्ण बड़ी रैलियां करेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को ब्लैकमेल करने, वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) का विरोध करके अवैध घुसपैठियों को बचाने और लोगों के लोकतांत्रिक जनादेश को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 2047 तक ‘विकसित भारत’ के उनके विज़न के लिए पार्टी के समर्थन को भी दोहराएगा। सरमा ने कहा, “लोगों के जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए। हमारी संस्थाओं को आज़ादी मिलनी चाहिए।

किसी को भी राजनीतिक सुविधा के लिए बंधक नहीं बनाया जा सकता।” ये बातें ऐसे समय में कही गई हैं जब ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन सोमवार को चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च निकालने की योजना बना रहा है।

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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर तेज़ी लाते हुए “चलो दिल्ली” विरोध मार्च का आह्वान किया है। यह मार्च आज दोपहर कनॉट प्लेस से सुप्रीम कोर्ट तक निकाला जाएगा, जिसमें चुनाव आयोग के कामकाज का विरोध किया जाएगा।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा इस मुद्दे पर विपक्षी सांसदों के साथ बैठक की मंज़ूरी न देने के बावजूद यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। राहुल गांधी ने इस विरोध प्रदर्शन के बारे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी बुलाई है। X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “लोकतंत्र के लिए मार्च। न्याय के लिए मार्च। चलो दिल्ली।”

गांधी ने घोषणा की कि ‘इंडिया’ गठबंधन सड़कों पर उतरेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर CJP के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने छात्रों और महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की।

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