UP चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होती जा रही है। इसी बीच ओवैसी द्वारा BJP को सत्ता में लौटने से रोकने के लिए विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की पेशकश किए जाने के बाद Congress नेता इमरान मसूद ने इस संभावना को खारिज कर दिया है।
मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए मसूद ने कहा कि कांग्रेस किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ है और केवल एक पक्ष की नहीं, बल्कि दोनों तरह की सांप्रदायिकता का विरोध किया जाना चाहिए।
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“दोनों कम्युनलिज़्म से लड़ना होगा”
इमरान मसूद ने कहा कि यदि देश में सांप्रदायिक ताकतों का मुकाबला करना है तो यह लड़ाई हर प्रकार की सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “अगर हमें कम्युनलिज़्म से लड़ना है, तो हमें दोनों कम्युनलिज़्म से लड़ना होगा। ऐसा नहीं हो सकता कि आप एक कम्युनलिज़्म को गाली दें और दूसरे से हाथ मिला लें। हमें दोनों से लड़ना होगा।”
मसूद का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं।
विपक्षी एकता पर दिया ज़ोर
हालांकि AIMIM के साथ गठबंधन को लेकर उन्होंने साफ़ इनकार किया, लेकिन विपक्षी दलों की एकजुटता को जरूरी बताया। उनका कहना था कि पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावी नतीजों के बाद विपक्ष को अब एक साथ मिलकर BJP के खिलाफ रणनीति बनानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “बंगाल के बाद अब सोचने का समय नहीं है। यह एक साथ लड़ने का समय है। विपक्षी दलों को एक मंच पर आना होगा।”
Congress-SP सीट शेयरिंग पर क्या बोले मसूद?
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, जो INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं, उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए सीट बंटवारे को लेकर चर्चा कर रही हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मसूद ने कहा कि गठबंधन की राजनीति में सीटों का फैसला बातचीत और आपसी सहमति से होता है।
उन्होंने कहा, “मुझे मांगना और देना दोनों समझ नहीं आता। यह सब एक टेबल पर बैठकर तय होता है। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा।”
उनके अनुसार सीट शेयरिंग को लेकर कोई भी निर्णय सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय औपचारिक बातचीत के माध्यम से ही होना चाहिए।
उम्मीदवार चयन पर Congress का रुख
इमरान मसूद ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों के चयन का अधिकार पूरी तरह कांग्रेस नेतृत्व के पास रहेगा।
उन्होंने कहा, “हम कांग्रेस के लिए उम्मीदवार तय करेंगे। कोई दूसरी पार्टी हमें यह नहीं बताएगी कि हमें कौन से उम्मीदवार उतारने चाहिए।”
इस बयान को कांग्रेस की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
BJP को रोकने के लिए ओवैसी का प्रस्ताव?
सोमवार को AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में BJP को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए किसी भी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा बनने को तैयार है।
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ANI से बातचीत में ओवैसी ने कहा, “हम उत्तर प्रदेश में BJP को सत्ता में लौटने से रोकने के लिए गठबंधन बनाने को तैयार हैं, बशर्ते हमारे साथ सम्मानजनक व्यवहार हो और हमें बराबरी का दर्जा मिले।”
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनकी पार्टी केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि प्रभावी भागीदारी चाहती है।
यूपी विधानसभा का वर्तमान गणित
वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सदस्य हैं। इनमें BJP सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके पास 258 विधायक हैं। समाजवादी पार्टी के पास 107 सीटें हैं।
इसके अलावा अपना दल के 13, राष्ट्रीय लोक दल के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 6 और निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल के 5 विधायक हैं। कांग्रेस और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के 2-2 विधायक हैं, जबकि बहुजन समाज पार्टी के पास केवल 1 विधायक है।
2027 चुनाव से पहले बढ़ेगी सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। AIMIM के गठबंधन प्रस्ताव और कांग्रेस की प्रतिक्रिया ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले महीनों में विपक्षी एकता, सीट बंटवारा और नेतृत्व जैसे मुद्दे प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहने वाले हैं।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि BJP के खिलाफ विपक्ष किस स्वरूप में चुनावी मैदान में उतरता है और क्या कोई व्यापक गठबंधन आकार ले पाता है या नहीं।
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