Dilip Ghosh ने Bengal में महिला सशक्तिकरण पर दिया जोर, कहा- Naxal खतरा ‘लगभग खत्म’

पश्चिम बंगाल के मंत्री Dilip Ghosh ने रविवार को राज्य में महिलाओं के सशक्तिकरण के उपायों पर ज़ोर दिया और कहा कि बंगाल में नक्सली खतरा “लगभग खत्म” हो चुका है। कोलकाता में बोलते हुए घोष ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई प्रावधान और कानून लाए गए हैं और पंचायत स्तर पर भी ऐसे उपाय लागू किए गए हैं।

घोष ने कहा, “महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई प्रावधान और कानून लाए गए हैं। इन्हें पंचायतों में भी लागू किया गया है और बंगाल में महिलाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ रही है।”

Dilip Ghosh ने महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार की पहलों के समर्थन की अपील की

Dilip Ghosh ने कहा कि जो लोग महिलाओं के सशक्तिकरण की वकालत करते हैं, उन्हें सरकार के काम में बाधा डालने के बजाय सकारात्मक बदलाव लाने वाली पहलों का समर्थन करना चाहिए।

मंत्री ने कहा, “जो लोग महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करते हैं, उन्हें सरकार के लिए बाधाएँ खड़ी करने के बजाय सकारात्मक कार्यों का समर्थन करना चाहिए। अगर कोई समस्या है, तो उन्हें सदन के भीतर उसे उठाना चाहिए, उस पर चर्चा और बहस करनी चाहिए ताकि समाधान निकाला जा सके।”

पश्चिम बंगाल सरकार ने भी जून में सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों से निपटने के लिए कानून पेश किया था। ‘पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक, 2026’ को जून में राज्य विधानसभा ने पारित किया था।

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Dilip Ghosh बोले- बंगाल में Naxalवाद का खतरा ‘लगभग खत्म’, सरकार आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपट रही

नक्सलवाद के बारे में Dilip Ghosh ने कहा कि बंगाल में इसका खतरा “लगभग खत्म” हो चुका है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी अन्य चुनौतियों से निपट रही है। घोष ने कहा, “यहां यह लगभग खत्म हो चुका है।

कुछ अन्य आंतरिक खतरे भी हैं जिनसे हम निपट रहे हैं, लेकिन हम उनका मुकाबला कर रहे हैं और उन्हें हल कर लेंगे।” घोष का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए गए

उस भाषण के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने सशस्त्र नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में काफी प्रगति की है। नक्सली-माओवादी विद्रोह ने ऐतिहासिक रूप से पूर्वी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों, जिसमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है, को प्रभावित किया है।

राज्य ने लंबे समय तक माओवादी विद्रोह का सामना किया, खासकर जंगलमहल इलाके में, जिसके बाद सुरक्षा अभियानों और राजनीतिक घटनाक्रमों ने इस सशस्त्र आंदोलन की मौजूदगी को काफी हद तक कम कर दिया।

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