मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में Delhi कैबिनेट ने ‘ Delhi ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस बिल, 2026’ के ड्राफ़्ट पर चर्चा की। इस बिल का मकसद राष्ट्रीय राजधानी में बिज़नेस शुरू करने और चलाने के लिए एक आसान, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी पर आधारित सिस्टम बनाना है।
इस प्रस्तावित कानून का मकसद रेगुलेटरी रुकावटों को कम करना, मंज़ूरी की प्रक्रिया को आसान बनाना और निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है। इसके लिए कम जोखिम वाले उद्योगों के लिए सेल्फ-सर्टिफिकेशन, तय समय में मंज़ूरी और रूटीन इंस्पेक्शन में कमी जैसे सुधार किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस प्रस्तावित बिल का मकसद यह पक्का करना है कि उद्यमी कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने में समय बर्बाद करने के बजाय अपने बिज़नेस को बढ़ाने पर ध्यान दें।
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Rekha Gupta बोलीं, Entrepreneurs का समय Business Growth में लगे, दफ्तरों के चक्कर में नहीं
गुप्ता ने कहा, “हमारा मकसद यह पक्का करना है कि एंटरप्रेन्योर अपना समय अपना बिज़नेस बढ़ाने में लगाएं, न कि एक सरकारी दफ़्तर से दूसरे दफ़्तर के चक्कर लगाने में।”
यह ड्राफ़्ट बिल भारत सरकार की ‘अनुपालन में कमी और डीरेगुलेशन पहल (फेज़ II)’ और ‘जन विश्वास बिल, 2023’ की भावना के अनुसार तैयार किया गया है। इसमें एक ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ का प्रस्ताव है, जिसके ज़रिए बड़े अप्रूवल, रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस, ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) और यूटिलिटी कनेक्शन एक ही ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म से हासिल किए जा सकेंगे।
प्रस्तावित फ़्रेमवर्क के तहत, बिल्डिंग प्लान अप्रूवल, फ़ैक्ट्री लाइसेंस, फ़ायर क्लीयरेंस, पानी और बिजली के कनेक्शन, RERA रजिस्ट्रेशन और दूसरी मंजूरियों जैसी सेवाओं को तय समय-सीमा के भीतर प्रोसेस किया जाएगा।
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Delhi में DSIIDC बनेगा Nodal Agency, Business Approvals की प्रक्रिया होगी आसान
Delhi स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ़्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DSIIDC) नोडल एजेंसी के तौर पर काम करेगा और अलग-अलग विभागों व सिविक बॉडीज़ के बीच अप्रूवल प्रोसेस में तालमेल बिठाने की ज़िम्मेदारी संभालेगा।
इस बिल की एक खास बात ‘डीम्ड अप्रूवल’ (मान लिया गया मंज़ूरी) का प्रावधान है। इसके तहत, अगर तय समय-सीमा के अंदर किसी आवेदन पर फ़ैसला नहीं लिया जाता है, तो उसे अपने-आप मंज़ूरी मिल जाएगी और आवेदक ऑनलाइन पोर्टल से मंज़ूरी डाउनलोड कर सकेंगे।
इस कानून में आग से सुरक्षा, बिल्डिंग की मंज़ूरी, प्रदूषण से जुड़ी अनुमतियों और कम वोल्टेज वाले बिजली कनेक्शन जैसी कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए ‘सेल्फ़-सर्टिफ़िकेशन’ (खुद से सर्टिफ़िकेट देना) का प्रस्ताव भी है। GST, FSSAI, MSMED एक्ट या लेबर कोड के तहत रजिस्टर्ड कारोबारों को कई अलग-अलग लाइसेंस लेने से छूट भी मिल सकती है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में रजिस्ट्रेशन के बाद तीन साल तक नियमित जांच नहीं की जाएगी; जांच केवल गंभीर शिकायतों के मामले में ही होगी। बिल में ‘नेगेटिव लिस्ट’ का तरीका भी अपनाने का प्रस्ताव है, जिससे कारोबारियों को वे सभी गतिविधियां करने की इजाज़त होगी जिन पर खास तौर पर रोक नहीं लगाई गई है।
गुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित सुधार भरोसे पर आधारित गवर्नेंस मॉडल की ओर एक कदम हैं, साथ ही नियमों के वास्तविक उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी बरकरार रखा गया है। उपराज्यपाल और Delhi कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद, इस बिल को आगे की कार्रवाई के लिए गृह मंत्रालय भेजा जाएगा।
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