कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने सोमवार को दावा किया कि सितंबर 2025 में घोषित गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स (GST) दरों में कटौती का असर मिला-जुला रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई ने कई कंज्यूमर गुड्स (उपभोक्ता वस्तुओं) के लिए मिलने वाले फायदों को खत्म कर दिया है।
X पर एक पोस्ट में Jairam Ramesh ने कहा, “सितंबर 2025 में GST दरों में कटौती को ‘गेम-चेंजर’ बताया गया था। बेशक, इनकी लंबे समय से ज़रूरत थी लेकिन इन्हें ‘जादुई छड़ी’ की तरह बताना बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात थी।
असल में, खपत बढ़ाने पर इनका असर ज़्यादा से ज़्यादा मिला-जुला ही रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “उदाहरण के लिए, ऑटोमोबाइल की बिक्री को तो फायदा हुआ, लेकिन कपड़ों की बिक्री को नहीं।”
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Jairam Ramesh ने GST पर सवाल
Jairam Ramesh ने आगे कहा कि कई कंज्यूमर गुड्स की कीमतें एक साल के अंदर ही GST में कटौती से पहले वाले लेवल के करीब पहुँच गईं, जबकि इससे खपत में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई।
उन्होंने कहा, “अब ऐसे सबूत मिल रहे हैं कि तेज़ी से बढ़ती महंगाई की वजह से अलग-अलग चीज़ों पर GST रेट में कटौती का असर बेअसर हो रहा है। कई कंज्यूमर गुड्स की कीमतें एक साल के अंदर ही GST में कटौती से पहले वाले लेवल के करीब पहुँच गईं, जबकि खपत में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई।”
कांग्रेस नेता ने सरकार के आर्थिक नैरेटिव की भी आलोचना की। उन्होंने तिमाही GDP आंकड़ों की व्याख्या पर सवाल उठाए और खपत, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और असल मज़दूरी को लेकर चिंता जताई।
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GDP आंकड़ों पर भी सवाल
Jairam Ramesh ने कहा, “तिमाही GDP के मुख्य आंकड़े भले ही सत्ताधारी खेमे को उनकी कमियों को नज़रअंदाज़ करते हुए कुछ पल के लिए खुशी दे दें, लेकिन भारत की ग्रोथ स्टोरी में कई ऐसी कमियां हैं जिन्हें प्रधानमंत्री और उनके समर्थक मानने को तैयार नहीं हैं।”
उन्होंने कहा, “अलग-अलग इनकम ग्रुप में न तो खपत में तेज़ी है और न ही प्राइवेट इन्वेस्टमेंट बढ़ रहा है। असल वेतन (real wages) में गिरावट आ रही है।”
GST काउंसिल ने सितंबर 2025 में दरों को तर्कसंगत बनाने (rate rationalisation) के लिए बड़े बदलावों को मंज़ूरी दी थी, जिसके तहत कई सामानों और सेवाओं के लिए बदली हुई दरें 22 सितंबर 2025 से लागू हुईं।
सरकार ने इन सुधारों को टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाने, कीमतें कम करने और खपत को बढ़ावा देने वाले उपायों के तौर पर पेश किया था।
रमेश की ये बातें कीमतों के दबाव को लेकर नई चिंताओं के बीच आई हैं।
अगस्त 2026 में भारत की सालाना रिटेल महंगाई दर बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जिसमें महंगाई का असर खाने-पीने की चीज़ों और ईंधन से आगे बढ़कर कपड़े और घरेलू सामान जैसी कैटेगरी तक फैल गया है।
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