Jairam Ramesh का बड़ा आरोप, Ram Mandir चढ़ावा चोरी पर सवाल

कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में दायर चार्जशीट पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि जांच पूरी हो चुकी है और चढ़ावे की चोरी के अलावा कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है।
‘X’ पर एक पोस्ट में Jairam Ramesh ने कहा कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच के लिए सरकार द्वारा बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) पर जनता को कभी भरोसा नहीं था, और चार्जशीट से सामने आई जानकारी ने शक को और गहरा कर दिया है।
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चढ़ावा चोरी SIT जांच पर सवाल
Jairam Ramesh ने कहा, “हमने पहले दिन से ही कहा था कि देश के लोगों को भगवान श्री राम के अयोध्या मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच के लिए सरकार द्वारा बनाई गई SIT पर कोई भरोसा नहीं है।
अब, चार्जशीट से सामने आए तथ्यों ने इस जांच और सरकार की मामले को दबाने की कोशिशों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।” Jairam Ramesh ने आरोप लगाया कि सबूत मिलने और FIR दर्ज होने के बीच काफी देरी हुई।
उन्होंने कहा, “चार्जशीट के मुताबिक, 4 जून को बाथरूम में ₹2.25 लाख मिलने का वीडियो चंपत राय को भेजा गया था। 5 जून को उन्हें CCTV फुटेज भी दिखाया गया था। इसके बावजूद, FIR 25 जून को दर्ज की गई।
जब CCTV फुटेज, बरामदगी और संदिग्ध कर्मचारियों की पहचान पहले ही सामने आ चुकी थी, तो आपराधिक कार्रवाई शुरू करने में इतनी देरी क्यों हुई? इन 21 दिनों में असल में किसे बचाने का मौका मिला और क्या छिपाया गया?”
उन्होंने चार्जशीट से कथित चोरी के पैमाने के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “चार्जशीट के मुताबिक, CCTV फुटेज से पता चला है कि चढ़ावे की रकम निकालने की 105 घटनाएं हुईं।
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SIT जांच में अधिकारियों पर सवाल
एक आरोपी को 85 बार पैसे निकालते हुए देखा गया और दूसरे आरोपियों की बार-बार इसमें शामिल होने की बात भी सामने आई है।” यह सवाल उठाते हुए कि ट्रस्ट के सीनियर अधिकारियों को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया, रमेश ने कहा, “SIT को पता था कि सब कुछ सामने आने के तीन दिन बाद भी चंपत राय ने चढ़ावे की चोरी से इनकार किया था।
फिर भी, चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया – वे गवाह क्यों हैं? जनता का भरोसा खोने के बावजूद, वे अभी भी ट्रस्ट में क्यों बने हुए हैं?” उन्होंने तर्क दिया कि जांच की गई सामग्री के पैमाने को देखते हुए जांच का दायरा सीमित लग रहा था।
“70 से 105 मामले सामने आए हैं, हज़ारों डिजिटल मैसेज की जांच की गई है, और बैंक अकाउंट्स व प्रॉपर्टीज़ की भी जांच की बात कही गई है। फिर भी, जांच का दायरा सिर्फ़ आठ आरोपियों तक ही क्यों सीमित रहा? क्या SIT ने पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय की, या मामले को सिर्फ़ छोटे-मोटे लोगों तक ही सीमित रखा?” उन्होंने कहा।
सबसे बड़ा सवाल: क्या इस पूरे मामले के तार BJP-RSS की टॉप लीडरशिप तक जुड़े हैं?” उन्होंने आगे कहा। Jairam Ramesh ने कोर्ट की निगरानी में नई जांच की मांग की।
“जब तक भगवान श्री राम के नाम पर चढ़ाए गए चढ़ावे की चोरी के लिए असली ज़िम्मेदारी तय नहीं हो जाती, तब तक इस मामले को बंद नहीं माना जा सकता… इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए,” उन्होंने कहा।
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Jairam Ramesh ने मांगा जवाब
उन्होंने प्रधानमंत्री से जवाब देने की भी मांग की। “प्रधानमंत्री जी, अपनी चुप्पी तोड़िए — वरना इसका मतलब यही होगा कि चोरों को आपका संरक्षण हासिल है,” उन्होंने कहा।
जब इस मामले से जुड़े आरोपों के बारे में पूछा गया, तो VHP के इंटरनेशनल प्रेसिडेंट आलोक कुमार ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट ने इसकी बारीकी से निगरानी की थी।
उन्होंने कहा, “अयोध्या राम मंदिर मामले की जांच पूरी हो गई है और कोर्ट में 17,000 से ज़्यादा पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच की निगरानी की और SIT का दोबारा गठन किया गया, जिसमें एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया गया।”
कुमार ने कहा कि जांच में चढ़ावे की चोरी की पुष्टि हुई है, लेकिन कोई दूसरी गड़बड़ी नहीं मिली। उन्होंने कहा, “जांच में चढ़ावे की चोरी का पता चला है; आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन पर मुकदमा चलेगा।
चढ़ावे के अलावा कोई गड़बड़ी नहीं मिली और राम लला को चढ़ाई गई कीमती चीज़ें सुरक्षित हैं।” उन्होंने आगे कहा कि अब इस मामले को सुलझा हुआ माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि अब यह विवाद खत्म हो जाना चाहिए। जो लोग दोषी पाए जाएंगे, उन पर मुकदमा चलेगा।”
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