Newsnowसंस्कृतिKalighat Kali मंदिर: माँ काली का पावन शक्ति पीठ

Kalighat Kali मंदिर: माँ काली का पावन शक्ति पीठ

Kalighat Kali मंदिर भक्ति, शक्ति और तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र है। यह केवल एक मंदिर ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव है।

Kalighat Kali मंदिर के इतिहास, धार्मिक महत्व, वास्तुकला, मान्यताओं, प्रमुख त्योहारों और यात्रा मार्ग की विस्तृत जानकारी दी गई है। जानिए कैसे यह पवित्र शक्ति पीठ माँ काली के भक्तों के लिए आस्था और शक्ति का केंद्र बना हुआ है।

सामग्री की तालिका

कालीघाट काली मंदिर: माँ काली की पावन नगरी

Kalighat Kali Temple: The holy Shakti

Kalighat Kali मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र मंदिरों में से एक है। Kalighat Kali मंदिर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित है और इसे माँ काली का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है। इस मंदिर का नाम “कालीघाट” पड़ा क्योंकि यह हुगली नदी के पुराने किनारे (घाट) पर स्थित था।

यह मंदिर 51 शक्ति पीठों में से एक है और मान्यता है कि यहाँ माँ सती के दाहिने पैर की उँगलियाँ गिरी थीं। Kalighat Kali स्थान माँ काली के भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र है और प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।

1. कालीघाट काली मंदिर का इतिहास

1.1 पौराणिक कथा और शक्ति पीठ का महत्व

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव माँ सती के मृत शरीर को लेकर तांडव करने लगे, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माँ सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। इन टुकड़ों के गिरने से भारत के विभिन्न स्थानों पर 51 शक्ति पीठों का निर्माण हुआ।

Kalighat Kali मंदिर उस स्थान पर स्थित है जहाँ माँ सती के दाहिने पैर की उँगलियाँ गिरी थीं। इसलिए इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।

1.2 मंदिर की स्थापना

  • इस मंदिर का सबसे पहला उल्लेख 16वीं शताब्दी में मिलता है।
  • यह मंदिर पहले एक छोटा सा आश्रम था, जिसे बाद में एक भव्य मंदिर में परिवर्तित किया गया।
  • वर्तमान मंदिर का निर्माण 1809 ईस्वी में सबरना रॉय चौधरी परिवार द्वारा कराया गया था।

2. कालीघाट मंदिर की वास्तुकला

2.1 मंदिर का स्वरूप

  • मंदिर का मुख्य भवन एक चार गुंबद वाली संरचना है, जिसे बंगाली स्थापत्य शैली में बनाया गया है।
  • मुख्य गर्भगृह में माँ काली की मूर्ति स्थापित है, जिसे काले पत्थर से बनाया गया है।

2.2 माँ काली की मूर्ति

  • यह मूर्ति काली माता की अन्य मूर्तियों से अलग है।
  • मूर्ति का मुख सोने से मढ़ा हुआ है और उनकी लंबी जीभ बाहर निकली हुई है, जिसे चाँदी से बनाया गया है।
  • माँ काली के चार हाथ हैं, जिनमें वे एक हाथ में तलवार और दूसरे में राक्षस का कटा हुआ सिर पकड़े हुए हैं।
  • उनके अन्य दो हाथों में वरदान और आशीर्वाद देने की मुद्रा है।

2.3 नट मंदिर (Nat Mandir)

गर्भगृह के सामने एक बड़ा नट मंदिर (Nat Mandir) स्थित है, जहाँ भक्तजन पूजा और भजन करते हैं।

2.4 कुंडुपुकुर (Kundupukur)

  • Kalighat Kali एक पवित्र जलकुंड है, जिसे मुक्ति कुंड भी कहा जाता है।
  • भक्त मानते हैं कि यहाँ स्नान करने से पापों का नाश होता है।

3. कालीघाट मंदिर की विशेषताएँ और मान्यताएँ

3.1 माँ काली के रूप की विशेषता

  • Kalighat Kali मंदिर दक्षिणेश्वर काली मंदिर से अलग है, क्योंकि यहाँ की काली मूर्ति अधिक उग्र रूप में दिखाई देती है।
  • भक्तों का मानना है कि माँ काली यहाँ अत्यंत शक्तिशाली रूप में निवास करती हैं और उनके दर्शन मात्र से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

3.2 बलि प्रथा

  • पहले इस मंदिर में पशु बलि (बकरे की बलि) दी जाती थी, लेकिन अब यह प्रथा प्रतिबंधित कर दी गई है।
  • अब केवल कद्दू और नारियल की बलि चढ़ाई जाती है।

3.3 माँ काली की कृपा

  • भक्त मानते हैं कि माँ काली के दर्शन से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
  • व्यापार, स्वास्थ्य, संतान प्राप्ति और सफलता के लिए यहाँ विशेष पूजा कराई जाती है।

4. मंदिर में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

4.1 दुर्गा पूजा

  • दुर्गा पूजा बंगाल का सबसे बड़ा पर्व है और इस दौरान माँ काली की विशेष पूजा की जाती है।
  • नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष आरती और अनुष्ठान होते हैं।

4.2 काली पूजा (दीपावली के दौरान)

  • काली पूजा विशेष रूप से दीपावली की रात को मनाई जाती है।
  • इस दिन रातभर विशेष आरती और हवन किए जाते हैं।

4.3 अमावस्या की विशेष पूजा

  • प्रत्येक अमावस्या (No Moon Night) को यहाँ हजारों भक्त आते हैं, क्योंकि यह दिन माँ काली की पूजा के लिए बहुत पवित्र माना जाता है।

5. कालीघाट काली मंदिर जाने का सही समय और यात्रा मार्

5.1 मंदिर के दर्शन का समय

  • सुबह: 5:00 AM – 2:00 PM
  • शाम: 5:00 PM – 10:30 PM
  • मंगला आरती: सुबह 4:00 AM
  • विशेष आरती: शाम 6:30 PM

5.2 मंदिर कैसे पहुँचे?

Kalighat Kali Temple: The holy Shakti

हवाई मार्ग

  • कोलकाता का नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Netaji Subhash Chandra Bose International Airport) यहाँ से 25 किमी दूर है।

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रेल मार्ग

  • निकटतम रेलवे स्टेशन हावड़ा रेलवे स्टेशन है, जो 6 किमी दूर है।
  • सीलदाह रेलवे स्टेशन भी पास में स्थित है।

सड़क मार्ग

  • कोलकाता के किसी भी कोने से बस, ऑटो और टैक्सी द्वारा मंदिर तक पहुँचा जा सकता है।
  • कोलकाता मेट्रो का कालीघाट मेट्रो स्टेशन भी मंदिर के पास स्थित है।

6. कालीघाट काली मंदिर से जुड़ी रोचक बातें

  1. स्वामी विवेकानंद की माँ भुवनेश्वरी देवी ने इस मंदिर में विशेष पूजा की थी।
  2. रवींद्रनाथ टैगोर भी इस मंदिर के दर्शन के लिए आए थे।
  3. Kalighat Kali मंदिर तांत्रिक साधनाओं के लिए प्रसिद्ध है और यहाँ विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
  4. माँ काली की मूर्ति का चेहरा हर 12 साल में बदला जाता है।

7. निष्कर्ष: माँ काली का दिव्य धाम

Kalighat Kali मंदिर भक्ति, शक्ति और तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र है। यह केवल एक मंदिर ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव है। Kalighat Kali मंदिर में आने से भक्तों को माँ काली की विशाल शक्ति और कृपा का अनुभव होता है। यदि आप कभी कोलकाता जाएँ, तो Kalighat Kali मंदिर के दर्शन अवश्य करें और माँ काली की कृपा प्राप्त करें

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