अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया मुलाकात को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता Pawan Khera ने इस मुलाकात को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि बातचीत के दौरान भारत की गरिमा और कूटनीतिक मजबूती दिखाई नहीं दी।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए Pawan Khera ने कहा कि इस सप्ताह देश और दुनिया ने एक ऐसा दृश्य देखा जिसने उन्हें शर्मिंदा और दुखी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रवैया एक मजबूत लोकतांत्रिक देश के नेता जैसा नहीं लगा।
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“देश का सिर शर्म से झुक गया” : Pawan Khera
कांग्रेस नेता ने कहा कि बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की बॉडी लैंग्वेज और व्यवहार ने कई सवाल खड़े किए। Pawan Khera ने दावा किया कि ऐसा लगा मानो भारत का प्रतिनिधि किसी विश्व शक्ति के सामने आत्मविश्वास से अपनी बात रखने के बजाय दबाव में दिखाई दे रहा हो।
उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता से लोगों को अधिक दृढ़ और स्पष्ट रुख की अपेक्षा थी। खेड़ा ने इसे भारत की छवि के लिहाज से निराशाजनक बताया।
“Excellency” शब्द को लेकर उठाए सवाल
Pawan Khera ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा कथित तौर पर ट्रंप के लिए इस्तेमाल किए गए संबोधन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेताओं को संबोधित करने की स्थापित परंपराएं होती हैं और ऐसे शब्दों का चयन बेहद सोच-समझकर किया जाता है।
खेड़ा ने दावा किया कि बातचीत के दौरान इस्तेमाल किए गए शब्दों और शैली ने यह संदेश नहीं दिया कि दोनों देशों के नेता बराबरी के स्तर पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने इसे भारत की कूटनीतिक परंपराओं के विपरीत बताया।
पूर्व प्रधानमंत्रियों से की तुलना
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्रियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पी.वी. नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह जैसे नेताओं को वैश्विक मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करते देखा है।
Pawan Khera ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा आत्मसम्मान और राष्ट्रीय हितों पर आधारित रही है। खेड़ा के अनुसार, हालिया मुलाकात में वह आत्मविश्वास और दृढ़ता दिखाई नहीं दी जिसकी अपेक्षा की जाती है।
भारतीय नाविकों के मुद्दे को लेकर भी सवाल
Pawan Khera ने तीन भारतीय नाविकों की कथित मौत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस गंभीर मामले पर अमेरिका की ओर से अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई और भारत सरकार भी इस मुद्दे को पर्याप्त मजबूती से नहीं उठा सकी।
उन्होंने कहा कि किसी भी भारतीय नागरिक की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। खेड़ा ने सवाल उठाया कि यदि भारतीय नागरिकों से जुड़ा इतना गंभीर मामला था तो उस पर अधिक सख्त और स्पष्ट प्रतिक्रिया क्यों नहीं दिखाई गई।
विदेश नीति पर कांग्रेस के सवाल
कांग्रेस नेता ने सरकार की विदेश नीति को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी वैश्विक शक्ति के सामने अपनी स्वतंत्र और आत्मविश्वासी पहचान बनाए रखनी चाहिए।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार कई मौकों पर अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संतुलन और राष्ट्रीय स्वाभिमान का वह स्तर प्रदर्शित नहीं कर पाई है जिसकी देश अपेक्षा करता है। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति का आधार राष्ट्रीय हित होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत छवि निर्माण।
राजनीतिक बहस हुई तेज
पवन खेड़ा के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। कांग्रेस जहां प्रधानमंत्री की विदेश नीति और हालिया मुलाकात पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा लगातार यह दावा करती रही है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और प्रभाव लगातार बढ़ा है।
ट्रंप और मोदी की मुलाकात को लेकर जारी यह राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को राष्ट्रीय सम्मान और विदेश नीति से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक बयानबाजी करार दे सकती है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले समय में भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना रहने की संभावना है।
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