भारतीय विज्ञापन जगत के Piyush Pandey का 70 वर्ष की आयु में निधन
Piyush Pandey को विज्ञापन क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनकी शैली ने न केवल ब्रांड्स को मानवीय चेहरा दिया, बल्कि आम लोगों की भावनाओं को भी विज्ञापनों के केंद्र में लाया।

भारतीय विज्ञापन जगत के दिग्गज और पद्मश्री सम्मानित Piyush Pandey का 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने भारतीय विज्ञापन उद्योग को नई पहचान दी और कई ऐसे प्रतिष्ठित अभियान बनाए, जो आज भी जनमानस की स्मृति में जीवित हैं — जैसे ‘हमारा बजाज’, ‘दो बूंद ज़िंदगी की’, पोलियो जागरूकता अभियान, और 2014 का ‘अबकी बार, मोदी सरकार’ चुनावी नारा।
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सूत्रों के अनुसार, पांडे पिछले एक महीने से कोमा में थे और आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।
चार दशक लंबा रचनात्मक सफर

Piyush Pandey ने 1982 में ओगिल्वी एंड माथर इंडिया (अब ओगिल्वी इंडिया) में एक प्रशिक्षु खाता कार्यकारी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। आगे चलकर उन्होंने कंपनी के राष्ट्रीय रचनात्मक निदेशक, कार्यकारी अध्यक्ष (भारत) और वैश्विक मुख्य रचनात्मक अधिकारी जैसे शीर्ष पदों तक का सफर तय किया।
उनकी बहन, प्रसिद्ध गायिका और अभिनेत्री इला अरुण ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा किया: “प्रियजनों, बहुत ही व्यथित मन से सूचित कर रही हूँ कि हमने आज सुबह अपने सबसे प्यारे और महान भाई, पीयूष पांडे को खो दिया है। आगे की जानकारी मेरे भाई प्रसून पांडे द्वारा साझा की जाएगी। प्रिय भाई, आपकी आत्मा को शांति मिले।”
नेताओं और उद्योग जगत का शोक
केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “श्री पीयूष पांडे के निधन की खबर सुनकर दुख हुआ। उन्होंने रोज़मर्रा के मुहावरों, ज़मीनी हास्य और सच्ची गर्मजोशी के माध्यम से भारतीय संचार जगत को बदल दिया।”
Piyush Pandey ने भी श्रद्धांजलि दी: “विज्ञापन जगत में उनका योगदान अतुलनीय है। उनकी रचनात्मकता ने कहानी कहने की कला को नई परिभाषा दी और हमें कई कालातीत विज्ञापन दिए।”
Piyush Pandey के प्रतिष्ठित अभियानों की विरासत

Piyush Pandey ने कई प्रतिष्ठित विज्ञापन अभियानों की कल्पना और क्रियान्वयन किया, जिनमें शामिल हैं:
- फेविकोल बस, फेविकोल फिश, फेविकोल सोफा, और “तोड़ो नहीं, जोड़ो” जैसे अभियान
- अमिताभ बच्चन के साथ पोलियो जागरूकता अभियान – “दो बूंद ज़िंदगी की”
- कैडबरी डेयरी मिल्क – “कुछ खास है”
- वोडाफोन ज़ूज़ू और पग अभियान
- एशियन पेंट्स – “हर घर कुछ कहता है”
- पॉन्ड्स – “गुगली वूगली वूश”
उनकी रचनात्मक सोच ने विज्ञापन जगत को भारतीय संवेदनाओं के करीब लाकर एक नई दिशा दी।
उद्योग जगत में अमिट छाप
Piyush Pandey को विज्ञापन क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनकी शैली ने न केवल ब्रांड्स को मानवीय चेहरा दिया, बल्कि आम लोगों की भावनाओं को भी विज्ञापनों के केंद्र में लाया।
उनका निधन भारतीय विज्ञापन उद्योग के लिए एक युग का अंत माना जा रहा है।
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