PM Modi, बनास डेयरी के UHT प्लांट में आधुनिक प्रणाली का करेंगे उद्घाटन

PM Modi पालनपुर में बनास डेयरी के UHT प्लांट वेयरहाउस में एक आधुनिक स्टोरेज सिस्टम का उद्घाटन करेंगे। ₹31.14 करोड़ की लागत से तैयार इस ‘ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम’ (ASRS) में डेयरी उत्पादों को स्टोर करने और व्यवस्थित करने के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा।

गुजरात CMO के अनुसार, इस वेयरहाउस में 9 स्तरों तक फैले स्टील के रैक हैं और इसमें 11,000 पैलेट स्टोर करने की क्षमता है। ASRS एक ऐसा सिस्टम है, जिसमें क्रेन, शटल, रोबोट और कन्वेयर जैसी मशीनों का उपयोग करके सामान को स्टोर किया जाता है और जरूरत पड़ने पर उसे वापस निकाला जाता है।

एक विशेष सॉफ्टवेयर वेयरहाउस की इन्वेंट्री पर नज़र रखता है और ऑर्डर प्रोसेसिंग को तेज़ बनाता है, जिससे काम में सटीकता आती है और कुल कार्यक्षमता में सुधार होता है।

PM Modi  का आधुनिक ASRS सिस्टम

PM Modi  द्वारा उद्घाटन किए जाने वाले पालनपुर वेयरहाउस में लगे इस ‘मल्टी-डीप’ ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम (ASRS) में ‘मदर-चाइल्ड’ शटल की व्यवस्था है। इसमें ‘मदर’ शटल, ‘चाइल्ड’ शटल को रैक सिस्टम के भीतर तय लेन तक ले जाती है।

इसके बाद ‘चाइल्ड’ शटल रैक के अंदर जाकर पैलेट और बॉक्स को उनकी निर्धारित जगहों पर रखती है और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें वापस निकाल लाती है। पूरी तरह से ऑटोमेटेड होने के कारण इसमें इंसानी दखल बहुत कम होता है, गलतियों की संभावना घटती है और काम की गति तेज़ हो जाती है।

PM Modi के दौरे से जुड़ा पालनपुर में 2015 में स्थापित UHT (अल्ट्रा हीट ट्रीटमेंट) प्लांट दूध और डेयरी उत्पादों को एक विशेष थर्मल ट्रीटमेंट प्रक्रिया से गुजारता है। इससे ये उत्पाद बिना रेफ्रिजरेशन या प्रिजर्वेटिव्स के भी छह महीने तक ताज़ा बने रहते हैं।

इस वेयरहाउस का इस्तेमाल ऐसे ही UHT उत्पादों को स्टोर करने के लिए किया जाएगा, जिनमें ‘काउ-बफेलो गोल्ड’, ‘हाई प्रोटीन लस्सी’, ‘एप्पल ट्रू’, ‘टी स्पेशल’ आदि शामिल हैं। यह UHT प्लांट रोज़ाना 5.5 लाख लीटर दूध प्रोसेस करता है, जिससे सालाना ₹1,050 करोड़ का रेवेन्यू (2025-26 के आंकड़ों के अनुसार) प्राप्त होता है।

इस प्लांट के उत्पादों—जैसे दूध, ‘ट्रू’, मसालेदार छाछ, हाई-प्रोटीन ड्रिंक्स और घी—को भारत के बाज़ारों में बेचा जाता है और सिंगापुर, मालदीव, UAE तथा मलेशिया में निर्यात किया जाता है। फिलहाल, यह प्लांट अपनी अधिकतम क्षमता के लगभग 90 प्रतिशत पर काम कर रहा है।

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फोर्कलिफ्ट से पैलेट का प्रबंधन

PM Modi के बनास डेयरी दौरे के दौरान, पारंपरिक वेयरहाउस में पैकिंग लाइन से आने वाले पैलेट्स को फोर्कलिफ्ट की मदद से इधर-उधर ले जाया और व्यवस्थित किया जाता है। हर पैलेट कहाँ रखा गया है, इसका रिकॉर्ड रखना ज़रूरी होता है, ताकि सामान भेजने (डिस्पैच) के समय उसे आसानी से निकाला जा सके।

हालाँकि, जैसे-जैसे प्रोडक्शन बढ़ता है, पारंपरिक वेयरहाउसिंग की कमियाँ सामने आने लगती हैं। फोर्कलिफ्ट को चलाने के लिए चौड़े रास्ते चाहिए होते हैं, और सामान को एक के ऊपर एक (स्टैकिंग) रखने की ऊँचाई पर पाबंदियाँ होने के कारण ज़्यादा जगह घेरती है।

हज़ारों पैलेट्स के बीच किसी खास बैच को ढूँढ़ने में बहुत समय लग सकता है और इसमें मानवीय गलती (human error) का जोखिम भी बढ़ जाता है। नया ASRS (ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम) मशीनरी और कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर का उपयोग करके पूरी प्रक्रिया को ऑटोमेट कर देता है।

ऑटोमेटेड मशीनें पैकिंग लाइन से आने वाले पैलेट्स को ‘हाई-डेंसिटी रैकिंग सिस्टम’ में तय जगहों पर पहुँचा देती हैं, और हर पैलेट की सटीक लोकेशन कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज हो जाती है। जब किसी खास उत्पाद या बैच की ज़रूरत होती है, तो सिस्टम अपने आप उसे ढूँढ़ लेता है और डिस्पैच एरिया तक पहुँचा देता है।

PM Modi के बनास डेयरी दौरे के दौरान चर्चा में आई इस आधुनिक प्रणाली से कर्मचारियों को पैलेट्स ढूँढ़ने के लिए वेयरहाउस के अंदर जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। पैकिंग लाइन से लेकर अंतिम डिस्पैच तक, हर उत्पाद को उसकी पूरी यात्रा के दौरान ट्रैक किया जा सकता है।

चाहे किसी बैच की जाँच करनी हो या उसे बाज़ार भेजना हो, उसकी सटीक स्थिति का तुरंत पता लगाया जा सकता है। ASRS (ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम) के आने से वेयरहाउस की भूमिका में एक बड़ा बदलाव आया है।

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स्टोरेज क्षमता से सप्लाई पर असर

PM Modi द्वारा उद्घाटन की जाने वाली आधुनिक भंडारण प्रणाली के संदर्भ में, पारंपरिक रूप से वेयरहाउस मुख्य रूप से तैयार माल को रखने की जगह होते थे। इनकी स्टोरेज क्षमता और काम करने की गति इस बात पर असर डालती थी कि कोई प्लांट बाजार में कितना माल भेज सकता है।

PM Modi के बनास डेयरी दौरे के दौरान चर्चा में आई ASRS तकनीक के साथ, वेयरहाउस अब एक ऑटोमेटेड और डेटा-आधारित सिस्टम में बदल रहे हैं, जो पैकिंग लाइन को सीधे बाजार से जोड़ता है। पालनपुर में लगा ASRS, बनास डेयरी में चल रहे व्यापक तकनीकी बदलाव का एक अहम हिस्सा है।

अब तक, ऑटोमेशन का मुख्य फोकस दूध की प्रोसेसिंग और पैकिंग पर था। इस नए सिस्टम के साथ, अब इसे वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन ऑपरेशंस तक भी बढ़ाया जा रहा है।

1969 में स्थापित, बनास डेयरी 1,505 ग्रामीण दुग्ध सहकारी समितियों के जरिए 4.5 लाख से अधिक पशुपालक किसानों से हर दिन औसतन 83 लाख लीटर दूध इकट्ठा करती है।

2024-25 में, इस संस्था का सालाना टर्नओवर ₹21,200 करोड़ से अधिक रहा, जिसमें से कुल रेवेन्यू का 82 प्रतिशत हिस्सा सीधे किसानों को भुगतान के रूप में वापस दिया गया। बनासकांठा क्षेत्र में की जा रही ये पहल, पशुपालन और कृषि के क्षेत्र में स्मार्ट और विज्ञान-आधारित तरीकों को अपनाने की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

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