NewsnowदेशRam Navami पर Bengal में सियासी संग्राम, टीएमसी और बीजेपी आमने-सामने

Ram Navami पर Bengal में सियासी संग्राम, टीएमसी और बीजेपी आमने-सामने

राजनीतिक दलों की इस खींचतान का असर आम जनता पर साफ दिखाई दे रहा है। लोग Ram Navami को शांतिपूर्वक और पारंपरिक तरीके से मनाना चाहते हैं, लेकिन बढ़ती सियासी दखलअंदाजी और सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदगी के कारण उत्सव का माहौल तनावपूर्ण बन गया है।

पश्चिम बंगाल में Ram Navami को लेकर सियासी सरगर्मी तेज़ होती जा रही है। अदालत द्वारा 6 अप्रैल को शोभायात्रा की इजाजत मिलने के बाद जहां बीजेपी और उससे जुड़े कई हिंदू संगठन जोर-शोर से जुलूस निकालने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है।

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कैनिंग में होने वाली विशाल राम नवमी रैली में TMC विधायक शौकत मोल्लाह के शामिल होने की घोषणा ने यह साफ कर दिया है कि अब यह पर्व पूरी तरह से राजनीतिक अखाड़े का हिस्सा बन गया है।

Ram Navami बना सियासी मुद्दा

Political battle in Bengal on Ram Navami, TMC and BJP face to face

टीएमसी की ओर से यह दावा भी किया गया है कि Ram Navami के आयोजकों ने उन्हें औपचारिक निमंत्रण दिया है, जिससे वे भी इस धार्मिक आयोजन में अपनी भागीदारी दिखा सकें। हालांकि, विधायक शौकत मोल्लाह ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी नेता इस मौके को भड़काऊ माहौल तैयार करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि सुकांत मजूमदार, सुवेंदु अधिकारी और दिलीप घोष जैसे भाजपा नेता धर्म का राजनीतिकरण कर समाज में तनाव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

इस सबके बीच राज्य सरकार ने हालात को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बलों की तैनाती की जा रही है। डर इस बात का है कि कहीं राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के चलते यह धार्मिक आयोजन हिंसा या सांप्रदायिक तनाव की चपेट में न आ जाए।

Political battle in Bengal on Ram Navami, TMC and BJP face to face

राजनीतिक दलों की इस खींचतान का असर आम जनता पर साफ दिखाई दे रहा है। लोग Ram Navami को शांतिपूर्वक और पारंपरिक तरीके से मनाना चाहते हैं, लेकिन बढ़ती सियासी दखलअंदाजी और सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदगी के कारण उत्सव का माहौल तनावपूर्ण बन गया है। स्थानीय व्यापारी, दुकानदार और अभिभावक भी चिंतित हैं कि कहीं यह तनाव किसी बड़ी हिंसा में न बदल जाए। इसके चलते प्रशासन को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है और खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं।

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