Pradeep Bhandari ने 1980 की वोटर लिस्ट को लेकर Sonia Gandhi पर निशाना साधा

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक Pradeep Bhandari ने मंगलवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी लगातार “वोट की चोरी” की बात करती हैं, जबकि वे खुद “लोकतंत्र की चोरी” में शामिल रही हैं।

यह बयान तब आया जब राउज़ एवेन्यू में MP/MLA मामलों की विशेष अदालत ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया गया था।

Pradeep Bhandari ने वोटिंग पर कहा

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए Pradeep Bhandari ने कहा कि भारत में वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए नागरिकता एक बुनियादी ज़रूरत है। उन्होंने कहा, “भारत का संविधान कहता है कि वोट देने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना ज़रूरी है।”

इसके अलावा, Pradeep Bhandari ने इस बात पर अहम सवाल उठाए कि गांधी को वोट देने की इजाज़त कैसे मिली। उन्होंने पूछा, “1980 में सोनिया गांधी भारत की नागरिक नहीं थीं।

1980 में कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें पूछा गया था कि जब सोनिया गांधी भारत की नागरिक नहीं थीं, तो उन्हें वोट देने की इजाज़त किस आधार पर दी गई? क्या उन्होंने दस्तावेज़ों में हेराफेरी करने की कोशिश की थी?”

आदेश की ओर इशारा करते हुए Pradeep Bhandari ने कहा कि कोर्ट का मानना ​​है कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने यह भी कहा कि कोर्ट ने पाया है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने संज्ञेय अपराध (cognizable offence) का खुलासा करने का अपना मुख्य काम नहीं किया।

उन्होंने कहा, “कल दिल्ली की एक कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट को यह जांचने का आदेश दिया कि क्या कोई संज्ञेय अपराध हुआ था। जो लोग ‘वोट चोरी’ की बात कर रहे हैं, वे असल में लोकतंत्र की चोरी कर रहे हैं।

अगर आप कोर्ट की टिप्पणी देखें, तो उसमें कहा गया है कि जिस मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मामले को खारिज किया, उसने मामले पर ठीक से विचार नहीं किया और संज्ञेय अपराध का खुलासा करने का अपना मुख्य काम नहीं किया। कोर्ट का यह भी मानना ​​है कि इसकी जांच होनी चाहिए।”

Sonia Gandhi के वोटर लिस्ट केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, नए सिरे से सुनवाई के आदेश

कोर्ट ने दावे को खारिज किया

इससे पहले सोमवार को, कोर्ट ने सिर्फ़ बिना वेरिफ़ाई की हुई फ़ोटोकॉपी के आधार पर शिकायत को खारिज करने की आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि शिकायत को “बिना वेरिफ़ाई किए गए रिकॉर्ड की फ़ोटोकॉपी के आधार पर किए गए बेबुनियाद दावे” के तौर पर खारिज कर दिया गया था।

यह बताते हुए कि वोटर लिस्ट सिर्फ़ भारतीय नागरिकों के लिए होती है, कोर्ट ने उन आरोपों का ज़िक्र किया जिनके मुताबिक़ अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही, 1980 में गांधी का नाम सफ़दरजंग रोड, नई दिल्ली के पते के साथ वोटर लिस्ट में शामिल था।

कोर्ट ने बताया कि कथित तौर पर उनका नाम 1980 में शामिल किया गया, 1982 में हटा दिया गया और 1983 में फिर से जोड़ दिया गया।
यह साफ़ करते हुए कि रिविजनल कोर्ट मजिस्ट्रेट की ज़िम्मेदारियाँ नहीं निभा सकता, स्पेशल जज ने निचली अदालत को मामले पर व्यवस्थित तरीके से फिर से विचार करने का निर्देश दिया: “रिविजनल कोर्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट की भूमिका नहीं निभा सकता।

मामले को वापस भेजा जाता है और इस पर नए सिरे से फ़ैसला किया जाएगा। कोर्ट संबंधित पुलिस अधिकारी से स्टेटस रिपोर्ट मँगाएगी और संबंधित पुलिस अधिकारी की बात सुनने के बाद एक विस्तृत आदेश जारी करेगी।”

अब यह मामला राउज़ एवेन्यू मजिस्ट्रेट कोर्ट में वापस आ गया है, जो 29 सितंबर को तर्कपूर्ण आदेश जारी करने से पहले पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मँगाएगी।

अन्य ख़बरों के लिए यहाँ क्लिक करें

Exit mobile version