CEC विवाद के बीच Rahul Gandhi का रहस्यमयी संदेश

Rahul Gandhi ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज और वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच रविवार को सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी पोस्ट किया।
उन्होंने कहा कि मुश्किल हालात भी शांति का अहसास करा सकते हैं। Rahul Gandhi ने X पर पोस्ट किया, “मुझे समुद्र में तब तैरना पसंद है जब लहरें तेज़ हों। इससे पता चलता है कि उथल-पुथल भी शांति का ही एक रूप है।”
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CEC को लेकर विपक्ष के सवाल
यह पोस्ट ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट के बाद विपक्षी पार्टियों की ओर से चुनाव आयोग के कामकाज पर हो रही आलोचना के बीच आई है।
इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्तियां जताई थीं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने अपनी जानकारी के बिना जारी किए गए कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां जताई थीं।
यह घटनाक्रम गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर “चुनाव में मैच-फिक्सिंग” का आरोप लगाते हुए तीखा हमला करने के एक दिन बाद हुआ है।
Rahul Gandhi ने केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के दावे से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि कुमार ने 2016 में उनसे संपर्क किया था और सुझाव दिया था कि वे बीजेपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ें।
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Rahul Gandhi का Gyanesh पर दावा
Rahul Gandhi ने अपनी पोस्ट में कहा, “पहले, ज्ञानेश कुमार – जो उस समय एक कार्यरत IAS अधिकारी थे – का इस्तेमाल बीजेपी के लिए लोगों को जोड़ने में किया गया। फिर मोदी और शाह ने उन्हें अंपायर बना दिया और भारत के चुनावों में मैच-फिक्सिंग की जिम्मेदारी सौंप दी।”
Rahul Gandhi द्वारा बताई गई रिपोर्ट के अनुसार, थॉमसन ने दावा किया कि यह बातचीत उनके रिटायरमेंट के समय दिल्ली जाने वाली एक फ्लाइट में हुई थी। उन्होंने कहा कि कुमार ने सुझाव दिया था कि वे 2019 का चुनाव बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर लड़ें, सांसद बनें और बाद में मंत्री बनें। थॉमसन ने कहा कि उन्होंने इस कथित प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।
हालांकि, ECI ने SIR फैसलों पर असहमति के आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि इस प्रक्रिया से जुड़े फैसले “आयोग की सर्वसम्मति से” लिए गए थे।
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र डेप्युटेशन पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था और इसका आयोग या उसके IT डिवीज़न के किसी नीतिगत मामले से कोई लेना-देना नहीं था।
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