Raksha Bandhan 2025: इस शुभ मुहूर्त में बांधें राखी

इस वर्ष रक्षा बंधन या राखी बाँधने का सबसे अच्छा समय सुबह 5:47 से दोपहर 1:24 तक रहेगा। राखी बाँधने की अवधि लगभग 7 घंटे 37 मिनट है, जो शुभ मानी जाती है। इस वर्ष रक्षा बंधन पर भद्रा नहीं है।

नई दिल्ली: Raksha Bandhan भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हैं और उनकी कलाई पर राखी बाँधती हैं।

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इसके अलावा, भाई अपनी बहनों को उनकी पसंद के उपहार देने और उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। इस पूरे त्यौहार की सफलता में शुभ मुहूर्त सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है।

यदि राखी शुभ मुहूर्त में बाँधी जाए, तो इसके सकारात्मक प्रभाव होते हैं। हालाँकि, अशुभ मुहूर्त में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित है।

Raksha Bandhan कब है?

Raksha Bandhan 9 अगस्त को मनाया जाएगा। राखी बाँधते समय कुछ अशुभ मुहूर्तों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, जैसे भद्रा, राहु काल, द्विमुहूर्त आदि। तो आइए जानते हैं कि इस वर्ष रक्षाबंधन पर किस समय राखी नहीं बाँधनी चाहिए।

इस वर्ष राखी बाँधते समय इन बातों का ध्यान रखें

Raksha Bandhan 2025: Tie Rakhi in this auspicious time

9 अगस्त यानी रक्षाबंधन के दिन अशुभ समय पर राखी नहीं बाँधनी चाहिए। इस दिन कुछ समय के लिए राहु काल रहेगा। इसके साथ ही गुलिक काल और दुर्मुहूर्त भी रहेगा। आइए जानते हैं समय

दुरमुहूर्त सुबह 8:52 से 9:44 तक
राहु काल सुबह 11:07 से दोपहर 12:44 तक

राखी बाँधने का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष रक्षा बंधन या राखी बाँधने का सबसे अच्छा समय सुबह 5:47 से दोपहर 1:24 तक रहेगा। राखी बाँधने की अवधि लगभग 7 घंटे 37 मिनट है, जो शुभ मानी जाती है। इस वर्ष रक्षा बंधन पर भद्रा नहीं है।

सूत्र समारोह का समय: सुबह 5:47 से दोपहर 1:24 बजे तक

पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त 2025 को दोपहर 3:42 बजे से शुरू होगी
पूर्णिमा तिथि 9 अगस्त 2025 को दोपहर 2:54 बजे समाप्त होगी

रक्षा बंधन अनुष्ठान: राखी के दिन क्या करें

Raksha Bandhan 2025: Tie Rakhi in this auspicious time

रक्षा बंधन के दिन कुछ सरल लेकिन भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण अनुष्ठान होते हैं:

  • बहनें राखी, मिठाई, दीया, रोली और चावल से एक थाली तैयार करती हैं।
  • भाई अपनी दाहिनी कलाई पर राखी बांधते हैं, माथे पर तिलक लगाते हैं और बदले में रक्षा का वचन देते हैं।
  • उपहारों का आदान-प्रदान होता है, जिसके बाद अक्सर साथ में भोजन या मिठाई खाई जाती है।
  • कई परिवारों में, ननद को भी राखी या लुम्बा राखी दी जाती है, जिससे यह अनुष्ठान नए पारिवारिक संबंधों तक पहुँच जाता है।

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