नई दिवाला संरचना और समयसीमा: IBC Amendment Bill 2025 में सुधार प्रस्ताव

IBC Amendment Bill, 2025 निरर्थक देरी और अनियमितता को दूर कर दिवाला प्रक्रिया को प्रभावी, जवाबदेह और तेज़ बनाने का प्रयास है। यह बिल न केवल प्रक्रियात्मक सुधार लाता है, बल्कि नए कानूनी संतुलन और संरचना की दिशा में एक बड़ा कदम है।

नई दिल्ली, अगस्त 2025– केंद्र सरकार ने संसद में IBC Amendment Bill 2025 पेश किया है, जिसका लक्ष्य IBC 2016 की प्रमुख समस्याओं—जैसे देरी, अस्पष्टता, प्रक्रियात्मक बाधाएं—को दूर करना और लेनदारों को अधिक शक्ति व नियंत्रण प्रदान करना है, ताकि वास्तविक प्रवर्तकों को अपनी कंपनियों पर नियंत्रण बनाए रखने का अवसर मिल सके।

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reforms in IBC Amendment Bill 2025
IBC Amendment Bill 2025

IBC Amendment Bill 2025 में सुधार:

सुधार क्षेत्रमुख्य बदलाव
समय सीमा को प्रभावी बनानानवीनीकृत धारा 7 में कहा गया है कि यदि डिफ़ॉल्ट स्पष्ट है और आवेदन पूर्ण है, तो NCLT को 14 दिनों में उन्हें स्वीकार या अस्वीकार करना होगा; देरी के लिए लिखित कारण देना अनिवार्य है।
जवाबदेही और बाध्यकारी समयसीमासमाधान योजना या अन्य आदेशों के लिए भी 30 दिनों का समय तय किया गया है। इसके बाद प्रक्रिया धीमी नहीं हो सकती।
लेनदारों का नियंत्रणCoC (Committee of Creditors) को न केवल समाधान बल्कि द्रव्यमान (liquidation) प्रक्रिया में भी व्यापक अधिकार तथा निगरानी का अधिकार।
निकासी प्रक्रिया में कठोरता§12A के अंतर्गत आवेदन वापस लेने हेतु केवल CoC की 90% मंज़ूरी अनिवार्य की गई, और यह केवल CoC गठन के बाद ही संभव हो सकता है।
ग्रुप और क्रॉस-बॉर्डर ढांचेसमूहों (group insolvency) व अंतर्राष्ट्रीय मामले (cross-border insolvency) के लिए विशेष प्रावधान प्रस्तावित—देखभाल व्यवस्था और गुंजाइश बढ़ाने हेतु।
कानूनी अस्पष्टताओं का निराकरणRainbow Papers (2022) और अन्य सुप्रीम कोर्ट फैसलों के प्रभाव को उलटने हेतु परिभाषाओं में संशोधन कर सरकार की देनदारियों को secured creditor से अलग किया गया।
‘Clean-Slate’ सिद्धांत मजबूत§31 में संशोधन से पूर्ण समाधान योजना मान्य होगी और संपत्तियों की रक्षा सुनिश्चित होगी—ED या अन्य एजेंसियों द्वारा हस्तक्षेप नहीं हो सकेगा।
लोकल नियामकीय हस्तक्षेप में कटौतीCompetition Commission of India (CCI) की मंजूरी अब CoC के बाद ही जरूरी होगी—इससे विवाद और देरी कम होगी।
अन्य सुधार– Frivolous मामलों पर पेनल्टी बढ़ाना।
• RP को LC में बदलने या प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप पर रोक।
• Partial asset sale की अनुमति।
• Liquidation को 180 दिनों में पूरा करना (90 दिन का विस्तार संभावित)। 
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IBC Amendment Bill 2025

उद्देश्य

  • देरी को समाप्त करना, जिससे IBC का लागू समय (जेनेरिक 330 दिन) प्रभावित न हो।
  • लेनदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, जिससे वे अपनी पूँजी और नियंत्रण संरक्षित रख सकें।
  • विश्वसनीयता और निवेश आकर्षण बढ़ाना—speedy resolution से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

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