Mamata Banerjee के खिलाफ शिकायत दर्ज, संवैधानिक संस्थाओं पर कथित विवादित बयानों को लेकर उठे सवाल

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee के खिलाफ गुरुवार को सिलीगुड़ी साइबर पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत वकील रिंकी चटर्जी सिंह द्वारा दर्ज कराई गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि Mamata Banerjee ने हाल के सार्वजनिक भाषणों और राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान ऐसे बयान दिए जो संवैधानिक संस्थाओं और सुरक्षा एजेंसियों की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले और भड़काऊ प्रकृति के थे।
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चुनाव आयोग और केंद्रीय बलों पर टिप्पणी को लेकर आपत्ति
शिकायत में दावा किया गया है कि Mamata Banerjee ने विभिन्न राजनीतिक मंचों और मीडिया बातचीत के दौरान भारत के चुनाव आयोग तथा चुनावों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात केंद्रीय सशस्त्र बलों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस प्रकार के बयानों से जनता के बीच संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास और नाराजगी पैदा करने का प्रयास किया गया।
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शिकायत में कहा गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक संस्थाओं की साख अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और उनके खिलाफ बिना पर्याप्त आधार के लगाए गए आरोप सामाजिक और राजनीतिक तनाव को बढ़ा सकते हैं।
Mamata Banerjee के 2 जून के भाषण का भी किया गया उल्लेख
शिकायत में 2 जून 2026 को रानी रश्मोनी स्मारक में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उस कार्यक्रम में Mamata Banerjee ने कथित तौर पर दावा किया था कि उनकी भारत सरकार के गृह मंत्रालय के साथ गोपनीय बातचीत हुई थी।

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शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने बयान में केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री को पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुई एक राजनीतिक हत्या से जोड़ने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह के आरोपों का उद्देश्य केंद्र सरकार की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाना और दो संप्रभु देशों के बीच तनाव पैदा करना हो सकता है।
कानूनी कार्रवाई और जांच की मांग
रिंकी चटर्जी सिंह ने अपनी शिकायत में पुलिस से मामले की विस्तृत जांच कराने और लागू कानूनों के तहत उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि यदि ऐसे बयानों की निष्पक्ष जांच नहीं की गई तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है।
हालांकि, शिकायत दर्ज होने के बाद इस मामले पर ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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पहले भी दर्ज हो चुकी है एक शिकायत
यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी के खिलाफ इस तरह की शिकायत दर्ज हुई हो। लगभग एक सप्ताह पहले भी उनके खिलाफ एक अन्य शिकायत दर्ज कराई गई थी। उस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पिछले वर्ष कोलकाता में आयोजित एक ईद समारोह के दौरान उन्होंने सनातन धर्म को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
शिकायतकर्ता का दावा था कि उस टिप्पणी से सनातन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची और सामाजिक सौहार्द प्रभावित हुआ। हालांकि उस मामले में भी अंतिम कानूनी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
चुनावी बयानबाजी पर भी उठे सवाल
नई शिकायत में 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कथित बयानों का भी जिक्र किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, Mamata Banerjee ने एक बयान में कहा था कि यदि किसी विशेष समुदाय द्वारा हिंदुओं पर हमला किया जाता है तो “उनके 12 ता बेजे जाबे”। शिकायत में इस कथित बयान को भड़काऊ बताते हुए आरोप लगाया गया है कि इसका उद्देश्य मतदाताओं को प्रभावित करना और सामाजिक तनाव बढ़ाना था।
राजनीतिक और कानूनी बहस तेज
Mamata Banerjee के खिलाफ लगातार दर्ज हो रही शिकायतों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां शिकायतकर्ता इसे संवैधानिक संस्थाओं और सामाजिक सौहार्द की रक्षा से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस शिकायत पर क्या कार्रवाई करती है और तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस पूरे विवाद पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
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