“Mamata Banerjee के समर्थन में उतरे TMC कार्यकर्ता, Kunal Ghosh का बड़ा दावा”

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने दावा किया है कि पार्टी कार्यकर्ता अब भी Mamata Banerjee के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में उत्तर कोलकाता में आयोजित पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और “हम गद्दार नहीं हैं, हम Mamata दीदी के साथ हैं” के नारे लगाए। इस बीच, पार्टी के भीतर बागी गुट की सक्रियता और नए नेतृत्व ढांचे के गठन ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

“हम गद्दार नहीं, दीदी के साथ हैं”: Kunal Ghosh

कोलकाता में मीडिया से बातचीत करते हुए तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं का समर्थन अभी भी पूरी तरह से Mamata Banerjee के साथ है। उन्होंने बताया कि उत्तर कोलकाता में आयोजित कार्यकर्ताओं की बैठक में भारी बारिश के बावजूद हॉल खचाखच भरा हुआ था और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता बाहर भी मौजूद रहे।

कुणाल घोष ने कहा, “हम गद्दार नहीं हैं, हम दीदी के साथ हैं। Mamata Banerjee ने स्वयं टेलीफोन संदेश के माध्यम से कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और उन पर अपना पूरा विश्वास जताया।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने के लिए झूठे मामलों का सहारा ले रही है। उनके अनुसार, जो लोग तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर जीत हासिल करने के बाद पार्टी छोड़ रहे हैं, वे पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं के साथ विश्वासघात कर रहे हैं।

पार्टी में बढ़ी अंदरूनी खींचतान

कुणाल घोष का यह बयान ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक संकट गहराता नजर आ रहा है। पार्टी के बागी गुट का नेतृत्व कर रहे रीताब्रत बनर्जी ने हाल ही में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस कमेटी के लिए एक नए नेतृत्व ढांचे की घोषणा की है। इस गुट ने वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को पार्टी का चेयरपर्सन नियुक्त करने का दावा किया है।

बागी गुट ने 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NWC) के गठन की भी घोषणा की है। इस समिति में फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष, सबीना यास्मीन, जावेद खान और संदीपन साहा सहित कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। वहीं, फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दिए जाने की बात कही गई है।

58 विधायकों के समर्थन का दावा

रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने दावा किया है कि उसे तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से कम से कम 58 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इस दावे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस दावे की पुष्टि नहीं की गई है।

बागी गुट ने यह भी कहा है कि वह Mamata Banerjee को पार्टी में एक “मेंटोर” की भूमिका में देखना चाहता है, जबकि संगठनात्मक जिम्मेदारियां नए नेतृत्व को सौंपी जानी चाहिए।

सांसदों का भी अलग रास्ता

राजनीतिक घटनाक्रम को और गंभीर बनाते हुए, काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा की है। इस कदम को पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

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Mamata Banerjee ने दिखाई सक्रियता

पार्टी के भीतर बढ़ते संकट के बीच Mamata Banerjee ने भी अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग को पार्टी पदाधिकारियों की एक आधिकारिक सूची सौंपी है, जिसमें स्वयं को पार्टी का चेयरपर्सन बताया गया है। इसे पार्टी पर अपनी पकड़ बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल

तृणमूल कांग्रेस के भीतर पैदा हुई यह स्थिति पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक ओर कुणाल घोष जैसे नेता पार्टी कार्यकर्ताओं की वफादारी और Mamata Banerjee के नेतृत्व पर भरोसा जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बागी गुट नए संगठनात्मक ढांचे और वैकल्पिक नेतृत्व की बात कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि तृणमूल कांग्रेस इस राजनीतिक संकट से कैसे बाहर निकलती है और क्या पार्टी एकजुट रह पाती है या फिर बंगाल की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।

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