चुनाव आयोग पर Sachin Pilot का निशाना, निष्पक्षता को लेकर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता Sachin Pilot ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया और इस पद पर बैठे व्यक्ति को मिली कानूनी छूट पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इन प्रावधानों से चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर चिंताएं पैदा होती हैं।

इसी को देखते हुए कांग्रेस पार्टी CEC के खिलाफ एक ‘सार्वजनिक महाभियोग कार्यवाही’ आयोजित करने की योजना बना रही है। पायलट ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने पक्षपात दिखाया है और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की निष्पक्षता को खतरे में डाल दिया है।

उन्होंने कहा कि एक कामकाज करने वाले लोकतंत्र में यह भी जरूरी है कि जनता का इन संस्थाओं पर भरोसा बना रहे और यह भरोसा और मजबूत हो। दिए एक साक्षात्कार में, पायलट ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर चल रहे विवाद का जिक्र किया और दावा किया कि 13.3 करोड़ लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।

Sachin Pilot का तीखा तंज

उन्होंने कहा, “अगर मैच का अंपायर ही पक्षपाती हो, तो खेलने का क्या मतलब है?” देश की संस्थाओं में भरोसा जताते हुए उन्होंने आगे कहा, “आखिरकार, हम सब भरोसे पर ही काम करते हैं। हमें सिस्टम पर भरोसा रखना होता है।

जब सिस्टम पर ही कोई ऐसा व्यक्ति सवाल उठाए, जिस पर हमें शक हो कि वह निष्पक्ष नहीं है, तो फिर चुनावों में निष्पक्षता कैसे हो सकती है?” उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने जो “गलतियां” की हैं, वे दस्तावेजी सबूतों से साबित हो चुकी हैं।

इसी वजह से उनके खिलाफ ‘पब्लिक महाभियोग’ (public impeachment) की प्रक्रिया शुरू करना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान ज्ञानेश कुमार ने जो गलतियां की हैं, उनके खिलाफ काफी ठोस डेटा और दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं।”

‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन ने शनिवार को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘पब्लिक महाभियोग’ की प्रक्रिया चलाने की योजना बनाई है। शुक्रवार को बारिश की वजह से इसे टालना पड़ा था। रविवार को ‘इंडिया’ गठबंधन ने ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के विरोध में रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली करने की योजना बनाई है।

Sachin Pilot के अनुसार, यह सीधे तौर पर वोट देने के मौलिक अधिकार के लिए एक चुनौती है। उन्होंने कहा, “मतदाता सूची से 13.3 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। यह हमारे गणतंत्र के सबसे बुनियादी मुद्दे, यानी वोट देने के अधिकार के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है।”

पायलट ने आरोप लगाया कि संसद में उठाए गए सवालों का सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने संसद के कई सत्रों में बने गतिरोध के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष और भारत की जनता को जवाब देने में नाकाम रही है, इसलिए इन मुद्दों को उठाना और भी जरूरी हो गया है।

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सवालों के जवाब देने की मांग

कांग्रेस नेता ने कहा, “जब संसद के अंदर सवाल पूछे जाते हैं, तो कोई जवाब नहीं मिलता। इसलिए, भारत की जनता और विपक्ष का इन मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर उठाना बिल्कुल जायज है… एक राजनीतिक दल के तौर पर, हमें यह मुद्दा उठाने और जवाब मांगने का पूरा अधिकार है।”

CEC (मुख्य चुनाव आयुक्त) की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए, Sachin Pilot ने कहा कि पहले की चयन प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते थे, जिससे सरकार को 2-1 का फायदा मिलता था।

उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि सरकार को एक ऐसा कानून लाने की क्या ज़रूरत थी, जो CEC को पद छोड़ने के बाद भी सुरक्षा (इम्युनिटी) प्रदान करे। पायलट ने कहा, “सरकार को एक नया कानून पास करने की क्या ज़रूरत थी, जो मुख्य चुनाव आयुक्त को जीवन भर के लिए सुरक्षा (इम्युनिटी) दे? अब, देश में वह इकलौते व्यक्ति होंगे – न तो प्रधानमंत्री, न मुख्यमंत्री, न ही इंटेलिजेंस डायरेक्टर या सेना प्रमुख – बल्कि सिर्फ वही एक व्यक्ति होंगे, जिन्हें पद छोड़ने के बाद जीवन भर के लिए सुरक्षा मिलेगी।”

उन्होंने चुनाव आयुक्तों को ऐसी सुरक्षा देने के तर्क पर भी सवाल उठाया और कहा कि इससे सरकार द्वारा मांगी जा रही गारंटी को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं। पायलट ने कहा कि विपक्ष लोगों, खासकर युवाओं के बीच चुनावी संस्थाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर जागरूकता फैलाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा कि जिन संस्थाओं से पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से काम करने की उम्मीद की जाती है, उन्हें राजनीतिक विचारधारा और जुड़ाव से ऊपर रहना चाहिए। उन्होंने इन मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर उठाने के विपक्ष के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि संसद ठीक से काम नहीं कर रही है और सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों के उचित जवाब नहीं मिल रहे हैं।

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Supreme Court में पहुंचा मामला

उन्होंने कहा, “यह लड़ाई पहले से ही कई स्तरों पर चल रही है। हम सुप्रीम कोर्ट भी गए हैं। मामले चल रहे हैं और अभी अदालत के विचाराधीन (sub judice) हैं। चुनाव आयोग ने भी एक स्पष्टीकरण दिया है, जिससे जाहिर तौर पर आप संतुष्ट नहीं हैं।”

इस सवाल के जवाब में कि क्या इन मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाना ही आगे बढ़ने का एकमात्र तरीका है, पायलट ने कहा कि लोगों का संस्थाओं पर भरोसा होना चाहिए, लेकिन जब पूरी व्यवस्था की निष्पक्षता पर ही सवाल उठने लगें, तो वह भरोसा डगमगा जाता है।

यह लड़ाई पहले से ही कई स्तरों पर चल रही है। हम सुप्रीम कोर्ट भी गए हैं। मामले चल रहे हैं, जो अभी अदालत के विचाराधीन हैं। साथ ही, मुझे लगता है कि चुनाव आयोग ने भी एक स्पष्टीकरण दिया है, जिससे जाहिर तौर पर आप संतुष्ट नहीं हैं।”

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